‘विपक्षी पार्टियां खो रही अपना अस्तित्व, ममता बनर्जी को करना चाहिए बंगाल पर फोकस’

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 28 जुलाई 2021, 05:30 AM Updated: 28 जुलाई 2021, 05:30 AM
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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राष्ट्रीय राजनीति में उतरने का ऐलान कर चुकी है। इसी क्रम में वह 5 दिवसीय दिल्ली दौरे पर पहुंची हैं। बीते दिन मंगलवार को उन्होंने देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं से मुलाकात की। मंगलवार की शाम उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की। 

आज बुधवार को वह कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात करने वाली है और बुधवार की शाम वह राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से भी मुलाकात कर सकती है। ममता बनर्जी के दिल्ली दौरे को लोकसभा चुनाव 2024 से जोड़कर देखा जा रहा है। 

इसी बीच पश्चिम बंगाल बीजेपी इकाई के अध्यक्ष दिलीप घोष ने एक बार फिर से ममता बनर्जी को निशाने पर लिया है। उन्होंने कहा है कि टीएमसी प्रमुख को बंगाल में हिंसा रोकने पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि पीएम नरेंद्र मोदी देश की देखभाल करने के लिए हैं।

‘ममता केवल राजनीति करती हैं’

दिल्ली में मीडिया को संबोधित करते हुए दिलीप घोष ने यह बात कही। उन्होंने कहा, ‘विपक्षी दल राष्ट्रीय राजनीति में अपनी जमीन खो रहे हैं और दोनों सदनों में प्रतिनिधियों की कम संख्या के साथ, उन्हें राष्ट्र के मूड को समझना चाहिए।‘

उन्होंने कहा, ‘ममता बनर्जी का ध्यान बंगाल के विकास या राज्य में पिछले कई महीनों से हो रही हिंसा की ओर नहीं है। वह केवल राजनीति करती हैं और केंद्र सरकार का विरोध करती हैं। ममता बनर्जी को पहले बंगाल की देखभाल करनी चाहिए। मोदी जी देश की देखभाल करने के लिए हैं। जब तक मोदी जी है तब तक देश ठीक है।‘

‘विपक्षी पार्टियों का अस्तित्व खतरे में है’

लोकसभा चुनाव 2019 में विपक्षी पार्टियां एक साथ मिलकर चुनावी दंगल में उतरी थी लेकिन नतीजा बीजेपी के पक्ष में गया। इसे लेकर भी दिलीप घोष ने विपक्षी पार्टियों को निशाने पर लिया है। उन्होंने कहा, 2019 में विपक्ष ने भी एकजुट होने की कोशिश की लेकिन भाजपा जीत गई। अब उनका अस्तित्व खतरे में है।

उन्होंने कहा, ‘ऐसी पार्टियां हैं जिनका लोकसभा और राज्यसभा में एक भी प्रतिनिधि नहीं है। टीएमसी की एक दर्जन सीटें भी कम हो गईं। इससे उन्हें पता होना चाहिए कि लोग क्या चाहते हैं।‘

पीएम के सामने उठाया राज्य का नाम बदलने का मुद्दा

बताते चले कि जुलाई 2018 में पश्चिम बंगाल विधानसभा में राज्य का नाम बांग्ला करने का प्रस्ताव पास किया गया था। ममता सरकार ने इस प्रस्ताव को मंजूरी देने के लिए गृहमंत्रालय के पास भेजा लेकिन गृह मंत्रालय ने इसे ठुकरा दिया था।

बीते दिन मंगलवार को जब ममता बनर्जी ने पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात की तो उन्होंने वैक्सीन के साथ-साथ राज्य का नाम बदलने का मुद्दा भी उठाया। जिसे लेकर बीजेपी की ओर से लगातार विरोध जताया जा रहा है।

इस मसले पर दिलीप घोष ने कहा है कि ‘वह हर महीने केंद्र को एक प्रस्ताव भेजती है। उसके सभी प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया जा सकता है। उनके प्रस्ताव पर केंद्र में निर्णय लेने के लिए लोग हैं। मैं नाम बदलने के पक्ष में नहीं हूं।‘

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