Ujjain Shahi Masjid dispute: मध्य प्रदेश के धार्मिक शहर उज्जैन में आगामी सिंहस्थ महाकुंभ 2028 की तैयारियों के तहत चल रहे सड़क चौड़ीकरण को लेकर सोमवार सुबह भारी विवाद खड़ा हो गया। करीब 650 साल पुरानी ऐतिहासिक शाही मस्जिद के एक हिस्से को हटाने को लेकर छतरी चौक इलाके में तनाव इतना बढ़ गया कि पुलिस और भीड़ के बीच हिंसक झड़प हो गई। पथराव के बाद हालात को काबू में करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े। इसी बीच, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच (डबल बेंच) ने मस्जिद कमेटी की रिट याचिका खारिज कर दी है, जिससे अब सड़क चौड़ीकरण की रुकावट पूरी तरह खत्म हो गई है।
छतरी चौक पर आधी रात से तनाव, सुबह पथराव| Ujjain Shahi Masjid dispute
उज्जैन विकास योजना 2035 और सिंहस्थ 2028 के मास्टर प्लान के मुताबिक, नगर निगम इस सड़क को 15 मीटर चौड़ा कर रहा है। शाही मस्जिद महाकालेश्वर मंदिर के ठीक सामने और पवित्र क्षिप्रा नदी के पास स्थित है, जहां सिंहस्थ के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही रहेगी। सड़क की जद में मस्जिद का करीब तीन फीट का हिस्सा, प्रार्थना स्थल का भाग, मजहर चौक और करीब 120 फीट ऊंची मीनार का दायरा आ रहा था।
रविवार रात से ही छतरी चौक इलाके में लोग जुटने लगे थे। सोमवार सुबह अफवाहों के चलते माहौल बिगड़ा और भीड़ ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। सुरक्षा के लिहाज से आरपीएफ (RPF) और भारी पुलिस बल तैनात किया गया।
प्रशासन और शहर काज़ी की अपील: ‘खुद हटा रहे हैं हिस्सा’
उज्जैन के कलेक्टर रौशन सिंह ने साफ किया कि शहर के विकास में सभी धर्मों के लोग स्वेच्छा से साथ दे रहे हैं। उन्होंने कहा, “कई लोग सड़क की जद में आ रहे अपने मकान और धार्मिक स्थल खुद हटा रहे हैं। छतरी चौक में भी मस्जिद कमेटी खुद आगे आकर निर्माण हटा रही है। लोग किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें।”
वहीं शहर क़ाज़ी खलीक उर रहमान ने बताया कि रविवार रात प्रशासन से बातचीत के बाद कमेटी ने खुद उस हिस्से को हटाने का फैसला लिया था। कुछ लोग गलतफहमी और अफवाह की वजह से भड़क गए थे। क़ाज़ी ने कहा, “मुस्लिम समुदाय सिंहस्थ का हमेशा से पक्षधर रहा है। हमारी बस इतनी गुजारिश थी कि कोई वैकल्पिक रास्ता निकले, क्योंकि यह मस्जिद करीब 1390 में बनी एक ऐतिहासिक धरोहर है।”
हाईकोर्ट का दो टूक रुख: कानूनी प्रक्रिया का हुआ पालन
इससे पहले 9 सितंबर को जस्टिस संदीप एन भट्ट की सिंगल बेंच ने याचिका खारिज की थी, जिसके बाद मस्जिद कमेटी डिवीजन बेंच पहुंची थी। मस्जिद कमेटी के वकील अजहर वारसी ने दलील दी कि धार्मिक स्थल को निशाना बनाया जा रहा है और वैकल्पिक मार्ग तलाशा जाए।
कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए रिकॉर्ड का हवाला दिया कि इसी रास्ते पर पहले 10 मंदिरों और एक अन्य मस्जिद के निर्माण हटाए जा चुके हैं, और शहर में कुल 80 धार्मिक स्थलों पर ऐसी कार्रवाई हुई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सिर्फ धार्मिक स्थल होने से निगम की कार्रवाई मनमानी नहीं हो जाती। डिवीजन बेंच ने नगर निगम को उसके हलफनामे के मुताबिक मस्जिद कमेटी को नियमानुसार FAR और TDR का लाभ देने का निर्देश देते हुए याचिका खारिज कर दी। फिलहाल इलाके में शांति है और कमेटी सहमति से ढांचा हटाने में जुटी है।














































