Amarinder Singh Raja Warring: भारतीय राजनीति में तुरक के इक्के का रोल प्ले करने वाला सबसे ज्यादा प्रभावशाली राज्य अगर कोई है तो वो है उत्तर प्रदेश। जनसंख्या में सबसे ज्यादा आबादी वाला राज्य यूपी हर राजनैतित पार्टी के लिए सत्ता की नींव खड़ी करने की ताकत रखता है.. इसी को मद्देनजर रखते हुए यूपी में आगामी विधासभा चुनावों को लेकर सभी पार्टियां काफी एक्टिव हो चुकी है, लेकिन यूपी के साथ एक और राज्य है, जहां 2027 में विधानसभा चुनाव है, लेकिन ये राज्य हमेशा से ही बाहरी पार्टियों के लिए एक टेढ़ी खीर रहा है..जी हां हम बात कर रहे है पंजाब की..फिलहाल यहां आप की सरकार है लेकिन इस बार बीजेपी जहां अपने लिए जमीन तलाशेगी तो वहीं कांग्रेस फिर से बड़ी वापसी के लिए तैयार है और विधानसभा चुनाव की कमान दी गई है पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष और लुधियाना सांसद अमरिंदर सिंह राजा वारिंग के हाथों में.. कैसे वो कांग्रेस के लिए एक बड़ी ढाल बने और राजनीति का सफर कैसे किया उन्होंने तय, जानेंगे राजा वारिंग के बारे में।
कौन है अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग
अमरिंदर सिंह राजा वारिंग या जिन्हें राजनीति के गलियारो में राजा वारिंग के नाम से जाना जाता है, उनका असली नाम अमरिंदर सिंह बराड़ है। जिनका जन्म 29 नवंबर 1977 को श्रीमुक्तसर साहिब में हुआ था। राजा वारिंग जब छोटे थे तभी उनके पिता कुलदीप सिंह और माता मलकीत कौर की मृत्यु हो गई थी। जिसके बाद उनके मामा औऱ सिंधवानी परिवार ने ही उनकी परवरिश की थी। उनकी शादी अमृता कौर से हुई और उनके दो बच्चे है। राजा वारिंग बचपन में राजा सोथा के नाम से जाने जाते थे, लेकिन जब वो व्यस्क हुए तो उन्होंने अपने पैतृक गांव वारिंग का नाम अपना लिया और वो राजा वारिंग कहलाने लगे। वारिंग ने अपने राजनैतिक करियर की शुरुआत भारतीय युवा कांग्रेस के सदस्य के तौर पर शुरु की थी।
वो पहले स्थानीय चुनावों में हिस्सा लेने लगे और 2012 में गिद्दड़बाहा लेजिस्लेटिव असेंबली के मेम्बर के तौर पर चुने गए और वहां से पहले ही चुनाव में विधायक चुने गए। इस दौरान उनका प्रभाव काफी तेजी से बढ़ा.. जिसके कारण उन्हें नेशनल कांग्रेस में जगह मिलने में ज्यादा देर नहीं लगी। कांग्रेस ने वारिंग को दिसंबर 2014 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के युवा प्रभाग चुना, औऱ उसी के साथ वो भारतीय युवा कांग्रेस के अध्यक्ष भी चुने गए। ये कार्यकाल मई 2018 तक रहा था। 2017 में फिर से पंजाब विधानसभा चुनाव हुए और वारिंग इस बार भी विजयी हुए, जहां उनके प्रभाव को देखते हुए पंजाब सरकार में ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर के लिए चुना गया था। 2017 में कांग्रेस ने बड़ी वापसी की थी औऱ करीब 10 सालो के बाद 117 विधानसभा सीटो में से 77 सीटें जीत कर प्रचंड बहुमत हासिल की थी।
यानि की वारिंग का प्रभाव और मजबूत हो गया था। 2022 में वारिंग फिर से चुनाव में खड़े हुए औऱ इस बार आप की लहर के बाद भी उन्होंने हैट्रिक लगाई और जीत दर्ज की। वारिंग कांग्रेस की साथ बचाने में सफल हुए जिससे खुश होकर कांग्रेस को अप्रैल 2022 में वारिंग को पंजाब में कांग्रेस का चीफ अपॉइंट किया.. पंजाब में कांग्रसे की जमीन को फिर से मजबूत करने के लिए वो लगातार ऐसे बड़े कदम उठा रहे है जिससे जनता का भरोसा कांग्रेस पर लौट आये उन्होंने चुनावो को लेकर कई हाई-प्रोफाइल कैंपेन किये, खासकर आप सरकार को ये याद दिलाया कि AAP सरकार से 2022 के मेनीफेस्टो में वादा किया था कि वो राज्य की सभी महिलाओं को 1000 रूपय देंगे, वो वादा आप सरकार को पूरा करना चाहिए.. आपको जानकर हैरानी होगी कि वारिंग ने इसके लिए विधानसभा तक मार्च निकाला था, औऱ ये संघर्ष काम कर गया.. इसी साल जुलाई महीने से सभी महीलाओं को 1000 रूपय महीने मिलना शुरु हो गया औऱ दलित महिलाओ को तो 1500 रूपय दिये जा रहे है।
वारिंग की चुनावी स्ट्रेटजी इतनी स्ट्रोंग औऱ प्रभावी है, जिसके दम पर ही वो हैट्रिक लगा पाये, उन्होंने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ही ऐलान कर दिया कि कांग्रेस 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों में 33 परसेंट सीटों पर महिला उम्मीदवारों को टिकट देंगी। वारिंग पंजाब से न केवल हिंसा, आतंकवाद और नशाखोरी के खिलाफ लड़ रहे है बल्कि को पंजाब से गैंगस्टर कल्चर को खत्म करने वाले हर गतिविधियों के खिलाफ खुल कर बोलते है। उन्होनें अभी हाल ही में वेब सीरीज लॉरेंस ऑफ पंजाब पर बैन लगाने के लिए पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में एक पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन फाइल की थी, क्योंकि ये फिल्म गैंगस्टर कल्चर को ग्लोरीफाई करती है जिससे पंजाब के युवा भटकते है।
वारिंग केवल विधानसभा तक ही सिमित नही रहे, 2024 के लोकसभा चुनावो में वो लुधियाना सीट के खड़े हुए और पहली ही बार में बीजेपी के रवनीत सिंह बिट्टू को 20,942 वोटों से हरा कर बता दिया कि वो क्यों कांग्रेस पार्टी के इतने चहेते औऱ लोकप्रिय नेता है। हालांकि वारिंग का विवादों से भी गहरा नाता रहा है, नवंबर 2025 में दिवंगत केंद्रीय गृह मंत्री बूटा सिंह पर टिप्पणी करने का मामला काफी उछला, बूटा सिंह के बेटे ने वारिंग पर आरोप लगाया कि उन्होंने बूटा सिंह के बारे में “काला मजहबी सिख” जैसा शब्द इस्तेमाल करके उनका अपमान किया था। मामले को बढ़ता देख वारिंग ने खुद आगे आकर माफी मांगी थी।
हालांकि इस मामले ने राजनीतिक रूप से उनकी छवि को छोड़ा नुकसान पहुंचाया था। वहीं जून 2022 में, शिरोमणि अकाली दल ने उनपर आरोप लगा कि ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर के तौर पर वारिंग ने बस-बॉडी खरीदने और रूट परमिट से जुड़े मामले में गड़बड़िया की थी। इसकी जांच के लिए सीबीआई जांच की मांग की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जानबूझ कर जयपुर की एक कंपनी को कॉंट्रेक्ट दिया गया, और मंहगे दामों पर दिया गया, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ.. ऐसा ही आरोप वर्तमान सीएम भगवंत मान ने भी लगाया था.. जिसकी अब भी जांच जारी है। तमाम आरोपो और विवादो के बाद भी वारिंग का फोकस अब 2027 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को फिर से पंजाब की सत्ता पर काबिज करने की है। अब देखना ये होगा कि वारिंग की लोकप्रियता से कांग्रेस को कितना फायदा होता है।
































