Pakistan political crisis: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में बढ़ते विरोध प्रदर्शन और जनता के गुस्से ने देश की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। हालात ऐसे बन गए हैं कि पाकिस्तान की सत्ताधारी पार्टी के अंदर ही मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। एक तरफ गृह मंत्री मोहसिन नकवी का गुट है, जो मानता है कि पाकिस्तान का सरकारी सिस्टम पूरी तरह कमजोर हो चुका है, वहीं दूसरी तरफ पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ का खेमा है, जो इस पूरे मामले के पीछे किसी बड़ी ताकत की भूमिका होने की बात कर रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोमवार (4 अगस्त) को नवाज शरीफ ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ अहम बैठक की। इस बैठक में उन्होंने नेताओं को साफ निर्देश दिए कि मोहसिन नकवी के बयानों पर कोई प्रतिक्रिया न दी जाए। नवाज शरीफ ने कहा कि पार्टी इस मुद्दे पर सोच-समझकर आगे की रणनीति के तहत बयान जारी करेगी और फिलहाल ऐसे नेताओं को नजरअंदाज किया जाए।
मोहसिन नकवी के बयान से मचा सियासी हंगामा| Pakistan political crisis
दरअसल, गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने हाल ही में पाकिस्तान के प्रशासनिक सिस्टम पर सवाल उठाते हुए कहा था कि देश को मजबूत ढांचे की जरूरत है। उन्होंने यहां तक कहा कि जब तक व्यवस्था में बड़े बदलाव नहीं होंगे, तब तक पाकिस्तान की स्थिति में सुधार संभव नहीं है। नकवी ने पाकिस्तान को और अधिक प्रांतों में बांटने की बात भी कही थी। उनके इस बयान के बाद पाकिस्तान की राजनीति में बहस तेज हो गई। रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी नकवी के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन लोगों को लगता है कि सिस्टम खत्म हो चुका है, वे खुद उसी सिस्टम का हिस्सा क्यों बने हुए हैं।
मोहसिन नकवी को पाकिस्तान सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर का करीबी माना जाता है। वह गृह मंत्रालय संभालने के साथ-साथ पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष भी हैं। यही वजह है कि उनके बयान को केवल व्यक्तिगत राय नहीं बल्कि सेना समर्थित सोच के तौर पर भी देखा जा रहा है।
बिलावल भुट्टो के बयान से शुरू हुई नई हलचल
पाकिस्तान की राजनीति में यह बदलाव अचानक नहीं आया। पीओके में चुनाव प्रचार के दौरान पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के नेता बिलावल भुट्टो जरदारी ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को साथ आने का न्योता दिया था।
बिलावल ने कहा था कि पीओके चुनाव के बाद पाकिस्तान की मौजूदा सरकार को हटाने की मुहिम शुरू की जाएगी और इसमें वह इमरान खान का साथ चाहते हैं। वहीं इमरान खान लगातार आरोप लगाते रहे हैं कि नवाज शरीफ की पार्टी की वजह से पाकिस्तान में लोकतंत्र कमजोर हुआ है। इसके कुछ समय बाद ही मोहसिन नकवी ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए बड़ा बयान दे दिया, जिससे सियासी चर्चाएं और तेज हो गईं।
सेना और मोहसिन नकवी की भूमिका पर उठे सवाल
मोहसिन नकवी के बयान को लेकर जब पाकिस्तान सेना के प्रवक्ता से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था की ओर बढ़ना होगा और जरूरी सुधारों पर विचार किया जाना चाहिए। इस बयान के बाद राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सेना और मोहसिन नकवी किसी नई रणनीति पर काम कर सकते हैं। कुछ विश्लेषकों के मुताबिक, मौजूदा हालात में सरकार विरोधी नाराजगी का रुख बदलने की कोशिश की जा रही है।
जनता में बढ़ रहा गुस्सा
पाकिस्तान इस समय कई मोर्चों पर संकट का सामना कर रहा है। बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा, गिलगित-बाल्टिस्तान और पीओके जैसे इलाकों में विरोध प्रदर्शन लगातार बढ़ रहे हैं। आम लोग महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और पानी जैसी बुनियादी समस्याओं को लेकर नाराज हैं। ऐसे में पीओके का मुद्दा केवल क्षेत्रीय विवाद नहीं रह गया है, बल्कि पाकिस्तान की अंदरूनी राजनीति और सत्ता संघर्ष का बड़ा कारण बनता जा रहा है।












































