गौतम बुद्ध नगर: प्राइवेट छोड़ अब सरकारी स्कूलों का रूख कर रहे लोग, स्कूलों में बढ़ रहा छात्रों के दाखिले का ग्राफ

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 01 Jan 2022, 12:00 AM | Updated: 01 Jan 2022, 12:00 AM

कोरोना महामारी ने पिछले 2 सालों से हर किसी की जिंदगी पर काफी असर डाला। चाहे वो लॉकडाउन का सामना हो या फिर आर्थिक तंगी से जूझना। इस दौरान लोगों ने कई तरह के उतार चढ़ावों का सामना किया। वहीं इस दौरान सरकारी और निजी स्‍कूलों में बच्‍चों की संख्‍या बहुत कम नजर आ रही है। 

वहीं इस कोरोना महामारी के दौरान एक और बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। वो ये कि अब सरकारी स्कूलों की तरफ लोगों का रूख बढ़ने लगा है। बेसिक शिक्षा विभाग ने छात्रों के दाखिले में बीते कुछ समय में रिकॉर्ड वृद्धि देखी। हजारों की संख्या में लोगों ने सरकारी स्कूल की तरफ रूख किया है। 

पिछले कुछ समय के आंकड़ों पर गौर करें तो पहले स्कूल में प्रवेश का आंकड़ा 90 हजार के आसपास था, जो बढ़कर एक लाख 10 हजार के पार पहुंच गया। ये संख्या अभी भी लगातार बढ़ रही है। पहली बार छात्रों के सरकारी स्कूलों के दाखिले में इतनी ज्यादा वृद्धि होती हुई दिखने लगी है। बेसिक शिक्षा विभाग अब इन ही कोशिशों में जुटा है कि वो इन सभी छात्रों को शिक्षण सुविधा उपलब्ध कराई जा सकें। बता दें कि गौतम बुद्ध नगर में बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों की संख्या 511 है। 

बेसिक शिक्षा विभाग छात्रों की संख्या में इतना इजाफा होने की कई वजहें मानता है, जिसमें से एक ये भी है कि गरीबों में पिछले कुछ समय में लोगों की शिक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ी है।  पहले गरीब परिवार अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए स्कूलों में नहीं भेजते थे। लेकिन फिर बेसिक शिक्षा विभाग की टीम ने समय समय पर जागरूकता अभियान चलाए। जिसका असर भी देखने को मिला और स्कूलों में छात्रों की संख्या बढ़ी। 

इसके अलावा विभाग इसकी एक दूसरी वजह कोरोना महामारी को भी मानता है। कोरोना की वजह से लोगों की आर्थिक स्थिति खराब हुई, जिसकी वजह से उन्हें अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों से नाम कटवाकर सरकारी स्कूलों में दाखिला करना पड़ रहा है। 

वहीं छात्रों की संख्या में इजाफा होने की एक वजह गौतम बुद्ध नगर में बढ़ते रोजगार के अवसर को भी माना जा रहा है। यहां नए नए उद्योग बनाए जा रहे है। जिले में रोजगार की आस में कई परिवार आ रहे है। प्राइवेट स्कूलों की फीस ज्यादा होती है और वो लोग इसका बोझ नहीं उठा पाते, इसलिए ऐसे परिवार अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिला कराते हैं। 

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