14 November : बगावत और टूटने की कहानी से भरा पड़ा है शिरोमणि अकाली दल का इतिहास

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14 दिसंबर ये वो तारिख है जब शिरोमणि अकाली दल की स्थापना हुई और  शिरोमणि अकाली दल का इतिहास कई साल पुराना है. साल 1920 को शिरोमणि अकाली दल की स्थापना हुई थी शिरोमणि अकाली दल बनाने की कहानी काफी पुरानी है इस पार्टी का इतिहास भी बगावत और टूट की घटनाओं से भरा पड़ा है.

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1920 में हुआ पार्टी का गठन 

नंवबर 1920 में क़रीब 10 हज़ार सुधारकों ने मिलकर 175 लोगों की एक कमेटी बनाई जिसे शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी यानी एसजीपीसी नाम दिया गया. वहीं इसके बाद 14 दिसंबर 1920 को अकाली दल का गठन हुआ और बाद में नाम में शिरोमणि जोड़ दिया गया. वहीं 14 दिसंबर 1920 में बनी शिरोमणि अकाली दल के पहले अध्यक्ष सुखमुख सिंह झब्बाल अकाली दल के पहले और बाबा खड़क सिंह इसके दूसरे अध्यक्ष थे, लेकिन पार्टी के तीसरे अध्यक्ष मास्टर तारा सिंह के नेतृत्व में अकाली दल राजनीतिक तौर पर प्रसिद्ध हुआ.

1937 में हुई सियासी सफर की शुरुआत

1920 में पार्टी की स्थापना के बाद अकाली दल ने अपना सियासी सफर 1937 में शुरु किया. प्रोविंशियल चुनाव में शिअद ने 10 सीटें जीती और 1992 तक बीजेपी और अकाली दल अलग-अलग चुनाव लड़ती थी. इसके बाद दोनों ने साथ आने का फैसला लिया. 1996 में अकाली दल ने ‘मोगा डेक्लरेशन’ पर साइन किया और 1997 में बीजेपी के साथ पहली बार चुनाव लड़ा. दोनों अकाली दल और बीजेपी की दोस्ती लगातार चलती रही लेकिन किसान आंदोलन के बाद अकाली दल मोदी कैबिनेट से बाहर हो गयी. वहीं 2017 के चुनाव में पार्टी की बड़ी हार हुई पार्टी ने 117 सीटों पर चुनाव लड़ा लेकिन 15 सीटों पर ही सिमट गई.

पार्टी के ये लोकप्रिय नेता बने 5 बार सीएम 

जहाँ इस पार्टी को राजनीतिक पहचान पार्टी के तीसरे अध्यक्ष मास्टर तारा सिंह तारा के नेतृत्व में मिली तो वहीं इस पार्टी के 20वें अध्यक्ष प्रकाश सिंह बादल पांच बार पंजाब के मुख्यमंत्री बने तो वहीं 10 बार विधानसभा चुनाव जीता साथ ही 1957 का चुनाव जीतने के अलावा 1969 से वह लगातार राज्य विधानसभा के चुनाव जीते. वहीं 2014 में केंद्र में बीजेपी के साथ मिलकर प्रकाश सिंह बादल (Prakash Singh Badal prizes) की पार्टी शिरोमणि अकाली दल ने एनडीए की सरकार बनाई और 2015 में ही केंद्र सरकार ने सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान के चलते देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से उन्हें सम्मानित किया गया और ये अवार्ड उन्हें पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा दिया गया और 95 साल की उम्र में उनका निधन हो गया.

सुखबीर सिंह बादल हैं पार्टी के 21वें अध्यक्ष

आपको बता दें, इस पार्टी के चौथे अध्यक्ष गोपाल सिंह कौमी, तारा सिंह ठेकेदार, तेजा सिंह, बाबू लाभ सिंह, ऊधम सिंह नागोके, ज्ञानी करतार सिंह, प्रीतम सिंह गुजरां, हुकम सिंह, फतेह सिंह, अच्छर सिंह, भूपिंदर सिंह, मोहन सिंह तुड़, जगदेव सिंह तलवंडी, हरचरण सिंह लोंगोवाल, सुरजीत सिंह बरनाला, सिमरनजीत सिंह मान, प्रकाश सिंह बादल और अब सुखबीर सिंह बादल पार्टी के 21वें अध्यक्ष हैं.

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