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Fake Medicines: देशभर में नकली और घटिया दवाओं का खुलासा, 84 बैच गुणवत्ता मानकों में फेल

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 23 Feb 2025, 12:00 AM | Updated: 23 Feb 2025, 12:00 AM

Fake Medicines: देशभर में बिक रही दवाओं की गुणवत्ता को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) द्वारा जारी दिसंबर 2024 की रिपोर्ट में 84 दवा बैच को गुणवत्ता मानकों पर खरा न उतरने वाला (Not-of-Standard Quality – NSQ) पाया गया है। इन दवाओं में एसिडिटी, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल और बैक्टीरियल इंफेक्शन जैसी आम बीमारियों के इलाज के लिए दी जाने वाली दवाएं भी शामिल हैं।

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हर महीने होती है दवाओं की जांच- Fake Medicines

CDSCO नियमित रूप से बाजार में बिकने वाली दवाओं की गुणवत्ता की जांच करता है और हर महीने इसकी रिपोर्ट जारी करता है। दिसंबर 2024 की ताजा रिपोर्ट में कई नामी कंपनियों द्वारा निर्मित दवाओं के बैच गुणवत्ता परीक्षण में फेल पाए गए। इन जांचों को विभिन्न राज्यों के औषधि नियंत्रण प्राधिकरणों द्वारा किया गया था।

 

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CDSCO के अनुसार, किसी दवा के बैच को NSQ तब घोषित किया जाता है जब वह निर्धारित गुणवत्ता मानकों में से किसी एक या अधिक में असफल हो जाता है। यह परीक्षण इसलिए किया जाता है ताकि बाजार में मौजूद दवाओं की शुद्धता और प्रभावशीलता सुनिश्चित की जा सके।

खराब दवाओं को बाजार से हटाने की प्रक्रिया

CDSCO के अधिकारियों ने बताया कि गुणवत्ता में गड़बड़ी वाली दवाओं की पहचान कर उन्हें बाजार से हटाने की प्रक्रिया नियमित रूप से की जाती है। इस काम में राज्य स्तर के दवा नियामकों की भी मदद ली जाती है।

एक अधिकारी ने बताया,

“अगर कोई दवा गुणवत्ता मानकों में फेल होती है, तो उसे तुरंत बाजार से हटाने और मरीजों तक उसकी पहुंच रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाते हैं। यह सुनिश्चित किया जाता है कि इन दवाओं के कारण किसी मरीज की सेहत को नुकसान न पहुंचे।”

CDSCO ने दिए सख्त निरीक्षण के निर्देश

गुणवत्ता की जांच को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए CDSCO ने दवा निरीक्षकों (Drug Inspectors) के लिए सख्त दिशानिर्देश जारी किए हैं।

नए नियमों के तहत:

  • हर महीने कम से कम 10 सैंपल इकट्ठा करना अनिवार्य होगा।
  • इनमें से 9 सैंपल दवाओं के होंगे और 1 सैंपल कॉस्मेटिक या मेडिकल डिवाइस का होगा।
  • सैंपल उसी दिन लैब में भेजना होगा, अगर जांच स्थल ग्रामीण या दूर-दराज के इलाके में है, तो अधिकतम अगले दिन तक सैंपल को लैब तक पहुंचाना अनिवार्य होगा।

CDSCO का यह कदम मरीजों को सुरक्षित और प्रभावी दवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उठाया गया है।

मरीजों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम

सरकार का यह अभियान देशभर में गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित दवाएं सुनिश्चित करने के लिए चलाया जा रहा है। बाजार में बिक रही दवाओं की समय-समय पर जांच करने से यह सुनिश्चित किया जाता है कि कोई भी दवा निर्धारित मानकों से कमतर न हो।

यदि किसी दवा का बैच गुणवत्ता जांच में फेल हो जाता है, तो उसे तत्काल बाजार से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है। इससे मरीजों को किसी भी प्रकार के स्वास्थ्य जोखिम से बचाया जा सके।

डॉक्टरों और मरीजों को सतर्क रहने की जरूरत

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि:

  • डॉक्टरों को दवाएं लिखते समय सतर्क रहना चाहिए और केवल प्रमाणित एवं भरोसेमंद कंपनियों की दवाएं ही सुझानी चाहिए।
  • मरीजों को भी हमेशा प्रामाणिक दवा ब्रांड खरीदने चाहिए और संदेह होने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।
  • यदि कोई दवा गुणवत्ता जांच में फेल हो चुकी हो, तो उसे तुरंत रोकने और बाजार से हटाने की सूचना आम जनता तक पहुंचानी चाहिए।

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