Rajesh Khanna House: दिवंगत सुपरस्टार राजेश खन्ना का मशहूर मुंबई स्थित सी-फेसिंग बंगला ‘आशीर्वाद’ हमेशा से फिल्म इंडस्ट्री की यादों का अहम हिस्सा रहा है। साल 2014 में यह बंगला करीब 90 करोड़ रुपये में बेच दिया गया था। बाद में इसे तोड़कर वहां एक लग्जरी अपार्टमेंट बिल्डिंग बना दी गई।
लेकिन इस बदलाव के बावजूद, इस घर से जुड़ी यादें आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं खासतौर पर वेटरन एक्ट्रेस मुमताज के लिए।
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मुमताज की भावुक यादें | Rajesh Khanna House
हाल ही में एक इंटरव्यू में मुमताज ने ‘आशीर्वाद’ को लेकर अपनी भावनाएं खुलकर साझा कीं। उन्होंने कहा कि यह बंगला उनके लिए सिर्फ एक घर नहीं था, बल्कि एक भावनात्मक जुड़ाव था। उन्होंने कहा, “मुझे बहुत दुख हुआ था। आज भी जब मैं उस जगह को देखती हूं, तो कहती हूं ये मेरे हीरो का घर था।” उनके मुताबिक यह बंगला अब भले ही बदल चुका है, लेकिन उनके लिए यह एक तरह का लैंडमार्क और स्मारक जैसा है।
पास में ही था उनका भी घर
मुमताज ने बताया कि उनका अपना घर भी उसी इलाके में था, जिसे उन्होंने एक्ट्रेस मीना कुमारी से खरीदा था। वह अक्सर राजेश खन्ना के बंगले में जाया करती थीं। उन्होंने यह भी याद किया कि उस दौर में अंजू महेंद्रु भी वहां मौजूद रहती थीं। मुमताज के मुताबिक, उस समय का माहौल काफी अपनापन और गर्मजोशी से भरा होता था।
फिल्मी दौर की यादें और अपनापन
मुमताज ने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री के लोग उस समय बहुत दिलदार हुआ करते थे। उन्होंने बताया कि जब अंजू महेंद्रु राजेश खन्ना के साथ थीं, तो उन्हें भी वहां बुलाया जाता था और अच्छे से बैठाया जाता था।
उन्होंने अपनी मंगनी के समय का एक किस्सा भी साझा किया, जब वह अपने मंगेतर मयूर के साथ वहां जाया करती थीं। उस दौरान राजेश खन्ना और अंजू दोनों ही उनका खास ध्यान रखते थे खाने-पीने से लेकर हर चीज का ख्याल रखा जाता था।
म्यूजियम बनाने का सपना रह गया अधूरा
मुमताज ने यह भी बताया कि उन्होंने सुना था कि ‘आशीर्वाद’ बंगले को एक म्यूजियम में बदलने की योजना थी, ताकि राजेश खन्ना की यादें हमेशा संजोकर रखी जा सकें।
लेकिन यह सपना पूरा नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि उनके निधन के बाद यह बंगला बिक गया और फिर इसे तोड़ दिया गया। हालांकि इसके पीछे के कारणों को लेकर कई बातें सुनने में आईं, लेकिन उन्होंने साफ कहा कि पूरी जानकारी के बिना वह इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहतीं।
काम के दौरान प्रोफेशनल समझ
इंटरव्यू में मुमताज ने राजेश खन्ना के साथ काम करने के अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि वह अक्सर देर से आते थे, लेकिन इसके बावजूद शूटिंग में कोई बड़ी परेशानी नहीं होती थी क्योंकि काम समय पर पूरा कर लिया जाता था।
उन्होंने कहा कि दोनों के बीच एक समझ बनी हुई थी—पहले उनके सोलो शॉट्स शूट होते थे और बाद में दोनों के साथ वाले सीन पूरे किए जाते थे।
एक याद जो आज भी जिंदा है
कुल मिलाकर, ‘आशीर्वाद’ बंगला भले ही अब इतिहास बन चुका हो, लेकिन राजेश खन्ना और मुमताज के लिए यह सिर्फ एक प्रॉपर्टी नहीं बल्कि यादों का खजाना था। मुमताज की बातों से साफ झलकता है कि उस दौर की फिल्मी दुनिया में रिश्तों की गर्माहट और अपनापन आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है।




























