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Madhya Pradesh Raisen Historical fort: रायसेन किले की ऐतिहासिक तोप, 305 साल पुरानी परंपरा आज भी जीवंत, गूंज के बाद खुलता है रोजा

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 09 Mar 2025, 12:00 AM | Updated: 09 Mar 2025, 12:00 AM

Madhya Pradesh Raisen Historical fort: मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में स्थित ऐतिहासिक किला, जो अपने गौरवशाली अतीत और रहस्यमयी कहानियों के लिए प्रसिद्ध है, 305 साल पुरानी एक अनोखी परंपरा को आज भी निभा रहा है। रमजान के पवित्र महीने में इस किले की प्राचीर से तोप दागकर सेहरी और इफ्तार का समय बताया जाता है। यह परंपरा नवाबी शासनकाल से चली आ रही है और आज भी स्थानीय मुस्लिम समुदाय इसी तोप की आवाज को सुनकर रोजा खोलते हैं और सेहरी समाप्त करते हैं।

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305 साल पुरानी परंपरा और इसका महत्व- Madhya Pradesh Raisen Historical fort

रायसेन में रमजान के दौरान तोप चलाने की यह परंपरा 18वीं सदी से जारी है। शहर काजी ज़हीर उद्दीन के अनुसार, यह परंपरा नवाबी दौर में शुरू हुई थी और आज भी इसे पूरी निष्ठा के साथ निभाया जा रहा है। यह तोप करीब 30 गांवों तक सुनाई देती है, जिससे दूर-दराज के रोजेदारों को भी रमजान के समय की सूचना मिलती है। हर साल जिला प्रशासन एक महीने का लाइसेंस जारी करता है, जिससे इस ऐतिहासिक परंपरा को कानूनी मान्यता मिलती है। तोप चलाने की जिम्मेदारी एक ही परिवार के लोग पीढ़ियों से निभा रहे हैं। रमजान समाप्त होने के बाद ईद के दिन इस तोप की सफाई कर इसे सरकारी गोदाम में जमा कर दिया जाता है। यह अनूठी परंपरा रायसेन को पूरे देश में एक अलग पहचान दिलाती है।

Madhya Pradesh Raisen Historical fort
Source: Google

तोप दागने की प्रक्रिया

इस परंपरा का संचालन एक सिग्नल सिस्टम के माध्यम से किया जाता है।

  • शहर की मार्कस वाली मस्जिद से संकेत भेजा जाता है।
  • मस्जिद की मीनार पर लाल बल्ब जलाकर सूचना दी जाती है।
  • संकेत मिलते ही किले से तोप दागी जाती है, जिसकी गूंज दूर-दूर तक सुनाई देती है।

काजी ज़हीर उद्दीन के मुताबिक, राजस्थान के बाद रायसेन दूसरा ऐसा शहर है, जहां रमजान की सूचना तोप से दी जाती है। यह परंपरा किले को रमजान के दौरान एक धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र बना देती है।

इतिहास और रहस्यमयी कहानियां

रायसेन किला न केवल रमजान की इस परंपरा के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इसका ऐतिहासिक महत्व भी बहुत बड़ा है। 16वीं सदी में यह किला वीरता और बलिदान का प्रतीक बना, जब 700 रानियों ने जौहर किया था। यह किला अपनी स्थापत्य कला और मजबूत किलेबंदी के लिए प्रसिद्ध है। पारस पत्थर की मौजूदगी के दावे इसे और भी रहस्यमयी बनाते हैं। आज भी यह किला राजस्थान और मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक स्थलों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

Madhya Pradesh Raisen Historical fort
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रमजान के दौरान जब इस किले से तोप की गूंज उठती है, तो यह इसकी ऐतिहासिक भव्यता को और भी अधिक बढ़ा देता है।

प्रशासन की भूमिका और सुरक्षा व्यवस्था

रायसेन में यह परंपरा धार्मिक आस्था और प्रशासनिक सहयोग का बेहतरीन उदाहरण है। जिला कलेक्टर की अनुमति के बाद इस परंपरा को निभाने के लिए लाइसेंस जारी किया जाता है। प्रशासन सुरक्षा और कानून व्यवस्था सुनिश्चित करता है, ताकि किसी भी प्रकार की समस्या न हो। रमजान के दौरान इस परंपरा का पालन करने के लिए स्थानीय प्रशासन और धार्मिक समुदाय मिलकर काम करते हैं।

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