महाराष्ट्र में सिख इतिहास का स्वर्णिम अध्याय: अकाल तख्त से लेकर प्रमुख गुरुद्वारों तक की यात्रा – Famous Gurdwaras of Maharashtra

Shikha Mishra | Nedrick News Maharashtra Published: 29 सितम्बर 2026, 04:53 PM Updated: 29 सितम्बर 2026, 04:53 PM
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Famous Gurdwaras of Maharashtra: हर सिख के लिए पाँच मुख्य अकाल तख्त सर्वोच्च अधिकार रखते हैं; उनके आदेशों को दस गुरुओं का हुक्म और सर्वशक्तिमान ईश्वर—जो सिख धर्म में सर्वोच्च आध्यात्मिक सत्ता हैं—की दिव्य इच्छा माना जाता है। ये अकाल तख्त अलग-अलग राज्यों में स्थित हैं; पाँचवाँ तख्त महाराष्ट्र के नांदेड़ में है, वही जगह जहाँ दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी, ईश्वर में विलीन हो गए थे। यहीं पर पवित्र श्री गुरु ग्रंथ साहिब को हमेशा के लिए ग्यारहवें गुरु के रूप में मान्यता दी गई थी। कई मायनों में सिखों के लिए महाराष्ट्र का बहुत महत्व है, इसीलिए राज्य में सिखों की बड़ी आबादी है—सिख आबादी के आकार के हिसाब से यह आठवें स्थान पर है। इन गहरी मान्यताओं के कारण, पूरे राज्य में अनगिनत गुरुद्वारे हैं। इस लेख में, हम महाराष्ट्र के कुछ प्रसिद्ध गुरुद्वारों के बारे में जानेंगे।

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1. बांस गुरुद्वारा साहिब – Bamboo Gurdwara Sahib

गोंडाले, आपने एक से बढ़ एक यूनिक इमारतो को देखा होगा लेकिन महाराष्ट्र के गोंडाले में बांस से बना बेहद अनोखा गुरुद्वारा मौजूद है। ये गुरुद्वारा दुनिया का पहला इकोफ्रैंडली गुरुद्वारा है। इस गुरुद्वारे का निर्माण रायगढ़ के पाली में रहने वाले सिख समुदाय ने साल 2024 के मध्य में शुरु किया था। जनवरी 2025 से यहां सिख संगतो ने आकर मत्था टेकना शुरु कर दिया था। जनवरी 2026 में यहां पहला पाली जोध मेला आयजित किया गया था। जो बेहद भव्य था.. वहीं इसी साल सितंबर में बांस साहिब गुरुद्वारे में 6 सितंबर को श्री गुरु ग्रंथ साहिब की पहला प्रकाश किया गया था। हैरानी की बात है जब इस गुरुद्वारे का निर्माण शुरु हुई तभी  से .यहां लगातार लंगर सेवा शुरु हो गई थी। इस अनोखे गुरुद्वारे के दर्शन केरने के लिए देश विदेश से लोग आते है।

2. गुरुद्वारा गुप्तसर साहिब – Gurudwara Guptsar Sahib

नासिक जिले के मनमाड शहर में मौजूद गुरुद्वारा गुप्तसर साहिब, दसवे गुरु गुरु गोबिंद सिंह को समर्पित है। मुंबई से 260 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में बना गुरुद्वारा गुप्तसर साहिब वो पड़ाव है, जहां सिख संगते नांदेड़ हुजुर साहिब के दर्शन से पहले रूकती है। ये स्थान गुरू साहिब की उस महानता का प्रतीक है जब गुरु साहिब ने दो मराठा लड़ाको बाला राव और रुस्तम राव को रिहा कराया था और अपने साथ ले आये थे। उस वक्त इस स्थान पर बेहद घना जंगल हुआ करता था लेकिन 1931 में बाबा निधान सिंह जी ने इस स्थान को साफ करवाया और यहां गुरु साहिब क समर्पित करते हुए गुरुद्वारे का निर्माण करवाया। इस दौरान यहां एक मीठे पानी की गुप्त बाबड़ी मिली.. जिस कारण ही इस स्थान को गुप्तसर साहिब कहा गया। यहां तीन मंजिला एक गुंबदनुमा इमारत है। एक बड़ा दीवान हॉल, जहां श्री गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश होता है। 24 घंटे ये गुरुद्वारा खुला रहता है जहां हमेशा लंगर चलता रहता है। ये कला और संस्कृति का बेहद अनूखा संगम है।

3. गुरुद्वारा नानकसर साहिब नांदेड़ – Gurudwara Nanaksar Sahib Nanded

महाराष्ट्र का नांदेड़ हर एक सिख के लिए बेहद पवित्र शहर है। यहां दसवे गुरु ज्योति ज्योत में समाये थे, जिनकी याद मे ही तख्त सचखंड श्री हुजुर साहिब प्रकाशमान हो रहा है.. लेकिन बहुत कम लोग जानते है कि करीब 10 किलोमीटर दूर मौजूद है गुरुद्वारा नानकसर साहिब.. जो कि पहले गुरु गुरु नानक देव जी के यहां चरण रखने और भाई मरदाना जी के साथ भजनो से पूरे माहौल को पवित्र करने वाले है। इस दौरान गुरु साहिब बीदर की यात्रा पर थे। यहां गुरुसाहिब 9 दिन और 9 घंटे तक रहे थे और एक बेरी के पेड़ के नीचे ध्यान किया करते थे। सिख धर्म का प्रचार करते थे। कहते है कि रबाब बजाते समय भाई मरदाना को बहुत तेज प्यास लगी थी, उनकी पुकार में खुद जमीन से मीठे पानी का झरना निकला था। इस झरने को अब पक्का कर दिया गया है जिसे महाराजा रणजीत सिंह ने करवाया था। कहते है कि इस पानी को अगर कुष्ठ रोगी को लगाया जाये तो वो पूरी तरह से ठीक हो जाता है। ये गुरुद्वारा 24 घंटे सातो दिन खुला रहता है, सातों दिन यहां लंगर चलता है। नांदेड़ जाने वाले यहां जरूर आते है।

4. गुरुद्वारा श्री सचखंड दरबार उल्हासनगर – Gurudwara Shri Sachkhand Darbar Ulhasnagar

उल्हासनगर जिले के कैलाश नजर चॉक में मौजूद एक भव्य गुरुद्वारा। जिसे 1947 में बंटवारे के बाद पाकिस्तान की ओर से भाग कर आये सिंधी सिखो ने बनवाया था। लेकिन इस गुरुद्वारे को मान्यता मिलने में करीब 60 साल का समय लग गया। हालांकि आजादी से पहले भी सच खंड दरबार सायन पर वहां एक ऐतिहासिक स्थल था। गुरुद्वारा होने के साथ साथ यहां स्वास्थ्य केंद्र है, जहां मुफ्त में लोगो का ईलाज किया जाता है। आज यहां न केवल सिंधी लोग बल्कि हर समुदाय के लोग आते है।

5. ज्ञानजी गुरुद्वारा पिंपरी चिंचवाड़ – Gyanji Gurudwara Pimpri Chinchwad

महाराष्ट्र के पूणे के पिंपरी चिंचवाड़ में मौजूद ज्ञानजी गुरुद्वारे को श्री गुरु नानक दरबार के नाम से भी जाना जाता है। ये गुरुद्वारा पिंपरी के मैन बाजार में मौजूद है लेकिन फिर भी आपको यहां एक अलग शांति का अहसास होगा। ये गुरुद्वारा 24 घंटे सातों दिन खुला रहता है,, 24 घंटे चलने वाले लगंर में गुरुवार और रविवार को विशेष प्रसाद दिया जाता है, जो यहां की एक बड़ी खासियत है। विशेश कीर्तन के गायन से यहां का वातावरण हमेशा गुरुमय बना रहता है। महाराष्ट्र में कुल करीब 80 से 120 गुरुद्वारे है, जिनकी अपनी खासिय़त है।

Shikha Mishra

shikha@nedricknews.com

शिखा मिश्रा, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत फोटोग्राफी से की थी, अभी नेड्रिक न्यूज़ में कंटेंट राइटर और रिसर्चर हैं, जहाँ वह ब्रेकिंग न्यूज़ और वेब स्टोरीज़ कवर करती हैं। राजनीति, क्राइम और एंटरटेनमेंट की अच्छी समझ रखने वाली शिखा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और पब्लिक रिलेशन्स की पढ़ाई की है, लेकिन डिजिटल मीडिया के प्रति अपने जुनून के कारण वह पिछले तीन सालों से पत्रकारिता में एक्टिव रूप से जुड़ी हुई हैं।

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