BJP bypoll candidates 2026: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने गोवा, नागालैंड, कर्नाटक और त्रिपुरा में होने वाले विधानसभा उपचुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। यह फैसला पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में लिया गया, जो 18 मार्च 2026 को नई दिल्ली में आयोजित हुई थी।
ये सभी उपचुनाव उन सीटों पर हो रहे हैं, जहां मौजूदा विधायकों के निधन के कारण सीटें खाली हुई थीं। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक, इन सीटों पर मतदान 9 अप्रैल 2026 को होगा, जबकि नतीजे 4 मई 2026 को घोषित किए जाएंगे।
किसे मिला कहां से टिकट?
बीजेपी ने उम्मीदवारों के चयन में स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ रखने वाले नेताओं को प्राथमिकता दी है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि टिकट बांटने से पहले स्थानीय संगठन की राय को खास महत्व दिया गया। गोवा की पोंडा विधानसभा सीट (नंबर 21) से रितेश रवि नायक को उम्मीदवार बनाया गया है। यह सीट विधायक के निधन के बाद खाली हुई थी। नागालैंड की कोरिडांग (अनुसूचित जनजाति) सीट (नंबर 28) से दाओचियर इल इंचेन को टिकट दिया गया है। यहां भी उपचुनाव का कारण विधायक का निधन ही है।
भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने विभिन्न प्रदेशों में होने वाले विधानसभा उप-चुनाव 2026 के लिए निम्नलिखित नामों पर अपनी स्वीकृति प्रदान की है। pic.twitter.com/XFcRh1yLyD
— BJP (@BJP4India) March 19, 2026
कर्नाटक में पार्टी ने दो सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। बागलकोट सीट (नंबर 24) से वीरभद्रय्या चारंतिमठ को मैदान में उतारा गया है। वहीं दावणगेरे साउथ सीट (नंबर 107) से श्रीनिवास टी. दासाकिरप्पा को टिकट दिया गया है। इसके अलावा त्रिपुरा की धर्मनगर सीट (नंबर 56) से जहर चक्रवर्ती को उम्मीदवार बनाया गया है। इन सभी सीटों पर उपचुनाव का कारण विधायकों का निधन है।
केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में लगी मुहर (BJP bypoll candidates 2026)
उम्मीदवारों के नाम पर अंतिम फैसला बीजेपी की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में लिया गया। इस अहम बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। बैठक की अध्यक्षता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने की। बैठक में सभी नामों पर चर्चा के बाद अंतिम मंजूरी दी गई।
चुनाव आयोग की तैयारियां भी पूरी
दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने भी इन उपचुनावों को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। आयोग ने असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों के साथ-साथ 6 राज्यों में हो रहे उपचुनावों के लिए कुल 1,111 पर्यवेक्षक तैनात किए हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने पहले ही साफ कर दिया था कि चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से कराए जाएंगे। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया को हिंसा और किसी भी तरह के प्रलोभन से मुक्त रखना प्राथमिकता है, ताकि हर मतदाता बिना किसी डर के अपना वोट डाल सके। पर्यवेक्षकों की भूमिका इस पूरी प्रक्रिया में अहम मानी जा रही है, जो जमीनी स्तर पर नजर रखेंगे और किसी भी गड़बड़ी को तुरंत रोकने का काम करेंगे।
क्या है राजनीतिक महत्व?
हालांकि ये उपचुनाव सीमित सीटों पर हो रहे हैं, लेकिन इनका राजनीतिक महत्व कम नहीं है। बीजेपी के लिए यह अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखने का मौका है, जबकि विपक्षी दल भी इन सीटों पर जीत हासिल कर अपनी स्थिति मजबूत करना चाहेंगे।
अब नजर 9 अप्रैल को होने वाली वोटिंग पर है, जहां मतदाता तय करेंगे कि इन सीटों पर किसे प्रतिनिधित्व का मौका मिलता है। वहीं 4 मई को आने वाले नतीजे इन राज्यों की राजनीतिक दिशा को एक बार फिर स्पष्ट करेंगे।
