2015 से कोरोना वायरस पर काम कर रहा चीन, Third World War में जैविक हथियार के तौर पर करना चाहता इस्तेमाल…बड़ा दावा!

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2019 के अंत में कोरोना महामारी ने चीन के वुहान शहर में भयंकर तबाही मचाई थीं। इसके बाद इस वायरस ने देखते ही देखते पूरी दुनिया में अपने पैर पसार लिए। इसके बाद कोरोना महामारी के दुनियाभर के लोगों के जीवन को संकट में डाल दिया। इस वैश्विक महामारी का कहर अभी भी जारी है। भारत समेत कई देशों में वायरस की दूसरी लहर जबरदस्त कहर बरपा रही है। 

लेकिन इस दौरान एक सबसे बड़ा सवाल बीते डेढ़ साल ये यही उठ रहा है कि आखिर कोरोना वायरस आया कहां से? कोरोना वायरस को लेकर चीन लगातार सवालों के घेरे में रहता है। भले ही वो इस वायरस को लेकर कई तरह के दावे क्यों ना करता हो, लेकिन दुनिया को चीन के दावों पर भरोसा नहीं। 

इसकी एक वजह ये भी है कि जिस देश से ये वायरस फैला, वहां हालात कुछ ही महीनों में सामान्य हो गए। चीन में लोगों की जिंदगी पूरी तरह से पटरी पर आ गया, लेकिन दूसरे देश आज तक इस महामारी के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं। 

चीन रच रहा था बड़ी साजिश?

इस बीच कोरोना वायरस को लेकर एक रिपोर्ट में फिर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, जिसके बाद चीन पर शक और गहरा गया। ऑस्ट्रेलियाई मीडिया की एक रिपोर्ट में ये दावा किया है कि 2015 से ही चीन कोरोना वायरस पर रिसर्च कर रहा है। यही नहीं उसका इरादा इसको जैविक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने का था। 

‘द वीकेंड ऑस्ट्रेलियन’ ने अपनी रिपोर्ट में चीन के एक रिसर्च पेपर को आधार बनाया और इसमें बताया कि चीन 2015 से सार्स वायरस की मदद से जैविक हथियार बनाने की कोशिश कर रहा था। चीनी सेना तब से ही कोरोना वायरस को जैविक हथियार की तरह इस्तेमाल करने की साजिश रच रही थी। 

दस्तावेज में बड़ा खुलासा

अमेरिकी जांचकर्ताओं के हाथ लगे दस्तावेज के मुताबिक ये दावा किया जा रहा है चीनी वैज्ञानिक 5 सालों से कोरोना जैसे बायोलॉजिकिल और जेनेटिक हथियारों से थर्ड वर्ल्ड वॉर लड़ने की तैयारी में थे। ये दावा करने वाले दस्तावेज में कहा गया है कि युद्ध में ‘जीत के लिए ये मुख्य हथियार होंगे।’

‘जांच में सहयोग क्यों नहीं करता चीन?’

इसको लेकर ऑस्ट्रेलियन स्ट्रेटेजिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट (ASPI) के कार्यकारी निदेशक पीटर जेनिंग्स ने चर्चा में कहा कि ये रिसर्च पेपर एक तरह से पक्के सबूत जैसा है। ये महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये स्पष्ट तौर पर जाहिर करता है कि चीनी वैज्ञानिक कोरोना  के विभिन्न स्टेनों के सैन्य इस्तेमाल के बारे में विचार कर रहे थे। वे इसके बारे में भी चर्चा कर रहे थे कि इसको कैसे फैलाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ये शोध ये भी साफ करता है कि चीन कोरोना की उत्पत्ति के लिए बाहरी एजेंसियों से जांच में रुचि क्यों नहीं दिखाता। अगर ये किसी बाजार से फैला होता, तो चीन जांच में सहयोग करता।

इस रिपोर्ट में ये सवाल किया गया कि जब वायरस की जांच की बात उठती है, तो चीन इससे पीछे हट जाता है। ऑस्ट्रेलियाई साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट रॉबर्ट पॉटर कहते हैं कि कोरोना किसी चमगादड़ की मार्केट से नहीं फैल सकता। ये कहानी गलत है।

गौरतलब है कि चीन शुरू से ही कोरोना की उत्पत्ति को लेकर सवालों के घेरे में बना रहता है। वुहान में कोरोना की उत्पत्ति का पता लगाने के लिए WHO ने भी कोई ठोस रिपोर्ट पेश नहीं की। कई पश्चिमी देश कोरोना महामारी को लेकर WHO को लेकर भी सवाल खड़े कर चुके हैं। 

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