Chicken Neck Corridor: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद एक बार फिर देश का सबसे संवेदनशील इलाका माने जाने वाला सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे आमतौर पर ‘चिकन नेक’ कहा जाता है, राष्ट्रीय बहस के केंद्र में आ गया है। नई बीजेपी सरकार ने इस रणनीतिक क्षेत्र की करीब 120 एकड़ जमीन केंद्र सरकार को सौंपने का फैसला लिया है। सरकार का कहना है कि इस जमीन का इस्तेमाल सीमा सुरक्षा मजबूत करने, बॉर्डर फेंसिंग, राष्ट्रीय राजमार्ग और अन्य महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए किया जाएगा।
क्यों इतना अहम है ‘चिकन नेक’? Chicken Neck Corridor
सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत के लिए बेहद संवेदनशील और रणनीतिक महत्व वाला इलाका माना जाता है। यह संकरा भूभाग पूर्वोत्तर भारत के आठ राज्यों को देश के बाकी हिस्से से जोड़ता है। इसकी चौड़ाई करीब 22 किलोमीटर और लंबाई लगभग 60 किलोमीटर बताई जाती है। यह इलाका नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की सीमाओं के बेहद करीब पड़ता है, इसलिए राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से इसकी अहमियत और बढ़ जाती है। अगर किसी आपात स्थिति में यह कॉरिडोर प्रभावित होता है, तो पूर्वोत्तर राज्यों का बाकी भारत से संपर्क बाधित हो सकता है।
शरजील इमाम का बयान फिर चर्चा में
इस मुद्दे के साथ 2020 दिल्ली दंगों के आरोपी शरजील इमाम का पुराना बयान भी एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। शरजील ने उस समय कहा था कि अगर बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो जाएं, तो चिकन नेक को ब्लॉक कर पूर्वोत्तर भारत को देश से अलग किया जा सकता है। उस बयान के बाद देशभर में काफी विवाद हुआ था और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो गई थी। बीजेपी अब इसी बयान का हवाला देते हुए कह रही है कि चिकन नेक की सुरक्षा को मजबूत करना बेहद जरूरी है।
बीजेपी का आरोप, टीएमसी पर उठाए सवाल
बीजेपी नेताओं का आरोप है कि पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने इस क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियों को पर्याप्त जमीन और अधिकार देने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। उनका कहना है कि केंद्र सरकार की कई योजनाएं लंबे समय तक फाइलों में अटकी रहीं। हालांकि टीएमसी ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है। पार्टी का कहना है कि सुरक्षा के मुद्दे को सांप्रदायिक और वोट बैंक की राजनीति से जोड़कर पेश किया जा रहा है।
अब क्या होगा इस जमीन का इस्तेमाल?
नई सरकार के मुताबिक इस 120 एकड़ जमीन का उपयोग सीमा पर बाड़ लगाने, सड़कों और राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार, सुरक्षा चौकियों और अन्य रणनीतिक निर्माण कार्यों के लिए किया जाएगा। सरकार का मुख्य फोकस बांग्लादेश सीमा से होने वाली कथित घुसपैठ को रोकना बताया जा रहा है। इसके लिए BSF को इलाके में ज्यादा संसाधन और सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
अंडरग्राउंड रेल नेटवर्क की तैयारी
इस पूरे प्रोजेक्ट का सबसे अहम हिस्सा भविष्य में बनने वाला अंडरग्राउंड रेल नेटवर्क माना जा रहा है। केंद्र सरकार की योजना है कि इस इलाके में ऐसा रेल नेटवर्क विकसित किया जाए, जिससे किसी आपात स्थिति या सड़क मार्ग बंद होने पर भी सेना और जरूरी सप्लाई की आवाजाही जारी रह सके। रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम देश की सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम साबित हो सकता है।
शुभेंदु अधिकारी का बड़ा बयान
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि राज्य सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हर मुद्दे पर केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करेगी। उन्होंने साफ कहा कि सीमा क्षेत्रों में मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और अवैध घुसपैठ रोकना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछली सरकार के दौरान सीमा फेंसिंग का काम काफी धीमा था। उनके मुताबिक ममता सरकार में जिस इलाके में केवल 8 किलोमीटर फेंसिंग हो पाई थी, वहां अब तेजी से काम आगे बढ़ाया जाएगा।
बंगाल की राजनीति में नया टकराव
यह मुद्दा ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में बीजेपी और टीएमसी के बीच लगातार टकराव बढ़ता जा रहा है। हाल के दिनों में अवैध अतिक्रमण पर बुलडोजर कार्रवाई, पुनर्मतदान और चुनावी हिंसा जैसे मुद्दों पर दोनों दल आमने-सामने रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि बीजेपी इस मुद्दे को धार्मिक रंग देकर राजनीतिक फायदा उठाना चाहती है। वहीं बीजेपी इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा जरूरी कदम बता रही है।
सीमा सुरक्षा पर केंद्र का फोकस
भारत-बांग्लादेश सीमा कुल 4,097 किलोमीटर लंबी है, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा पश्चिम बंगाल से होकर गुजरता है। राज्य की करीब 2,216 किलोमीटर लंबी सीमा बांग्लादेश से लगती है। गृह मंत्रालय के मुताबिक अब तक लगभग 3,240 किलोमीटर सीमा पर फेंसिंग हो चुकी है, जबकि करीब 850 किलोमीटर हिस्से में काम बाकी है। केंद्र सरकार ने पहले ही बंगाल में BSF का अधिकार क्षेत्र 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 50 किलोमीटर कर दिया था, जिसका टीएमसी सरकार ने विरोध किया था।
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