हिमाचल में सैलरी शॉक! CM ने खुद की आधी तनख्वाह रोकी… मंत्रियों-विधायकों पर भी गिरी गाज | CM Sukhvinder Singh Sukhu

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CM Sukhvinder Singh Sukhu: आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे हिमाचल प्रदेश में सरकार ने एक अहम और प्रतीकात्मक फैसला लिया है। सुखविंदर सिंह सुखू के नेतृत्व वाली सरकार ने मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों के वेतन का एक हिस्सा छह महीने के लिए अस्थायी रूप से स्थगित करने का निर्णय लागू कर दिया है।

इस फैसले के तहत मुख्यमंत्री के वेतन का 50 प्रतिशत, मंत्रियों और विधानसभा अध्यक्ष का 30 प्रतिशत और विधायकों का 20 प्रतिशत हिस्सा फिलहाल नहीं दिया जाएगा। हालांकि, सरकार ने साफ किया है कि यह कटौती नहीं बल्कि केवल अस्थायी स्थगन है, जिसे भविष्य में वापस कर दिया जाएगा।

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राज्यपाल की मंजूरी के बाद जारी हुई अधिसूचना | CM Sukhvinder Singh Sukhu

इस फैसले को राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद मुख्य सचिव संजय गुप्ता की ओर से आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। यह निर्णय भारतीय संविधान के अनुच्छेद 162 और 166 के तहत लिया गया है। अधिसूचना के अनुसार, मई महीने में मुख्यमंत्री को 1.70 लाख रुपये वेतन मिलेगा। वहीं कैबिनेट मंत्रियों और विधानसभा अध्यक्ष को 2.24 लाख रुपये और विधायकों को करीब 2.36 लाख रुपये का भुगतान किया जाएगा।

अधिकारियों के वेतन पर फैसला अभी बाकी

हालांकि सरकार ने पहले आईएएस, आईपीएस और एचएएस अधिकारियों के वेतन में भी 20 प्रतिशत स्थगन का प्रस्ताव रखा था, लेकिन इस पर अभी अमल नहीं हुआ है। हिमाचल दिवस के मौके पर इस फैसले को फिलहाल वापस ले लिया गया था। यानी अभी केवल जनप्रतिनिधियों मुख्यमंत्री, मंत्री और विधायक पर ही यह नियम लागू किया गया है।

बजट में लिया गया था फैसला

इस फैसले की घोषणा मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट के दौरान की थी। उस समय उन्होंने साफ संकेत दिए थे कि राज्य की वित्तीय स्थिति को संभालने के लिए सख्त कदम उठाने जरूरी हैं। अब उसी फैसले को लागू करते हुए सरकार ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि आर्थिक संकट से निपटने के लिए जनप्रतिनिधि खुद भी जिम्मेदारी उठा रहे हैं।

कैसे तय होगा वेतन स्थगन?

सरकार ने इस प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने का दावा किया है। ई-सैलरी सिस्टम में पूरा वेतन और स्थगित राशि अलग-अलग दिखाई जाएगी। सैलरी स्लिप में भी इसका स्पष्ट उल्लेख होगा, ताकि किसी तरह की भ्रम की स्थिति न बने।

इसके अलावा, मुख्यमंत्री, मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष और विधायक सभी को अपने-अपने ऋण (लोन) की जानकारी लिखित रूप में देनी होगी। इसमें यह बताना होगा कि हर महीने उनकी कितनी EMI कटती है। इसके बाद बची हुई राशि पर ही वेतन का स्थगन लागू किया जाएगा।

टैक्स और अन्य कटौतियों का क्या होगा?

अधिसूचना में यह भी साफ किया गया है कि आयकर सहित सभी वैधानिक कटौतियां पूरे वेतन पर ही लागू होंगी। यानी टैक्स की गणना पूरी सैलरी पर होगी, न कि कम हुए हिस्से पर। इसके अलावा जिन विधायकों ने हाउस बिल्डिंग एडवांस (HBA) या मोटर कार एडवांस (MCA) लिया हुआ है, उनके लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं, ताकि उनकी वित्तीय स्थिति पर ज्यादा असर न पड़े।

सरकार का संदेश: संकट में साझेदारी जरूरी

सरकार का यह कदम सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि एक संदेश भी है कि आर्थिक चुनौतियों के समय जनप्रतिनिधि भी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटेंगे।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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