पैदा होते ही माता-पिता ने कर दी बच्ची की शादी, 20 साल बाद लिया तलाक, जाने क्या है पूरा मामला

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 01 Oct 2024, 12:00 AM | Updated: 01 Oct 2024, 12:00 AM

बाल विवाह… बाल विवाह को रोकने के लिए भारत में आजादी से पहले से ही कानून है. सबसे पहले 1929 में कानून लाया गया था. लेकिन आजाद भारत होने के बाद भी कई राज्यों से बाल विवाह की खबर सामने आती है. वही भारतीय कानून के अनुसार, बाल विवाह वह विवाह है जिसमें या तो महिला की आयु 18 वर्ष से कम होती है या पुरुष की आयु 21 वर्ष से कम होती है. लेकिन हम आपको इस लेख में ऐसे बाल विवाह के बारे में बताएंगे जहाँ 4 महीने की उम्र में बाल विवाह हो चुका था.

ससुराल वाले लड़की को दे रहे थे धमकियां

जैसे की हम आए दिन बाल विवाह के कई मामले सुनते हैं. कहीं 10 साल की उम्र में तो कहीं 12 साल की उम्र में लड़की की शादी कर दी जाती है. लेकिन यह मामला राजस्थान के जोधपुर जिले का है. जिसे जानकर आप हैरान हो जायेगें. यहां शादी के करीब 20 साल बाद एक लड़की को तलाक मिला है. इस लड़की की शादी तब हुई जब यह केवल चार महीने की थी. जी हाँ, जोधपुर की रहने वाली अनीता का 4 महीने की उम्र में बाल विवाह हो चुका था. जब अनीता 15 साल की हुई तो उसके ससुराल वालों ने उस ससुराल आने का दवाब बनाना शुरू कर दिया था. जिसके बाद कई तरह की धमकियां भी दी गई. लेकिन अनीता डरी नहीं और अपने बड़े भाई, बहन की मदद से ससुराल जाने से इनकार करती रही. इन सब के चलते अनीता की मुलाकात सार्थी ट्रस्ट की प्रबंध ट्रस्टी कृति भारती से हुई. जिसके जरिए बाल विवाह को निरस्त करने में मदद मिली.

अनीता के बाल विवाह को निरस्त करने के लिए जोधपुर के फैमिली कोर्ट 2 में केस दायर किया गया. जहाँ फैमिली कोर्ट संख्या 2 के जज वरुण तलवार के द्वारा लड़की के बाल विवाह को निरस्त कर ऐतिहासिक फैसला सुनाया गया है. साथ ही जिस लड़के से उसकी शादी हुई थी उसके परिवार के द्वारा लड़की को केस का खर्च दिलवाने के संबंध में भी आदेश जारी किया गया है. इसके अलाव जज वरुण तलवार कहते है कि बाल विवाह केवल एक कुरीति नहीं बल्कि एक बड़ा अपराध है. इसमें छोटे- छोटे बच्चों का भविष्य खराब हो जाता है और अगर बालिका या बालक बाल विवाह को निरंतर नहीं रखना चाहते तो उनको बाल विवाह निरस्त करवाने का अधिकार है.

अक्षय तृतीया पर होते हैं, राजस्थान के गांवों में बाल विवाह

मुख्य रूप से भारत में मनाया जाने वाला त्योहार अक्षय तृतीया, उस दिन राजस्थान में कई इलाको में बाल विवाह होते हैं. हालाँकि ज्यादातर बाल विवाह ग्रमीण इलाके में होते है. वही कुछ बाल विवाह चोरी छिपे कर दिए जाते है. ऐसे में अदालत ने पहले ही आदेश जारी किया है. कोर्ट ने कहा कि बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 लागू होने के बावजूद राज्य में अभी भी बाल विवाह हो रहे हैं. लेकिन राजस्थान हाईकोर्ट इस बार बाल विवाह को रोकने के लिए काफी सख्त नियम बना दिए हैं.  कोर्ट ने गांवों में चोरी छुपे होने वाले बाल विवाह रोकने के लिए अब पंच सरपंचों को भी जिम्मेदार ठहराया, यानी अब गांव में कोई भी चोरी छिपे बाल विवाह हुआ, तो पंच और सरपंच की खैर नहीं होगी. कोर्ट ने यह निर्देश सरकार को मुख्य सचिव से लेकर सभी जिलों के कलेक्टरों को भी देने के निर्देश दिए.

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