भारत का एकमात्र ऐसा मंदिर, जहां एक ही छत के नीचे विराजमान हैं सभी 12 Jyotirlingas

Rajni | Nedrick News JharKhand Published: 11 अगस्त 2026, 11:06 PM Updated: 11 अगस्त 2026, 11:06 PM
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12 Jyotirlingas: हर शिव भक्त का यह सपना होता है कि वह अपने जीवनकाल में भारत के कोने-कोने में फैले 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कर सके। लेकिन अक्सर समय की कमी, खराब स्वास्थ्य या आर्थिक कारणों से यह यात्रा अधूरी रह जाती है। अब आपकी यह मनोकामना झारखंड के पलामू में स्थित भव्य भगवती भवन मंदिर में पूरी हो सकती है। यह चमत्कारी मंदिर पूरे भारत के आध्यात्मिक मानचित्र को एक ही छत के नीचे ले आया है, जहां आप एक साथ सभी 12 ज्योतिर्लिंगों के स्वरूपों का आशीर्वाद प्राप्त कर अपनी आस्था को सफल बना सकते हैं। तो चलिए, इस लेख के जरिए जानते हैं इसका धार्मिक महत्व।

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एक साथ 12 Jyotirlingas के पावन स्वरूपों के दर्शन

बता दें कि झारखंड के पलामू जिले में स्थित भगवती भवन मंदिर में आप देशभर के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों के पावन स्वरूपों के दर्शन एक साथ कर सकते हैं। यह अनोखा मंदिर उन शिव भक्तों के लिए आस्था का एक बड़ा केंद्र बन गया है, जो किसी कारणवश पूरे देश की यात्रा करने में असमर्थ हैं। यहाँ आकर भक्तों को एक ही स्थान पर पूरे भारत के प्रमुख शिव धामों की दिव्य ऊर्जा का अहसास होता है।

मंदिर की मुख्य विशेषताएं और इतिहास

पलामू का भगवती भवन मंदिर झारखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के शिव भक्तों के लिए एक बेहद खास और अनोखा धार्मिक स्थल बन चुका है। डाल्टनगंज (मेदिनीनगर) के रेड़मा चौक के पास स्थित इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ मुख्य गर्भगृह के दाईं ओर द्वादश (12) ज्योतिर्लिंगों (12 Jyotirlingas) की प्रतिकृतियां एक साथ स्थापित हैं। यह पलामू संभाग का पहला ऐसा मंदिर है, जहां भक्तों को एक ही छत के नीचे पूरे भारत के ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का पुण्य मिल जाता है।

पावन मंदिर से जुड़ी खास बातें

इस मंदिर को स्थानीय लोग रेड़मा काली मंदिर के नाम से भी जानते हैं। यहाँ दक्षिणेश्वर मां काली के भव्य रूप के साथ-साथ भगवान शिव के सभी 12 दुर्लभ ज्योतिर्लिंग विराजमान हैं। इस मंदिर में द्वादश ज्योतिर्लिंगों की स्थापना साल 1981 में बनारस के प्रसिद्ध पुजारी खुल्लू भट्टाचार्य द्वारा कराई गई थी। तब से यह क्षेत्र की आस्था का मुख्य केंद्र बना हुआ है।

यहाँ न केवल स्थानीय लोग, बल्कि हज़ारीबाग, रांची, सिमडेगा समेत बिहार, दिल्ली, बनारस और कोलकाता जैसे बड़े शहरों से भी श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुँचते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर में सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने पर भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यहाँ विशेष रूप से अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति के लिए महादेव के चरणों में अर्जी लगाई जाती है।

2 ज्योतिर्लिंगों का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

माना जाता है कि सभी 12 ज्योतिर्लिंग (12 Jyotirlingas) ‘स्वयंभू’ हैं, यानी इनकी स्थापना किसी इंसान ने नहीं की है, बल्कि भगवान शिव स्वयं यहाँ प्रकट हुए थे। शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति अपने जीवनकाल में इन 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कर लेता है, उसके सभी पाप धुल जाते हैं और उसे जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति (मोक्ष) मिल जाती है।

वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टियों से ये 12 स्थान पृथ्वी के ऐसे ऊर्जा केंद्र (Energy Centers) हैं, जहाँ अत्यधिक ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Energy) पाई जाती है। यहाँ ध्यान करने से मन को परम शांति मिलती है। ज्योतिर्लिंगों की पूजा करने से भक्तों को गंभीर बीमारियों और अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है; इसी वजह से पलामू के भगवती भवन मंदिर में भी लोग अकाल मृत्यु से रक्षा की अर्जी लगाते हैं।

ये 12 ज्योतिर्लिंग उत्तर में केदारनाथ (उत्तराखंड) से लेकर दक्षिण में रामेश्वरम (तमिलनाडु) तक और पश्चिम में सोमनाथ (गुजरात) से लेकर पूर्व में वैद्यनाथ (झारखंड) तक फैले हैं, जो पूरे भारत को सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रूप से एक सूत्र में पिरोते हैं। केदारनाथ, रामेश्वरम, सोमनाथ और वैद्यनाथ के अलावा इस पावन सूची में मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, भीमाशंकर, काशी विश्वनाथ, त्र्यंबकेश्वर, नागेश्वर और घृष्णेश्वर भी (12 Jyotirlingas) शामिल हैं।

Rajni

rajni@nedricknews.com

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