Iran America War: पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तल्खी ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के जरिए ईरान तक चार सख्त शर्तें पहुंचाई हैं। माना जा रहा है कि इन शर्तों में अमेरिका की ओर से साफ संदेश छिपा है कि अगर ईरान नहीं झुका तो हालात युद्ध तक पहुंच सकते हैं।
दूसरी तरफ तेहरान ने भी अपने रुख में नरमी के कोई संकेत नहीं दिए हैं। ईरान के सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई ने साफ कर दिया है कि देश का संवर्धित यूरेनियम किसी भी हालत में ईरान से बाहर नहीं जाएगा। यही मुद्दा इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है।
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ट्रंप का सख्त संदेश- “ईरान को परमाणु हथियार नहीं रखने देंगे”
डोनाल्ड ट्रंप लगातार आक्रामक बयान दे रहे हैं। उन्होंने साफ कहा है कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। ट्रंप का कहना है कि अगर ईरान परमाणु ताकत बना तो पूरा पश्चिम एशिया अस्थिर हो जाएगा और इजराइल समेत कई देशों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी।
ट्रंप ने कहा, “हम ईरान को परमाणु हथियार रखने और पूरे मध्य पूर्व को तबाह करने की इजाजत नहीं देंगे।” उनके बयानों से साफ संकेत मिल रहे हैं कि वॉशिंगटन अब इस मुद्दे पर ज्यादा लंबा इंतजार करने के मूड में नहीं है।
पाकिस्तान बना अमेरिका और ईरान के बीच संदेशवाहक| Iran America War
इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान की भूमिका अचानक काफी अहम हो गई है। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी पिछले दो दिनों से तेहरान में लगातार बैठकों में जुटे हैं। खबर है कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर भी बातचीत के अंतिम प्रस्ताव के साथ तेहरान पहुंच सकते हैं। सऊदी अरब के सरकारी न्यूज चैनल अल-अरबिया की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ने पाकिस्तान के जरिए ईरान को साफ बता दिया है कि वह अपनी शर्तों से पीछे हटने वाला नहीं है।
सूत्रों का कहना है कि इस कूटनीतिक कोशिश का मकसद युद्ध टालना जरूर है, लेकिन अमेरिकी रुख बेहद सख्त बना हुआ है।
अमेरिका की 4 शर्तें, जिन पर अटका पूरा विवाद
अमेरिका ने ईरान के सामने चार बड़ी शर्तें रखी हैं, जिन्हें लेकर सबसे ज्यादा तनाव पैदा हुआ है।
- परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह बंद करना होगा
अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को हमेशा के लिए खत्म कर दे। किसी तरह की छूट या रियायत देने के संकेत नहीं दिए गए हैं।
- होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण नहीं चलेगा
अमेरिका ने साफ कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट अंतरराष्ट्रीय व्यापार का रास्ता है और उस पर ईरान का दबदबा स्वीकार नहीं किया जाएगा।
- प्रतिबंध तब तक नहीं हटेंगे
जब तक ईरान अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करता, तब तक उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंध जारी रहेंगे।
- युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई नहीं
अगर संघर्ष के दौरान ईरान को नुकसान हुआ है तो उसकी भरपाई अमेरिका नहीं करेगा। इन शर्तों को लेकर तेहरान में भारी नाराजगी है। ईरानी नेताओं का मानना है कि यह समझौते से ज्यादा दबाव बनाने की रणनीति है।
व्हाइट हाउस की धमकी से बढ़ी बेचैनी
तनाव को और बढ़ाने वाला बयान व्हाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ फॉर पॉलिसी स्टीफन मिलर की ओर से आया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने अमेरिकी शर्तें नहीं मानीं तो दुनिया ऐसा हमला देखेगी जो इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ। मिलर के इस बयान ने पूरे पश्चिम एशिया और अरब देशों में चिंता बढ़ा दी है। तेल बाजार से लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति तक, हर जगह इस बयान के असर पर चर्चा हो रही है।
ईरान ने भी दिखाई सख्ती
अमेरिकी दबाव के बीच ईरान ने भी साफ संकेत दिए हैं कि वह झुकने वाला नहीं है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई ने आदेश दिया है कि संवर्धित यूरेनियम देश से बाहर नहीं भेजा जाएगा। यानी ट्रंप की सबसे अहम शर्त को सीधे तौर पर खारिज कर दिया गया है।
तेहरान के मेयर अलीरेजा जकानी ने कहा कि किसी भी बातचीत से पहले अमेरिका को होर्मुज क्षेत्र से दबाव की नीति खत्म करनी होगी। वहीं ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकर कालिबाफ ने कहा कि ईरानी सेना किसी भी संभावित हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
कूटनीति की उम्मीद अभी बाकी
हालांकि बढ़ते तनाव के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने बातचीत का रास्ता खुला रखने की बात कही है। उन्होंने कहा कि ईरान ने हमेशा अपने वादों का सम्मान किया है, लेकिन दबाव में झुकना संभव नहीं है। उनका कहना है कि अमेरिका अगर यह सोचता है कि धमकियों से ईरान को सरेंडर कराया जा सकता है, तो यह उसकी गलतफहमी है।
दुनिया की नजर अब तेहरान और वॉशिंगटन पर
फिलहाल पूरी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई है। एक तरफ ट्रंप प्रशासन दबाव बढ़ा रहा है, तो दूसरी तरफ ईरान अपनी शर्तों पर अड़ा हुआ है। अगर दोनों पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं हुए तो पश्चिम एशिया में हालात और विस्फोटक हो सकते हैं। ऐसे में आने वाले कुछ दिन सिर्फ ईरान और अमेरिका ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।




























