सीरिया में असद का तानाशाही युग समाप्त: अचानक गिरा 53 साल पुराना शासन

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 10 Dec 2024, 12:00 AM | Updated: 10 Dec 2024, 12:00 AM

Assad Bashar Al-Assad full story: सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद का एकछत्र राज समाप्त हो गया है। सीरिया, जो कभी उनके पिता हाफ़िज़ अल-असद द्वारा स्थापित तानाशाही के लिए जाना जाता था, अब इतिहास बन चुका है। 2011 से जारी गृहयुद्ध के बाद विद्रोहियों ने देश के बड़े हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया और आख़िरकार असद परिवार ने शरण के लिए रूस का रुख़ किया। यह बदलाव सीरिया के राजनीतिक इतिहास में एक बड़ा मोड़ है और अब सवाल यह उठता है कि असद की 53 साल पुरानी तानाशाही महज़ दो हफ़्तों में कैसे खत्म हो गई?

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1973 में असद के शासन की शुरुआत: तख्तापलट से तानाशाही तक (Assad Bashar Al-Assad full story)

सीरिया के शासन की नींव 1973 में असद परिवार ने रखी थी, जब बशर के पिता हाफ़िज़ अल-असद ने तख्तापलट करके सत्ता हथिया ली थी। हाफ़िज़ अल-असद ने अपनी तानाशाही शैली को मज़बूत करने के लिए सैन्य और सुरक्षा तंत्र का भरपूर इस्तेमाल किया। उनके शासन के दौरान विद्रोह के स्वर भी उठे और शिया अल्पसंख्यक समुदाय से होने के कारण उन्हें कई बार बहुसंख्यक सुन्नी मुस्लिम समुदाय द्वारा निशाना बनाया गया। हाफ़िज़ का शासन न केवल कट्टरपंथी था, बल्कि यह सीरिया के लोगों के लिए बेहद दमनकारी भी था।

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हालांकि, 2000 में हाफ़िज़ की मौत के बाद उनके बेटे बशर अल-असद सत्ता में आए। बशर ने शुरुआत में अपनी छवि एक प्रगतिशील और आधुनिक नेता के रूप में पेश की, जो देश में आर्थिक सुधार और विकास की दिशा में काम करेगा। लेकिन धीरे-धीरे वह भी अपने पिता की राह पर चलने लगा और उसी तानाशाही शासन की नींव मजबूत की, जो उसे विरासत में मिला था।

2011 का विद्रोह और असंतोष की चिंगारी

2011 में जब ट्यूनिशिया में विद्रोह हुआ, तो उसने पूरे अरब दुनिया में एक लहर पैदा की। यह समय “अरब स्प्रिंग” के नाम से प्रसिद्ध हुआ, जब एक के बाद एक अरब देशों में सरकारों के खिलाफ जनविद्रोह फूट पड़े। सीरिया भी इससे अछूता नहीं था। बढ़ते असंतोष और राजनीतिक दमन ने एक बड़ा विद्रोह जन्म लिया, जिसे असद ने रूस और ईरान के समर्थन से कुचलने का प्रयास किया। लेकिन असद की क्रूरता और अत्याचारों के कारण सीरिया में गृहयुद्ध की स्थिति उत्पन्न हो गई।

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बशर अल असद की सेना ने विद्रोहियों का दमन करने के लिए सेना और सुरक्षा बलों का बड़े पैमाने पर उपयोग किया, लेकिन युद्ध के लंबे समय तक चलने के बावजूद वह विद्रोह को पूरी तरह से समाप्त नहीं कर पाए। युद्ध के कारण असद सरकार की पकड़ सीरिया के बड़े हिस्सों पर कमजोर हो गई, और विद्रोही समूहों ने धीरे-धीरे देश के विभिन्न हिस्सों पर कब्जा करना शुरू कर दिया।

27 नवंबर की घटना: असद के शासन का अचानक पतन

हालांकि बशर अल असद और उनकी सेना रूस और ईरान के समर्थन से संघर्ष करते रहे, 27 नवंबर 2024 को जो कुछ हुआ, वह असद के लिए एक अप्रत्याशित मोड़ था। दो हफ्ते के भीतर ऐसा क्या हुआ कि असद को देश छोड़कर भागना पड़ा?

विद्रोहियों ने सीरिया के बड़े हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया था और अब उनका मुख्य निशाना राजधानी दमिश्क था। सीरिया के रक्षा मंत्री और सुरक्षा अधिकारियों के बीच भी मतभेद पैदा हो गए, जिससे असद की सेना की युद्धक क्षमता कमज़ोर हो गई। साथ ही रूस की तरफ़ से भी साफ़ संकेत मिल रहे थे कि अब सीरिया में असद शासन का समर्थन करना रूस के लिए किसी भी तरह से फ़ायदेमंद नहीं है। यही वजह थी कि असद ने अपने परिवार के साथ रूस में शरण ली और शासन का चमत्कारिक ढंग से अंत हो गया।

असद की सेना की कमजोरी: तंत्र की विफलता और विद्रोहियों की ताकत

सीरिया की तानाशाही को कायम रखने वाली असद की सेना दशकों तक मजबूत रही, लेकिन जैसे-जैसे गृह युद्ध आगे बढ़ा, सेना की ताकत कमज़ोर पड़ने लगी। विद्रोहियों ने छोटे-छोटे समूहों में अपनी ताकत जुटाई और असद की सैन्य मशीनरी को चुनौती दी। इसके अलावा, असद की सेना में भ्रष्टाचार और अराजकता भी थी, जिसका फ़ायदा विद्रोहियों को मिला।

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