90% महिलाएं राजनीति में नहीं आ सकतीं… पप्पू यादव का बयान बना बवाल की वजह | Pappu Yadav Controversy

Nandani | Nedrick News Bihar Published: 22 Apr 2026, 11:25 AM | Updated: 22 Apr 2026, 11:25 AM

Pappu Yadav Controversy: महिलाओं की राजनीति में भागीदारी को लेकर ऐसा बयान दे दिया, जिससे सियासी और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। एक सार्वजनिक टिप्पणी में पप्पू यादव ने कहा कि “बिना नेता के कमरे में गए 90 प्रतिशत महिलाएं राजनीति में आगे नहीं बढ़ सकतीं।” उनके इस बयान के बाद हर तरफ आलोचना शुरू हो गई और इसे महिलाओं की गरिमा पर हमला बताया जा रहा है।

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महिलाओं को लेकर बयान पर उठे सवाल | Pappu Yadav Controversy

पप्पू यादव ने अपने बयान में यह भी कहा कि समाज में महिलाओं के साथ हर स्तर पर शोषण होता है—चाहे वह स्कूल हो, कॉलेज या ऑफिस। उन्होंने दावा किया कि एक तरह से “शोषण की संस्कृति” बन गई है, जहां महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए समझौता करना पड़ता है।

हालांकि, उनके बयान को कई लोगों ने महिलाओं के चरित्र और उनके संघर्ष पर सवाल उठाने वाला बताया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की टिप्पणी से गलत संदेश जाता है और यह महिलाओं की उपलब्धियों को कमतर आंकता है।

पहले भी दे चुके हैं विवादित बयान

यह पहली बार नहीं है जब पप्पू यादव इस तरह के बयान को लेकर चर्चा में आए हैं। कुछ दिन पहले उन्होंने संसद में यह कहकर भी विवाद खड़ा किया था कि नेता सबसे ज्यादा पोर्न देखते हैं। अब ताजा बयान ऐसे समय आया है जब देश में महिला आरक्षण और नारी सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर चर्चा चल रही है। उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम की मंशा पर भी सवाल उठाए थे।

महिला आयोग ने लिया संज्ञान

इस पूरे मामले पर बिहार राज्य महिला आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने पप्पू यादव को नोटिस जारी कर तीन दिनों के भीतर जवाब मांगा है। आयोग की सदस्य सजल झा ने इस बयान को गंभीर बताते हुए कहा कि यह महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला है और इस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर लोकसभा स्पीकर से उनकी सदस्यता रद्द करने की मांग पर भी विचार किया जा सकता है।

केंद्र सरकार पर भी लगाए आरोप

पप्पू यादव ने अपने बयान में केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं के मुद्दे पर सरकार ने लोगों को गुमराह किया है। साथ ही उन्होंने नेताओं के मोबाइल की जांच की मांग करते हुए कहा कि उनमें महिलाओं से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री होती है। उनके इन बयानों ने विवाद को और बढ़ा दिया है।

नोटिस का जवाब नहीं तो हो सकती है कार्रवाई

महिला आयोग ने साफ किया है कि अगर तय समय के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, तो आगे कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी। आयोग के पत्र में कहा गया है कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले व्यक्ति से इस तरह की भाषा की उम्मीद नहीं की जाती।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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