UP News: खीरी के नरगड़ा गांव में 42वीं बार निकली अनोखी बारात, बिना दुल्हन के लौटा दूल्हा

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 16 मार्च 2025, 05:30 AM Updated: 16 मार्च 2025, 05:30 AM
Google News
Follow Us on Google News
Prefer Nedrick News
on Google

UP News: समय के साथ शादियों की परंपराएं बदल रही हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के खीरी जिले के नरगड़ा गांव में एक अनूठी शादी की परंपरा आज भी कायम है। इस बार गांव के विश्वम्भर दयाल मिश्रा 42वीं बार दूल्हा बने, लेकिन हर बार की तरह इस बार भी दूल्हे को दुल्हन नहीं मिली। सोमवार को रंगों में सराबोर बारातियों का लंबा जत्था ट्रैक्टर पर सवार होकर गांव के बीच से निकला। पूरा गांव इस बारात का हिस्सा बना और दूल्हे की बारात धूमधाम से निकाली गई। द्वारपूजन से लेकर मंगलगीत और पारंपरिक रस्मों तक सब कुछ वैसा ही हुआ, जैसा किसी आम शादी में होता है। लेकिन अंत में बारात बिना दुल्हन के ही लौट आई।

और पढ़ें: UP News: उन्नाव में रंग खेलने के दौरान मुस्लिम व्यक्ति की संदिग्ध मौत, परिजनों ने लगाया हत्या का आरोप, पुलिस ने बताया हार्ट अटैक

सैकड़ों वर्षों से चली आ रही अनोखी परंपरा- UP News

यह अनोखी बारात होली के दिन हर साल निकाली जाती है। नरगड़ा गांव में इस परंपरा का पालन सैकड़ों वर्षों से किया जा रहा है। हर साल होली के दिन पूरा गांव दूल्हे के साथ बारात निकालता है, जहां लोग नाचते-गाते और गुलाल-अबीर उड़ाते हुए इस अनोखी शादी का हिस्सा बनते हैं।

UP News holi 2025
Source: Google

गांव के बुजुर्गों का कहना है कि यह परंपरा हमारी संस्कृति की धरोहर है। आज भले ही आधुनिक शादियों में बदलाव आ गया हो, लेकिन नरगड़ा गांव की यह परंपरा लोक संस्कृति और सामाजिक जुड़ाव की मिसाल बनी हुई है।

बिना दुल्हन के लौटती बारात का दिलचस्प कारण

नरगड़ा गांव में इस शादी की एक और अनोखी परंपरा है – बारात को बिना दुल्हन के लौटना। इस परंपरा के अनुसार, दूल्हे की ससुराल गांव में ही होती है, लेकिन दुल्हन (यानी उनकी पत्नी) को शादी से पहले मायके भेज दिया जाता है।

इस साल भी विश्वम्भर की पत्नी मोहिनी को पहले ही मायके बुला लिया गया था। जब शादी की रस्में पूरी हो जाती हैं और बारात वापस लौट आती है, तो कुछ दिन बाद मोहिनी को फिर से ससुराल भेज दिया जाता है।

UP News holi 2025
Source: Google

इस परंपरा में शामिल विश्वम्भर से पहले उनके बड़े भाई श्यामबिहारी 35 वर्षों तक दूल्हा बने और हर बार बिना दुल्हन के बारात वापस आई। पहले वे भैंसा पर सवार होकर बारात लेकर निकलते थे, लेकिन अब ट्रैक्टर का इस्तेमाल किया जाता है।

लोक संस्कृतियों को संजोए हुए है यह अनोखी शादी

इस अनोखी शादी में आज भी वही पारंपरिक रस्में निभाई जाती हैं, जो सदियों से चली आ रही हैं।
– बारात का भव्य स्वागत
– पांव पखारने की रस्म
– गारी और सोहर गीतों की गूंज
– सरिया और मंगलगीतों का आयोजन

हर रस्म पूरी होती है, बस अंत में दुल्हन की विदाई नहीं होती। इस परंपरा को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं और इस अनोखी शादी का हिस्सा बनते हैं।

परंपरा का महत्व और सामाजिक जुड़ाव

नरगड़ा गांव की यह परंपरा सिर्फ एक शादी नहीं, बल्कि लोक संस्कृति की जीवंत झलक है। यह गांव के लोगों के आपसी मेल-जोल, सद्भाव और परंपराओं के प्रति सम्मान को दर्शाती है।

भले ही आधुनिक दौर में शादियों के रीति-रिवाज बदल चुके हैं, लेकिन नरगड़ा गांव की यह अनूठी बारात आज भी अपनी परंपराओं को संजोए हुए है। यही वजह है कि 42वीं बार यह अनोखी शादी पूरे उत्साह के साथ संपन्न हुई।

और पढ़ें: ASI Death In Mauganj: मध्य प्रदेश के मऊगंज में हिंसा! युवक की हत्या के बाद भड़का बवाल, पुलिस टीम पर हमला, एएसआई की मौत, तहसीलदार हुआ घायल

vickynedrick@gmail.com

vickynedrick@gmail.com https://nedricknews.com

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Recent News

Trending News

Editor's Picks

Latest News

©2026- All Right Reserved. Manage By Marketing Sheds