Top 5 Ghaziabad News: गाजियाबाद से आज पांच बड़ी खबरें सामने आई हैं। खोड़ा में दुकान की तिरपाल फटने के विवाद में दो पक्षों में सड़क पर जमकर मारपीट हुई, जिसका वीडियो वायरल है। वहीं साहिबाबाद में गणित में कम नंबर आने के तनाव में 7वीं की छात्रा ने 10वीं मंजिल से कूदकर जान दे दी; टीचर पर प्रताड़ना का आरोप है।
प्रशासनिक मोर्चे पर, 1.25 लाख LPG उपभोक्ताओं ने दोहरे कनेक्शन के डर से अब तक E-KYC नहीं कराई है, जिसके लिए 30 सितंबर आखिरी तारीख है। चिकित्सा क्षेत्र में बड़ी लापरवाही सामने आई है—विजयनगर में गलत अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट देने पर 4 डॉक्टरों पर FIR हुई है, जिन्होंने गर्भ में विकृत बच्चे को ‘नॉर्मल’ बताया था। इसके अलावा, जन आरोग्य मेले में जांच सुविधाएं न होने से 496 मरीजों को हायर सेंटर रेफर करना पड़ा। तो चलिए इस लेख के जरिए इन सभी खबरों को विस्तार से जानते हैं।
मामूली विवाद पर दो पक्षों में जमकर मारपीट
गाजियाबाद की पहली खबर खोड़ा थाना क्षेत्र से, जहां जीत विहार कॉलोनी (वार्ड-1, मस्जिद वाली गली) में दुकान की तिरपाल फटने के मामूली विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच जमकर मारपीट हुई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बताया जा रहा है कि नवनीत विहार निवासी एक दुकानदार की दुकान का तिरपाल एक ऑटो चालक की लापरवाही से फट गया था। दुकानदार द्वारा ऑटो चालक को रोकने और गाली-गलौज करने पर विवाद शुरू हुआ। विवाद बढ़ने पर अन्य दुकानदार और वहां से गुजर रहे कुछ और ऑटो चालक भी आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों ने सड़क पर एक-दूसरे को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा और ईंट-पत्थरों से हमला किया, जिसमें कई लोग घायल हो गए।
पुलिस जांच के अनुसार, एक पक्ष से फरमान और परवेज शामिल थे, जबकि दूसरे पक्ष में ऑटो चालक शब्बीर अहमद, मुनीर आलम, तौसीफ, आफताब और शाहिद शामिल थे। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। समझाने के बावजूद दोनों पक्ष शांत नहीं हुए और पुलिस के सामने ही आपस में भिड़ गए। इसके बाद पुलिस ने घायलों को मेडिकल परीक्षण के लिए भेजा और चौकी प्रभारी सुरेंद्र सिंह की ओर से दोनों पक्षों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
गणित में कम नंबर आने पर 7वीं ने दी जान (Top 5 Ghaziabad News)
गाजियाबाद की दूसरी खबर साहिबाबाद थाना क्षेत्र से, जहां राजेंद्र नगर के गुलमोहर अपार्टमेंट में 7वीं कक्षा की एक छात्रा ने 10वीं मंजिल से कूदकर अपनी जान दे दी। इस दुखद घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। मीडिया द्वारा मिली जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि छात्रा को मैथमेटिक्स (गणित) विषय में कम नंबर मिलते थे, जिसकी वजह से वह काफी तनाव में थी। पुलिस को छात्रा के कमरे से एक डायरी मिली है, जिसमें उसने अपनी मानसिक स्थिति, पढ़ाई के दबाव और कम नंबर आने से जुड़ी कई बातें लिखी हैं।
मृतका के परिजनों ने स्कूल टीचर पर मानसिक प्रताड़ना (Mental Harassment) का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि टीचर द्वारा छात्रा को प्रताड़ित किया जा रहा था, जिससे तंग आकर उसने यह कदम उठाया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस ने छात्रा की डायरी को जब्त कर लिया है और परिजनों के आरोपों के आधार पर स्कूल प्रबंधन व संबंधित शिक्षक से पूछताछ कर मामले की गहन जांच शुरू कर दी है।
गैस कनेक्शन धारकों के लिए राहत (Top 5 Ghaziabad News)
गाजियाबाद में घरेलू एलपीजी (LPG) गैस कनेक्शन धारकों के लिए एक बड़ी खबर है। जिले में 1.25 लाख से अधिक घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं ने अब तक अपनी E-KYC (ई-केवाईसी) नहीं कराई है। सरकार और तेल कंपनियों द्वारा इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए 30 सितंबर 2026 तक का आखिरी मौका दिया गया है।
जिले में बड़ी संख्या में ऐसे उपभोक्ता हैं जिनके पास एलपीजी (LPG) और पीएनजी (PNG) दोनों कनेक्शन हैं। जिला प्रशासन ने पहले ही अपील की थी कि ऐसे लोग एलपीजी कनेक्शन से अपना नाम हटवा लें, लेकिन दोहरे कनेक्शन का लाभ खोने या नाम कट जाने के डर से उपभोक्ताओं ने ई-केवाईसी से दूरी बना रखी है
यदि उपभोक्ता 30 सितंबर 2026 तक ई-केवाईसी (Biometric Aadhaar Authentication) प्रक्रिया पूरी नहीं करते हैं, तो 1 अक्टूबर 2026 से उनकी गैस सब्सिडी रोक दी जाएगी।
नए नियमों के अनुसार, ई-केवाईसी न कराने वाले परिवारों को 14.2 किलोग्राम वाला बड़ा घरेलू सिलेंडर मिलना बंद हो सकता है। उन्हें सिर्फ बिना सब्सिडी वाले 5 या 10 किलोग्राम के छोटे फ्री-ट्रेड सिलेंडर ही दिए जाएंगे।
आपूर्ति विभाग के अनुसार, कई उपभोक्ताओं ने अपना मोबाइल नंबर बदल लिया है और एलपीजी रिकॉर्ड में इसे अपडेट नहीं किया है, जिससे उनसे संपर्क करना मुश्किल हो रहा है। कुछ लंबित कनेक्शन उन लोगों के भी हो सकते हैं जो या तो गाजियाबाद से शिफ्ट हो गए हैं या निष्क्रिय हो चुके हैं।
उपभोक्ता अपने नजदीकी गैस एजेंसी (जैसे इंडियन ऑयल, एचपी या भारत गैस) पर अपना आधार कार्ड और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर ले जाकर बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन करवा सकते हैं। इसके अलावा, संबंधित तेल कंपनियों के मोबाइल ऐप (जैसे आधार फेस आरडी ऐप की मदद से) के जरिए घर बैठे भी इसे मुफ्त में पूरा किया जा सकता है।
मेडिकल लापरवाही में 2 डॉक्टरों समेत 4 लोगों के खिलाफ FIR (Top 5 Ghaziabad News)
गाजियाबाद की चौथी खबर विजयनगर थाना क्षेत्र से, जहां मेडिकल लापरवाही (Medical Negligence) का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने दो डॉक्टरों समेत चार लोगों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की है। इन पर आरोप है कि गर्भावस्था के दौरान की गई अल्ट्रासाउंड जांचों में बच्चे को पूरी तरह ‘सामान्य’ बताया गया, जबकि जन्म के बाद बच्चा गंभीर शारीरिक विकृतियों के साथ पैदा हुआ
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विजयनगर के क्रासिंग रिपब्लिक (डूडाहेड़ा) निवासी अविनाश कुमार ने अपनी गर्भवती पत्नी का इलाज प्रताप विहार के आस्था अस्पताल और सुपर डायग्नोस्टिक सेंटर से कराया था। गर्भकाल के दौरान अलग-अलग महीनों में कुल चार बार अल्ट्रासाउंड कराया गया, और हर बार रिपोर्ट में बच्चे को ‘नॉर्मल’ बताया गया। डिलीवरी के बाद जब बच्चे का जन्म हुआ, तो वह लकवाग्रस्त (पैरालाइज्ड) मिला। नवजात की आधी रीढ़ की हड्डी विकसित नहीं थी, उसके दोनों पैर पूरी तरह पैरालाइज्ड थे और सिर में पानी भरा हुआ था।
पीड़ित पिता ने जब बच्चे को दिल्ली के चाचा नेहरू अस्पताल और लोक नायक जय प्रकाश (LNJP) अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों को दिखाया, तब डॉक्टरों ने बताया कि पुरानी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट पूरी तरह गलत थीं। इस तरह की गंभीर शारीरिक विकृतियां शुरुआती महीनों के लेवल-2 अल्ट्रासाउंड (Anomaly Scan) में ही आसानी से पकड़ी जा सकती थीं।
पीड़ित का आरोप है कि जब वह इस लापरवाही की शिकायत लेकर डायग्नोस्टिक सेंटर और डॉक्टरों के पास गया, तो उसके साथ बदसलूकी की गई और जान से मारने की धमकी दी गई। पुलिस द्वारा सुनवाई न होने पर पीड़ित ने गाजियाबाद कोर्ट की शरण ली। अब कोर्ट के कड़े आदेश के बाद विजयनगर पुलिस ने संबंधित डॉक्टरों और स्टाफ समेत 4 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, लापरवाही और धमकी देने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
आरोग्य मेले में बुनियादी सुविधाएं न होने पर मरीजों को किया रेफर (Top 5 Ghaziabad News)
गाजियाबाद की पांचवी खबर स्वास्थ्स को लेकर सरकारी दावों की पोल खोल कर देगी। जहां एक ही स्थान पर सभी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के सरकारी दावों के विपरीत, मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले में बुनियादी जांच सुविधाएं न मिलने के कारण 496 मरीजों को उच्च केंद्रों (हायर सेंटरों) के लिए रेफर करना पड़ा है। इस अव्यवस्था से मेले के मूल उद्देश्य पर सवाल खड़े हो गए हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोग्य मेले का आयोजन प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs और CHCs) पर जमीनी स्तर पर मरीजों के इलाज व मौके पर ही खून, यूरिन जैसी बुनियादी जांचें करने के लिए किया जाता है। हालांकि, केंद्रों पर टेस्टिंग किट और पैथोलॉजी की पर्याप्त व्यवस्था न होने से डॉक्टरों को मजबूरन मरीजों को रेफर करना पड़ा।
जिले के शहरी और ग्रामीण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आयोजित इस मेले में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग बुखार, मौसमी बीमारियों, त्वचा रोग और अन्य समस्याओं के इलाज के लिए पहुंचे थे।
दूर-दराज के इलाकों से मेले में आए मरीजों को उम्मीद थी कि उन्हें एक ही छत के नीचे सारी जांचें और दवाएं मिल जाएंगी। लेकिन जांच न होने से उन्हें अब जिला अस्पताल (एमएमजी) या कंबाइंड अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के दावों के बावजूद जमीनी स्तर पर रिसोर्सेज और किट्स की कमी के कारण यह स्थिति पैदा हुई है। इस बड़े पैमाने पर हुए रेफरल के बाद अब उच्च अधिकारियों द्वारा केंद्रों पर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की समीक्षा की बात कही जा रही है।













































