Vande Mataram controversy: 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कांग्रेस दफ्तर में आयोजित कार्यक्रम अब एक बड़े राजनीतिक विवाद में बदल चुका है। 15 अगस्त को ध्वजारोहण के दौरान जब राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ गाया जा रहा था, ठीक उसी वक्त कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और वर्तमान अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बीच हुई बातचीत पर भारतीय जनता पार्टी ने कड़ा ऐतराज जताया है। बीजेपी ने इसे देश के 140 करोड़ नागरिकों और स्वतंत्रता सेनानियों के गौरव का अपमान बताते हुए कांग्रेस से सार्वजनिक तौर पर माफी मांगने की मांग उठाई है।
बीजेपी का आरोप: ‘यह साधारण गाना नहीं, आजादी का जयघोष है’| Vande Mataram controversy
रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने एक वीडियो क्लिप सामने रखी। भंडारी का दावा है कि इस वीडियो में राहुल गांधी कहते सुनाई दे रहे हैं कि ‘हमें गाने की जरूरत नहीं है’ और ‘हम वंदे मातरम् नहीं गा रहे हैं, हम यहां अपना वंदे मातरम् गा रहे हैं।’ प्रदीप भंडारी ने हमला बोलते हुए कहा कि वंदे मातरम् कोई मामूली गाना नहीं, बल्कि देश के मतवालों का उद्घोष और सवा सौ करोड़ से ज्यादा देशवासियों की अटूट देशभक्ति की भावना है। उन्होंने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी के रवैये से साफ जाहिर होता है कि वे राष्ट्रगीत के प्रति गंभीर नहीं हैं और इस तरह की बातें करके देशवासियों की भावनाओं को ठेस पहुंचा रहे हैं।
वहीं, बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मोर्चा खोलते हुए दावा किया कि स्वतंत्रता दिवस पर पहली बार कांग्रेस दफ्तर में पूरे वंदे मातरम् का गायन किया जा रहा था। मालवीय का आरोप है कि शुरुआती लाइन गाने के बाद सोनिया गांधी असहज हो गईं और उन्होंने इसे बीच में ही रोकने का इशारा किया, जिससे राहुल गांधी भी सहमत दिखे। हालांकि, जब उन्हें कानूनी नियमों और व्यवधान डालने के गंभीर नतीजों का अहसास कराया गया, तब जाकर पूरे छह अंतरे गाए गए। मालवीय ने कहा कि गांधी परिवार का भारत की सांस्कृतिक जड़ों और सभ्यतागत मूल्यों के साथ हमेशा से असहज रिश्ता रहा है, जो स्वतंत्रता दिवस के दिन एक बार फिर सबके सामने आ गया।
कांग्रेस की सफाई: खरगे जी की सेहत को लेकर चिंतित थीं सोनिया
विवाद गहराते ही कांग्रेस की तरफ से तुरंत सफाई पेश की गई। पार्टी ने राष्ट्रगीत के अपमान या गायन रोकने के तमाम दावों को बेबुनियाद बताया। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने पूरे घटनाक्रम की असलियत बताते हुए कहा कि मल्लिकार्जुन खरगे काफी देर से खड़े थे। सोनिया गांधी सिर्फ उनकी उम्र और सेहत को देखते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं को उनके बैठने के लिए कुर्सी लाने का इशारा कर रही थीं, जिसे बीजेपी ने जानबूझकर गलत तरीके से पेश किया।
1937 के कलकत्ता अधिवेशन की याद दिलाई
जयराम रमेश ने इस मुद्दे पर ऐतिहासिक पृष्ठभूमि रखते हुए कहा कि 28 अक्टूबर 1937 को कलकत्ता में महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, सरदार वल्लभभाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद, पंडित जवाहरलाल नेहरू, गोविंद बल्लभ पंत और सी. राजगोपालाचारी की मौजूदगी में कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक हुई थी। उस ऐतिहासिक बैठक में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह के बाद यह तय हुआ था कि कांग्रेस अधिवेशनों में वंदे मातरम् के शुरुआती अंतरों का गायन होगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि तब से लेकर आज तक कांग्रेस सेवा दल और कार्यकर्ता पूरी निष्ठा के साथ इसे गाते आए हैं। इस कार्यक्रम में भी सभी छह अंतरे पूरे सम्मान के साथ गाए गए, इसलिए इस पूरे मामले पर कोई विवाद खड़ा करना सिर्फ राजनीतिक दुर्भावना है।










































