Shastri Nagar: गाजियाबाद के शास्त्री नगर में न्यायालय के कड़े रुख के बावजूद होटलों और बैंक्वेट्स का नियम विरुद्ध संचालन धड़ल्ले से जारी है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High Court) के उन स्पष्ट आदेशों को ताक पर रखकर आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां चलाई जा रही हैं, जिनमें रिहायशी इलाकों में कमर्शियल एक्टिविटी पर रोक है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) और स्थानीय प्रशासन इस पूरे मामले पर मौन साधे बैठा है। प्रशासन की इस सुस्ती और कथित भ्रामक रिपोर्टिंग के कारण स्थानीय नागरिकों का जीवन बेहाल हो चुका है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि, क्या इस क्षेत्र में न्यायालय के आदेश भी बेअसर हैं? आखिर शास्त्री नगर में नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले इन संस्थानों को किसका संरक्षण प्राप्त है?
प्रशासनिक लापरवाही!
प्रशासनिक लापरवाही का सबसे बड़ा खामियाजा यहां के स्थानीय निवासियों को भुगतना पड़ रहा है। शास्त्री नगर (Shastri Nagar) (ब्लॉक-बी) में रहने वाली 63 वर्षीय बुजुर्ग महिला डॉ. ललिता यादव ने अपने परिवार की सुरक्षा और मानसिक शांति को लेकर गंभीर चिंता जताई है। डॉ. ललिता यादव अपने बेटे अर्जुन के साथ प्लॉट संख्या SB-25 में रहती हैं। उनका आरोप है कि उनके घर से बिल्कुल सटीक (सटे हुए) प्लॉट संख्या SB-26 में चल रहे “होटल ट्रॉट एंड बैंक्वेट” की वजह से पिछले काफी समय से उनका परिवार गहरे मानसिक तनाव, शोर-शराबे और डर के माहौल में जीने को मजबूर है।
मिली जानकारी के अनुसार, प्लॉट संख्या SB-26 में पहले शांतिपूर्वक एक लड़कियों का पीजी (हॉस्टल) संचालित होता था। लेकिन वर्ष 2024 में इस परिसर को “होटल ट्रॉट प्राइवेट लिमिटेड” को लीज़ (Lease) पर दे दिया गया, जिसके बाद रातों-रात इसे “होटल ट्रॉट एंड बैंक्वेट” में तब्दील कर दिया गया। इसके बाद से ही शांत रहने वाले इस रिहायशी इलाके की शांति पूरी तरह भंग हो गई।
स्थानीय लोगों का दर्द है कि यहां अक्सर देर रात तक शादियों और पार्टियों के नाम पर कानफोड़ू डीजे (DJ) और तेज शोर-शराबा आम बात हो चुकी है। इतना ही नहीं, देर रात होटल से निकलने वाले नशे में धुत मेहमानों द्वारा गली में हंगामा करना, खुलेआम गुटखा थूकना और शराब की खाली बोतलें फेंकना यहां की रोज की कहानी बन चुका है। सामाजिक मर्यादाओं के इस सरेआम उल्लंघन से आसपास रहने वाले सभ्य परिवारों और खासकर महिलाओं का घर से निकलना भी दूभर हो गया है।
बार-बार दें रहे है धमकी
मामले की गंभीरता केवल नियमों के उल्लंघन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह अब एक सीधे सुरक्षा संकट में तब्दील हो चुका है। डॉ. ललिता यादव ने बताया कि उन्होंने इस कमर्शियल गतिविधि की शिकायत पहले भी गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) और प्रशासनिक अधिकारियों से की थी। उनका गंभीर आरोप है कि इन शिकायतों से बौखलाए होटल से जुड़े और प्रभावशाली लोगों ने पहले भी उन्हें और उनके बेटे को कानूनी कार्रवाई वापस न लेने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दी थीं।
ताजा विवाद बीती 12 मई 2026 की रात करीब 10 बजे का बताया जा रहा है, जब पीड़ित परिवार के साथ सरेआम अभद्रता की गई। जानकारी के अनुसार, डॉ. यादव के बेटे अर्जुन घर का मुख्य दरवाज़ा खोलकर अपना ऑनलाइन फूड ऑर्डर रिसीव करने बाहर गए थे।
ऑर्डर लेने के लिए दरवाज़ा खोलने गया, तो उसने देखा कि श्री कैलाश शर्मा के बेटे अमित शर्मा उसकी तरफ़ आ रहे थे। उन्होंने अपनी कार होटल के बाहर पार्क की और मेरा बेटा अंदर आकर दरवाज़ा बंद कर लिया। श्री अमित शर्मा हमारे दरवाज़े पर आए और बार-बार मेरे बेटे अर्जुन से बाहर आकर उनसे बात करने के लिए कहने लगे।
“जिसे बुलाना है बुला लो”
खतरे को भांपते हुए अर्जुन ने घर से बाहर आने से साफ मना कर दिया और स्पष्ट कहा कि जो भी बात करनी है, वह वहीं से करें। इस बीच बेटे की आवाज और बाहर हंगामा सुनकर डॉ. ललिता यादव भी मुख्य दरवाजे पर आ गईं और उन्होंने अमित शर्मा को शालीनता से वहां से तुरंत जाने को कहा। पीड़ित परिवार का आरोप है कि इस पर अमित शर्मा और उग्र हो गए और उन्होंने जबरन घर का दरवाजा खोलने का प्रयास किया।
इस दौरान वे लगातार चिल्लाते हुए अर्जुन को धमकी दे रहे थे कि होटल के खिलाफ शिकायतें करना और वहां चल रही गतिविधियों के वीडियो बनाना तुरंत बंद करे, वरना अंजाम बुरा होगा अचानक हुए इस हमले और सीधे घर के दरवाजे तक पहुंची धमकी से पूरा परिवार सहम गया और उन्हें अपनी जान-माल की सुरक्षा को लेकर गहरा डर महसूस होने लगा।
इस बीच जब अर्जुन ने स्थिति बिगड़ती देख तुरंत पुलिस हेल्पलाईन नंबर ‘112’ पर कॉल करने की बात कही, तो आरोपी अमित शर्मा ने कानून को ठेंगे पर रखते हुए कथित रूप से चुनौती दी कि “जिसे बुलाना है बुला लो, मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता, मुझे किसी का कोई फर्क नहीं पड़ता।”
सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग
बताया गया कि अमित शर्मा अपनी काली Toyota Fortuner (UP 14 FP 0010) में बैठकर वहां से जाने का दिखावा करने लगे, लेकिन कुछ ही सेकंड बाद फिर लौट आए और दोबारा वही हरकत करने लगे। इसके बाद परिवार ने खुद को घर के अंदर बंद कर लिया।
पीड़ित डॉ. ललिता यादव का साफ तौर पर कहना है कि कैलाश चंद्र शर्मा, उनके बेटे अमित शर्मा, राजेश कादियान और “होटल ट्रॉट प्राइवेट लिमिटेड” के प्रबंधन से जुड़े अन्य प्रभावशाली लोगों की तरफ से उन्हें और उनके बेटे को लगातार गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दी जा रही हैं।
उन्होंने गाजियाबाद पुलिस, जिला प्रशासन और मुख्यमंत्री पोर्टल के माध्यम से सुरक्षा की गुहार लगाते हुए मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि रिहायशी इलाके में कानून का राज कायम हो सके और उनके परिवार की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
अवैध होटलों को किसका संरक्षण?
प्रशासन और जीडीए (GDA) इस समय मई 2026 में पूरे गाजियाबाद और आसपास के इलाकों में अवैध निर्माणों के खिलाफ एक बड़ा सीलिंग और ध्वस्तीकरण अभियान चलाने का दावा कर रहे हैं। लेकिन इस बड़े अभियान के दावों के बीच, शास्त्री नगर में ‘होटल ट्रॉट’ जैसी अवैध गतिविधियां अभी भी बिना किसी डर के धड़ल्ले से चल रही हैं। यह साफ दिखाता है कि जमीनी हकीकत प्रशासन के दावों से कोसों दूर है। आखिर कौन है इसका जिम्मेदार?



























