Punjab hidden gems: पंजाब के गौरवपूर्ण इतिहास पर तो अक्सर चर्चा होती है, लेकिन कई बार उस इतिहास के पीछे की छिपी सच्चाई से हम रूबरू नहीं हो पाते है। ये बेहद हास्यास्पद बात है कि बाहर से आए मुगलों और इस्लामिक शासकों की धरोहरों को भारत में जितनी ज्यादा तवज्जो दी गई, उतनी तवज्जो कई ऐसी ऐतिहासिक धरोहरों को नहीं दी गई जिसके वो हकदार थे, और शायद इसीलिए उनसे जुड़े इतिहास से भी ज्यादातर लोग अनजान है। पंजाब में आज भी कई ऐसे स्थल है जो एक बड़ी पहचान न होने के कारण पर्यटकों से अछूते है। जबकि इनका इतिहास में अहम रोल रहा है। अपने इस लेख में हम बात करेंगे पंजाब के ही कुछ ऐसे अनछुए धरोहरों के बारे में, जिन्हें आज भी बड़ी पहचान नहीं मिली लेकिन ये पंजाब की शान बढ़ा रहे है… इन धरोहरो के कारण पंजाब की प्रसिद्धि और उसकी शान में और बढ़ौतरी हो सकती है.. फिर भला क्यों सरकार इनकी अनदेखी कर रही है।
1, बनास बाग. संगरूर – Banas Bagh, Sangrur
संगरूर शहर को नाभा रियासत के राजपरिवार ने करीब 400 साल पहले जंगलो के बीच बसाया था, इसे ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में बसा कर यहां पर बाग बारांद्री मंदिर, गुरुद्वारे और घंटाघर भी बनवाये गए थे, ताकि जंगलो के बीच गर्मी के मौसम में राज परिवार यहां आकर रह सकें, इस शहर को राजस्थान की राजधानी जयपुर के ही तर्ज पर बनाया गया था। यहीं मौजूद है बनास बाग। जिसे 1827 ईसवी में जींद रियासत के राजा संगत ने बनाया था। बनास बाग अथवा बनासर बाग एक बड़े तालाब के बीच बना आलीशान महल है। जिसे 12 बड़े दरवाजो वाला महल भी कहा जाता है, इस महल को सफेद संगमरमर से बनवाया गया है। इसके दरवाजों पर खूबसूरत मीनाकारी की गई है। इसे बाद में महाराजा सरूप सिंह और रघुवीर सिंह ने पूरा करवाया है। जिस वक्त इसका निर्माण हुआ तब महल तक जाने के लिए लकड़ी के पुल का उपयोग किया जाता था। हालांकि धीरे धीरे इस महल को इतनी महत्ता नहीं दी गई जिससे ये पर्यटको की नजरों से बच कर रहा। जबकि यहां आप भारतीय संस्कृति और कला का का अनूठा संगम देख सकते है।
2, किला मुबारक नाभा – Qila Mubarak Nabha
नाभा शहर को 1755 में फूलकिया वंश के हमीर सिंह ने बसाया था। पटियाला के करीब 25 किलोमीटर दूर नाभा में ही मौजूद है किला मुबारक। मौजूदा समय में जर्जर हो चुका ये किला भले ही अब जीर्णोधार करने वाली धरोहरो में शामिल है लेकिन इस किले के आसपास कई औऱ धरोहरों को अनदेखा किया गया। 18वी सदी में बना ये किला, नाभा के साहसी शासको औऱ उनकी कला को लेकर बारीक समझ को दर्शाता है। आपको जानकार हैरानी होगी कि इस किले में शीशे के काम से लेकर रंगीन कांच लगाना, और पत्थर की जालियां होना, इसकी खूबसूरती को बढ़ा देता है। वहीं पास में है हीरा महल, जिसे राजा हीरा सिंह ने बनवाया था, जो अपनी वस्तुकला के लिए काफी प्रचलित है। वहीं यहां पर मिले सरद खाना, और भित्ति चित्र महाराजा रणजीत सिंह के वहां आने का सबूत है। इसे संवारने का काम तो शुरु हुआ है लेकिन इसे पहचान कभी मिलेगी भी या नही, ये नहीं कह सकते है।
3, हरिके वेटलैंड और बर्ड सैंचुरी- Harike Wetland and Bird Sanctuary
विदेशी पक्षियों के उत्तर भारत में प्रवास की सबसे पसंदीदा जगहों में से एक हरिके वेटलैंड और बर्ड सैंचुरी पंजाब के तरनतारन जिले से 35 किमी दूर पतन सतलुज और ब्यास नदी के संगम पर मौजूद उत्तर भारत की सबसे बड़ी आद्र भूमि है। यहां मौजूद बांध 1952 में निर्मित किया गया था, 1982 में पक्षी अभयारण्य घोषित किया गया और इसका नाम हरिके पट्टन पक्षी अभयारण्य रखा गया.. 1990 में सरकार ने इस भूमि को रामसर स्थल कहा था। ये पूरा क्षेत्र 8600 हेक्टेयर में फैला है।
4, संगोल बौद्ध विहार- Sanghol Buddhist Monastery
पंजाब में हड़प्पा सभ्यता के अवशेषों के मिलने के बाद ये शहर काफी प्रचलित हुआ, जबकि संगोल में मौजूद बौद्ध विहार यहां पर बौद्ध धर्म के होने का सबूत देते है। उंचा पिंड के नाम से मशहूर संगोल पंजाब के फतेहगढ़ में स्थित है। यहां खुदाई में पहले से दूसरी शताब्दी के बौद्ध विहार और स्तूपों के अवशेष मिले थे। यहां मिलने वाले अवशेषों को संग्रहित और सुरक्षित रखने के यहां संगोल संग्राहलय बनाया है। हालांकि इस स्थान को अब केवल पुरातत्व रिसर्च के लिए ही इस्तेमाल किया जाता है। यहां पर्यटर न के बराबर आते है।
5, नूर महल सराय ऑफ नूरमहल- Noor Mahal, The Caravanserai of Noor Mahal
पंजाब के जालंधर में मौजूद नूरमहल दरअसल एक शहर है, जहां मुगल बादशाह जहांगीर की पत्नी नूरजहां ने अपने आराम के लिए सराय बनवाया था। इस वक्त ये पुराने दिल्ली-लाहौर मार्ग पर मौजूद है। यहां जहागीर के सेना के लिए आराम करने के लिए कई कमरे हुआ करते थे, नूरजहां ने इसे मेहराबदार नक्काशी से सजवाया था। इसका बाहरी हिस्सा फतेहपुर सिकरी के दरवाज़ा की सजावट की तरह है। इस स्थान पर अभी दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान है। मौजूदा समय में नूरमहल को सभी भुला चुके है, जबकि ये हमारी ऐतिहासिक धरोहरो का सबूत है। ऐसे और भी कई स्थान है जिसकी अनदेखी की गई है। लेकिन सरकार अगर कोशिश करें तो उनका भी जीर्णोधार हो सकता है।





























