Paytm Block Deal: पेटीएम की पैरेंट कंपनी वन97 कम्युनिकेशंस के शेयरों में सोमवार को आई गिरावट के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। इस कंपनी के संस्थापक और सीईओ विजय शेखर शर्मा के पूर्ण स्वामित्व वाली नीदरलैंड की फर्म ‘रेजिलिएंट एसेट मैनेजमेंट’ पेटीएम में अपनी 4.98 फीसदी तक हिस्सेदारी बेचने की तैयारी कर रही है। यह हिस्सेदारी बिक्री ब्लॉक डील के जरिए पूरी की जाएगी, जिससे बड़े निवेशकों को मौजूदा बाजार भाव से कुछ कम कीमत पर शेयर खरीदने का अवसर मिल सकता है।
ब्लॉक डील का गणित और शेयर का फ्लोर प्राइस| Paytm Block Deal
सोमवार के कारोबारी सत्र में पेटीएम का शेयर 1.4 फीसदी की गिरावट के साथ ₹1,580.20 पर बंद हुआ था। इस बंद भाव के आधार पर बेची जाने वाली 4.98 फीसदी हिस्सेदारी की बाजार वैल्यू करीब ₹5,040 करोड़ बैठती है। हालांकि, रिपोर्ट्स के अनुसार इस ब्लॉक डील के लिए फ्लोर प्राइस ₹1,535.10 प्रति शेयर तय किया जा सकता है। यह कीमत सोमवार के क्लोजिंग प्राइस से लगभग 2.9 फीसदी कम (डिस्काउंट पर) है। यदि पूरी 4.98 फीसदी हिस्सेदारी इस तय फ्लोर प्राइस पर बिकती है, तो इस सौदे का कुल आकार करीब ₹4,895 करोड़ रहने का अनुमान है।
रेजिलिएंट ने कैसे ली थी हिस्सेदारी?
रेजिलिएंट एसेट मैनेजमेंट ने साल 2023 में ‘एंटफिन नीदरलैंड होल्डिंग’ से पेटीएम में लगभग 10.20 फीसदी हिस्सेदारी ली थी। यह सौदा सीधे शेयर खरीद के बजाय अल्टरनेटिव कन्वर्टिबल डिबेंचर (OCD) संरचना के माध्यम से पूरा किया गया था। इस व्यवस्था के तहत रेजिलिएंट को शेयरों पर मालिकाना हक और वोटिंग अधिकार मिले थे, जबकि शेयरों का आर्थिक लाभ (इकोनॉमिक इंटरेस्ट) एंटफिन के पास सुरक्षित रहा था। इसी व्यवस्था के तहत अब प्रस्तावित ब्लॉक डील से मिलने वाली रकम का आर्थिक फायदा भी एंटफिन को ही मिलेगा।
विजय शेखर शर्मा की सीधी हिस्सेदारी पर क्या असर?
कंपनी के अनुसार, इस प्रस्तावित ब्लॉक डील से पेटीएम में विजय शेखर शर्मा की अपनी सीधी हिस्सेदारी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। जून तिमाही के अंत तक विजय शेखर शर्मा के पास कंपनी में सीधे तौर पर 9.03 फीसदी हिस्सेदारी दर्ज थी। इसका अर्थ यह है कि रेजिलिएंट के जरिए बेची जा रही हिस्सेदारी को शर्मा की निजी होल्डिंग में कटौती के रूप में नहीं गिना जाएगा।
शेयर बाजार और निवेशकों के लिए मायने
बाजार के जानकारों का मानना है कि इतनी बड़ी मात्रा में नए शेयर बाजार में आने से पेटीएम के स्टॉक पर थोड़े समय के लिए दबाव देखने को मिल सकता है। हालांकि, यदि ब्लॉक डील सुचारू रूप से पूरी होती है और बड़े संस्थागत निवेशक इसे हाथों-हाथ लेते हैं, तो कंपनी के मजबूत कारोबारी आंकड़ों के दम पर लंबी अवधि में इसका असर सीमित रहने की संभावना है।
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