Ram Mandir donation controversy: अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की दान राशि और चढ़ावा चोरी के मामले में विवाद गहराता जा रहा है। अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के एक लिखित बयान ने इस पूरे मामले में नई हलचल पैदा कर दी है। अपने बयान में चंपत राय ने मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा पर तीखा हमला बोला है। चंपत राय का आरोप है कि नृपेंद्र मिश्रा के मीडिया में लगातार इंटरव्यू देने से जनता के बीच बेहद गलत संदेश गया है और साधु-संतों की नजर में वे एक ‘खलनायक’ की तरह सामने आए हैं।
‘6 साल कुछ नहीं बोले, 4 दिन में 14 चैनलों पर इंटरव्यू दे दिए’| Ram Mandir donation controversy
चंपत राय के लिखित बयान के मुताबिक, 6 जुलाई को ट्रस्ट की बैठक में नृपेंद्र मिश्रा का आना तय था और उनका टिकट भी बुक हो चुका था, लेकिन 4 जुलाई को उन्होंने अचानक अपना दौरा रद्द कर दिया। चंपत राय ने सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले 6 सालों के दौरान नृपेंद्र मिश्रा ने मंदिर की आंतरिक व्यवस्थाओं को लेकर कभी किसी से कोई बातचीत नहीं की, लेकिन विवाद सामने आते ही महज 4 दिनों के भीतर 14 टीवी चैनलों पर इंटरव्यू देकर व्यवस्थाओं पर सवाल उठाना पूरी तरह अनुचित था।
SIT की 5 घंटे पूछताछ और राजनीतिक असर का डर
गौरतलब है कि मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने 15 जुलाई को चंपत राय से करीब 5 घंटे तक सघन पूछताछ की थी। जांच में यह बात भी सामने आई कि जब चोरी का मामला पहली बार उजागर हुआ था, तो चंपत राय ने तत्काल पुलिस में एफआईआर दर्ज करवाने से मना किया था। सामने आए दस्तावेजों के अनुसार, चंपत राय को आशंका थी कि इस विवाद के तूल पकड़ने से आगामी विधानसभा चुनावों पर प्रतिकूल राजनीतिक असर पड़ सकता है। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने ही लोगों के बीच किसी ‘भेदी’ के मौजूद होने का अंदेशा जताया, जिसने अंदरूनी जानकारियां समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव तक पहुंचाईं।
11 जून की गोपनीय बैठक और दुष्प्रचार का दावा
दस्तावेजों में खुलासा हुआ है कि 11 जून को लखनऊ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ नेता भैयाजी जोशी की अध्यक्षता में एक गोपनीय बैठक हुई थी। इस बैठक में ट्रस्ट के 5 सदस्य और प्रांत प्रचारक समेत कुल 7 लोग मौजूद थे। चंपत राय चाहते थे कि यह बात किसी भी सूरत में मीडिया या जनता के बीच लीक न हो। उनका दावा है कि पूरे विवाद के जरिए राम मंदिर ट्रस्ट की छवि खराब करने के लिए एक प्रायोजित दुष्प्रचार चलाया गया। इसी बीच मामले से जुड़े एक आरोपी के नेपाल भागने की कोशिश को नाकाम करते हुए उसे भारत-नेपाल सीमा पर दबोच लिया गया।
अयोध्या में आज संतों की महाबैठक: नार्को टेस्ट और CBI जांच की मांग
इस खुलासे के बाद अयोध्या के साधु-संतों में भारी आक्रोश है। कंप्यूटर बाबा सहित कई प्रमुख संतों ने आज अयोध्या में एक बड़ी बैठक बुलाई है। संत समाज का आरोप है कि एसआईटी केवल छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर रही है, जबकि बड़े ओहदेदारों को बचाया जा रहा है। संतों ने चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ-साथ चंपत राय के नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की मांग उठाई है। पूरे मामले की निष्पक्ष व उच्चस्तरीय सीबीआई जांच की मांग को लेकर संत समाज बैठक के बाद मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपेगा और रामलला के दरबार में हाजिरी लगाकर इस पूरे घटनाक्रम के लिए प्रभु राम से क्षमा याचना करेगा।













































