Mayawati के दरवाजे से बैरंग लौटे 2 दिग्गज! Congress नेताओं की इस 1 गलती पर भड़का आलाकमान

Rajni | Nedrick News Ghaziabad Published: 20 मई 2026, 08:33 AM Updated: 20 मई 2026, 08:33 AM
Google News
Follow Us on Google News
Prefer Nedrick News
on Google

Mayawati: किसी बड़े नेता को अपने दरवाजे से वापस लौटा देना कोई आम बात नहीं है! ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या मायावती ने कांग्रेस से हमेशा के लिए मुंह मोड़ लिया है? इस एक घटना ने यूपी के सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है और 2027 के चुनावी समीकरणों पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

और पढ़ें: हाई कोर्ट के कड़े रुख के बाद भी Shastri Nagar के अवैध होटलों पर प्रशासन मौन? आखिर होटलों को किसका संरक्षण?

बिना मुलाकात के वापस लौटे कांग्रेस नेता

उत्तर प्रदेश की राजनीति में बुधवार, 20 मई को एक दिलचस्प घटनाक्रम देखने को मिला। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की यूपी इकाई के कुछ नेता बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती (Mayawati ) से मिलने उनके लखनऊ स्थित आवास पहुंचे, लेकिन उन्हें बिना मुलाकात किए ही वापस लौटना पड़ा।

मीडिया द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक बताया जा रहा है कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अनुसूचित जाति (SC) विभाग के चेयरमैन राजेंद्र पाल गौतम और बाराबंकी से सांसद तनुज पूनिया मायावती से मिलने की इच्छा लेकर उनके घर पहुंचे थे। दोनों नेताओं ने मुलाकात का समय मांगने की कोशिश की, लेकिन बसपा प्रमुख की व्यस्तता या पूर्व अपॉइंटमेंट न होने के कारण उन्हें मिलने का मौका नहीं मिल सका।

कारण बताओ नोटिस जारी

इस घटनाक्रम के बाद उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव के बाद राज्य में विपक्षी दलों के बीच नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर हलचल तेज हो गई है। हालांकि, जहां एक तरफ बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने इस पर पूरी तरह चुप्पी साध रखी है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस आलाकमान ने इस औचक दौरे से पल्ला झाड़ते हुए बिना अनुमति मिलने गए अपने ही नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।

विपक्ष से मायावती ने बनाई दूरी

Mayawati लंबे समय से विपक्षी गठबंधन से दूरी बनाए हुए हैं और कई बार सार्वजनिक रूप से कांग्रेस (Congress ) और समाजवादी पार्टी दोनों पर तीखा निशाना साध चुकी हैं। ऐसे में कांग्रेस नेताओं का अचानक उनके द्वार पर पहुंचना राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है। इस घटना ने साफ कर दिया है कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में सियासी शह-मात का खेल शुरू हो चुका है।

क्या कहते हैं राजनीतिक विशेषज्ञों

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मायावती द्वारा कांग्रेस नेताओं को बिना मिले लौटाना केवल एक ‘शिष्टाचार’ की कमी नहीं, बल्कि 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से जुड़ा एक बड़ा सियासी संदेश है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, मायावती यह साफ संदेश देना चाहती हैं कि वे अभी भी यूपी में किसी तीसरे मोर्चे या गठबंधन के लिए तैयार नहीं हैं। वे अपनी ‘एकला चलो’ की नीति पर कायम हैं।

लोकसभा चुनावों में खराब प्रदर्शन के बावजूद, मायावती ने कांग्रेस (Congress) के बड़े नेताओं को गेट से लौटाकर यह साबित करने की कोशिश की है कि उत्तर प्रदेश की दलित राजनीति में आज भी उनका कद बहुत बड़ा है और कोई भी उन्हें हल्के में नहीं ले सकता।

जिस दिन कांग्रेस के नेता Mayawati के घर पहुंचे, ठीक उसी दिन सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बयान दिया था कि कांग्रेस के साथ उनका गठबंधन 2027 के चुनावों में भी जारी रहेगा। विश्लेषकों का मानना है कि अगर मायावती कांग्रेस नेताओं से मिल लेतीं, तो इससे सपा और कांग्रेस (INDIA ब्लॉक) के बीच अविश्वास पैदा हो सकता था। यही वजह है कि जैसे ही यह खबर फैली, कांग्रेस आलाकमान ने तुरंत एक्शन लेते हुए अपने ही नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया, ताकि समाजवादी पार्टी को यह संदेश जाए कि यह कांग्रेस की आधिकारिक कोशिश नहीं थी।

जानकारों का कहना है कि राजेंद्र पाल गौतम और तनुज पुनिया जैसे बड़े दलित चेहरों का Mayawati के घर जाना यह दिखाता है कि कांग्रेस यूपी में दलित मतदाताओं को अपने पाले में लाने की गंभीर कोशिशों में जुटी है। 2027 के चुनावों के लिए सपा अपने ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले पर काम कर रही है, बीजेपी दलितों को साधने में जुटी है, और बसपा अपने कोर जाटव वोट बैंक को बचाने की सोशल इंजीनियरिंग में व्यस्त है। ऐसे में कांग्रेस नेताओं की इस कोशिश ने यूपी की राजनीति के इस त्रिकोणीय मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।

Rajni

rajni@nedricknews.com

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Recent News

Trending News

Editor's Picks

Latest News

©2026- All Right Reserved. Manage By Marketing Sheds