Prateek Yadav Last Tattoo: समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव के अचानक निधन ने पूरे राजनीतिक और सामाजिक जगत को हैरान कर दिया है। 38 वर्षीय प्रतीक यादव लंबे समय से कुछ स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। उनके निधन के बाद जहां परिवार और समर्थकों में शोक का माहौल है, वहीं अब उनके आखिरी टैटू की भी काफी चर्चा हो रही है। यह टैटू सिर्फ एक डिजाइन नहीं था, बल्कि जिंदगी, संघर्ष और मृत्यु के गहरे अर्थों से जुड़ा एक प्रतीक माना जा रहा है।
राजनीति से दूर, अलग अंदाज की जिंदगी| Prateek Yadav Last Tattoo
मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के बेटे प्रतीक यादव ने परिवार की राजनीतिक विरासत से अलग अपना रास्ता चुना था। वह सक्रिय राजनीति में कभी नजर नहीं आए, लेकिन बिजनेस और अपनी लाइफस्टाइल को लेकर अक्सर चर्चा में रहते थे। रियल एस्टेट समेत कई कारोबारों से जुड़े प्रतीक को लग्जरी लाइफ का शौक था।
उनकी महंगी गाड़ियां, खासकर लैम्बॉर्गिनी, सोशल मीडिया और खबरों में अक्सर सुर्खियां बटोरती थीं। इसके अलावा वह फिटनेस को लेकर भी काफी गंभीर रहते थे। जिम और हेल्थ को लेकर उनका जुनून किसी से छिपा नहीं था।
टैटू का था खास शौक
बहुत कम लोग जानते हैं कि प्रतीक यादव को टैटू बनवाने का भी बेहद शौक था। उन्होंने अपने शरीर पर कई अलग-अलग टैटू बनवाए थे। लेकिन सितंबर 2025 में बनवाया गया उनका आखिरी टैटू अब खास चर्चा में है। यह टैटू उन्होंने अपने दाहिने हाथ पर बनवाया था। इसे सेलिब्रिटी टैटू आर्टिस्ट साक्षी पंवार ने डिजाइन किया था, जो कई बॉलीवुड सितारों के टैटू भी बना चुकी हैं। टैटू में एक खास तरह का कंपास बना था, जिसे चारों तरफ से एक सांप घेरे हुए दिखाया गया था। सबसे खास बात यह थी कि सांप अपनी ही पूंछ को निगलता नजर आ रहा था।
क्या मतलब था इस टैटू का?
इस टैटू में नॉर्स मिथोलॉजी और पौराणिक प्रतीकों का अनोखा मिश्रण देखने को मिलता है। इसे बेहद बारीक फाइन-लाइन स्टाइल में तैयार किया गया था, जिसमें शेडिंग और डिटेलिंग पर खास काम किया गया था। टैटू के बीच में बना कंपास “वेगविसिर” कहलाता है, जिसे वाइकिंग कंपास भी कहा जाता है। आइसलैंड की मान्यताओं के अनुसार यह एक जादुई प्रतीक माना जाता है, जो मुश्किल हालात और जीवन के कठिन दौर में सही रास्ता दिखाने का काम करता है।
वहीं कंपास के चारों ओर बना सांप “ओरोबोरोस” का प्रतीक माना जाता है। इस प्रतीक में सांप अपनी ही पूंछ को निगलता दिखाया जाता है। इसे जीवन, मृत्यु, पुनर्जन्म और अनंत चक्र का प्रतीक माना जाता है। नॉर्स पौराणिक कथाओं में यह सर्प पूरी दुनिया को घेरे रखने वाला माना गया है।
निधन के बाद टैटू की बढ़ी चर्चा
प्रतीक यादव के अचानक निधन के बाद अब उनके इस टैटू को लोग अलग नजरिए से देख रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इस टैटू की तस्वीरें और उसके अर्थ को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कई लोग इसे जिंदगी और मृत्यु के शाश्वत सत्य से जोड़कर देख रहे हैं। दरअसल, यह टैटू जीवन के उस चक्र को दर्शाता है, जिसमें शुरुआत और अंत दोनों तय होते हैं। शायद यही वजह है कि प्रतीक के निधन के बाद यह डिजाइन लोगों के बीच भावनात्मक चर्चा का हिस्सा बन गया है।
परिवार और समर्थकों में शोक
प्रतीक यादव के निधन से यादव परिवार गहरे सदमे में है। अखिलेश यादव ने भी अपने भाई के निधन पर दुख जताया है। परिवार के करीबी और समर्थक लगातार श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
हालांकि राजनीति से दूरी बनाए रखने के बावजूद प्रतीक यादव अपनी अलग पहचान रखते थे। उनकी लाइफस्टाइल, फिटनेस और अलग सोच उन्हें बाकी लोगों से अलग बनाती थी। अब उनके जाने के बाद उनका आखिरी टैटू भी एक ऐसी याद बन गया है, जो जिंदगी के गहरे अर्थ की तरफ इशारा करता नजर आता है।





























