Top 5 Ghaziabad News: गाजियाबाद जिले से आज पांच बड़ी और संवेदनशील खबरें सामने आई हैं, जिन्होंने प्रशासनिक अमले से लेकर आम जनता तक को हिलाकर रख दिया है। एक तरफ जहाँ इंदिरापुरम और खोड़ा में अपराध की दो बड़ी वारदातों ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, वहीं दूसरी तरफ पुलिस ने एक नाबालिग से छेड़छाड़ के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर त्वरित कार्रवाई की मिसाल पेश की है।
इसके साथ ही, जिले में सुरक्षा और पर्यावरण को लेकर दो बड़े खुलासे हुए हैं, जिनमें 52 बहुमंजिला सोसायटियों को फायर विभाग द्वारा असुरक्षित घोषित करना और औद्योगिक क्षेत्रों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग के नाम पर हो रही खानापूर्ति के कारण गहराता जल संकट शामिल है। तो चलिए इस लेख के जरिए गाजियाबाद की इन पांचों प्रमुख खबरों को विस्तार से जानते हैं।
घर के बाहर खेल रही किशोरी के साथ छेड़छाड़
गाजियाबाद में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर स्थानीय पुलिस ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। पुलिस ने हाल ही में हुई एक आपराधिक घटना के संबंध में त्वरित कार्रवाई करते हुए, चौबीस घंटे के भीतर आरोपियों को धर दबोचा। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।
मीडिया द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक, गाजियाबाद जिले के स्थानीय थाना क्षेत्र में पीड़ित किशोरी अपने घर के बाहर खेल रही थी, तभी आरोपियों ने उसके साथ छेड़छाड़ की। पीड़िता के परिजनों द्वारा घटना की जानकारी पुलिस को दी गई, जिसके बाद पुलिस तुरंत एक्शन में आई।
परिजनों की तहरीर के आधार पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) की सुसंगत धाराओं के तहत मामला पंजीकृत किया। पुलिस टीम ने त्वरित दबिश देकर घटना में शामिल दोनों नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है। गाजियाबाद पुलिस के अनुसार, पीड़ित बच्ची को हरसंभव सुरक्षा और कानूनी सहायता प्रदान की जा रही है तथा मामले में आगे की वैधानिक व अदालती कार्रवाई पूरी की जा रही है।
बार-बार चेतावनी और नोटिस के बावजूद कोई सुधार नहीं (Top 5 Ghaziabad News)
गाजियाबाद में हजारों परिवारों की सुरक्षा को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर मामला सामने आया है। जिले की 52 बहुमंजिला आवासीय सोसायटियों को अग्निशमन विभाग ने पूरी तरह से असुरक्षित घोषित कर दिया है। बार-बार चेतावनी और नोटिस के बावजूद बिल्डरों द्वारा सुरक्षा मानकों में सुधार न किए जाने पर, अब फायर विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया है। इस लापरवाही के कारण इन सोसायटियों में रहने वाले हजारों लोग हर वक्त आग के बड़े खतरे के साए में जीने को मजबूर हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गाजियाबाद जिले की बहुमंजिला इमारतों और हाईराइज सोसायटियों में रहने वाले हजारों लोगों की जान पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। गाजियाबाद अग्निशमन विभाग (Fire Department) की जांच में सामने आया है कि जिले की 52 बड़ी आवासीय सोसायटियां असुरक्षित हैं और वहां फायर फाइटिंग सिस्टम (आग बुझाने के इंतजाम) पूरी तरह ध्वस्त या निष्क्रिय हैं। बार-बार नोटिस दिए जाने के बावजूद बिल्डरों और प्रबंधन द्वारा सुधार न किए जाने पर अब फायर विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए अदालत (Court) का दरवाजा खटखटाया है।
अग्निशमन विभाग के सर्वे और ऑडिट के दौरान गाजियाबाद (मुख्यतः इंदिरापुरम, वैशाली, वसुंधरा, राजनगर एक्सटेंशन और क्रॉसिंग्स रिपब्लिक जैसे इलाकों) की 52 सोसायटियों को डिफॉल्टर पाया गया है। इन सोसायटियों में न तो फायर हाइड्रेंट काम कर रहे हैं, न ही स्प्रिंकलर सिस्टम और स्मोक डिटेक्टर चालू हालत में हैं। कई सोसायटियों की फायर एनओसी (NOC) सालों पहले एक्सपायर हो चुकी है।
मुख्य अग्निशमन अधिकारी (CFO) के निर्देश पर विभाग ने इन सभी 52 सोसायटियों के बिल्डरों/आरडब्ल्यूए (RWA) के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा (Prosecution) दायर कर दिया है। इन सोसायटियों में हजारों परिवार रहते हैं। किसी भी आपातकालीन स्थिति में आग लगने पर यहाँ बड़ी जनहानि होने का खतरा बना हुआ है, जिससे स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश और डर का माहौल है।
खोड़ा में दिनदहा दो शूटरों ने बिल्डर को बनाया निशाना
गाजियाबाद के खोड़ा में फायरिंग की घटना से स्थानीय पुलिस सक्रिय हो गई है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, दो शूटरों ने एक बिल्डर को निशाना बनाने की कोशिश की, जिसमें वे सुरक्षित बच निकले। पुलिस प्रशासन ने इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी है और मामले की गंभीरता को देखते हुए साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। बदमाशों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें गठित की गई हैं।
मीडिया द्वारा मिली जानकारी के अनुसार, गाजियाबाद के खोड़ा थाना क्षेत्र में दिनदहाड़े एक बिल्डर के कार्यालय में घुसकर स्कूटी सवार दो बदमाशों द्वारा अंधाधुंध फायरिंग करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस हमले में पीड़ित बाल-बाल बच गए। हमलावरों का निशाना खोड़ा कॉलोनी के मास्टर पार्क स्थित कार्यालय में बैठे सीताराम (उर्फ पाल बिल्डर) थे, जो निर्माण सामग्री (Building Material) के कारोबारी और बिल्डर हैं।
दोपहर करीब 11:30 बजे नीले रंग की स्कूटी पर सवार दो नकाबपोश युवक आए। उन्होंने हेलमेट पहन रखा था और अपनी स्कूटी की नंबर प्लेट पर कीचड़ लगा रखा था ताकि पहचान छुपाई जा सके। बदमाशों ने कार्यालय के बाहर रुककर सीताराम का नाम पुकारा और देखते ही उन पर पिस्तौल से फायर कर दिया। गोली सीताराम के पास (करीब एक फीट की दूरी) से गुजरती हुई सीधे दीवार में जा लगी, जिससे वे बाल-बाल बच गए। वारदात को अंजाम देकर जब हमलावर भागने लगे, तो सीताराम ने निडरता दिखाते हुए उनका पीछा किया और उन पर पत्थर भी फेंका, जिसके बाद बदमाश तेजी से फरार हो गए।
इंदिरापुरम के एसीपी अमित सक्सेना के मुताबिक, पीड़ित की शिकायत के आधार पर खोड़ा थाने में अज्ञात हमलावरों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109 (हत्या का प्रयास) के तहत मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है। आरोपियों की धरपकड़ के लिए पुलिस ने 3 से अधिक विशेष टीमों का गठन किया है। घटना का एक 28 सेकंड का CCTV फुटेज भी सामने आया है, जिसे कब्जे में लेकर पुलिस बदमाशों के रूट और पहचान को ट्रैक करने में जुटी है। फिलहाल हमले के पीछे की सटीक वजह (पुरानी रंजिश या रंगदारी) का खुलासा नहीं हो सका है।
पड़ोसी युवक ने की दुष्कर्म की कोशिश (Top 5 Ghaziabad News)
गाजियाबाद के इंदिरापुरम इलाके में एक नाबालिग किशोरी की सुरक्षा और गंभीर चोट लगने का बेहद गंभीर मामला सामने आया है। एक आवासीय सोसाइटी में रहने वाली किशोरी संदिग्ध परिस्थितियों में पहली मंजिल से नीचे गिर गई, जिसके कारण वह गंभीर रूप से घायल हो गई है। फिलहाल पीड़िता को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस घटना के बाद से स्थानीय निवासियों में सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता का माहौल है।
मीडिया द्वारा मिली जानकारी के अनुसार, इंदिरापुरम थाना क्षेत्र से एक अत्यंत दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ एक आवासीय सोसायटी में रहने वाली नाबालिग लड़की ने खुद को दुष्कर्म से बचाने के लिए पहली मंजिल से छलांग लगा दी। इस हादसे में किशोरी गंभीर रूप से घायल हो गई है। वारदात को अंजाम देने का आरोपी कोई बाहरी नहीं, बल्कि उसी बिल्डिंग में रहने वाला एक पड़ोसी युवक है।
आरोपी के चंगुल से खुद को सुरक्षित बचाने के लिए नाबालिग ने हिम्मत दिखाते हुए पहली मंजिल (First Floor) से नीचे छलांग लगा दी। ऊंचाई से गिरने के कारण किशोरी को गंभीर चोटें आई हैं और उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उसका इलाज जारी है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी युवक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) की गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है। गाजियाबाद पुलिस ने आरोपी की धरपकड़ के लिए कई टीमें रवाना कर दी हैं और उसे जल्द से जल्द गिरफ्तार करने का दावा किया है।
क्या पानी की एक-एक बूंद को तरसने वाला हैं गाजियाबाद
गाजियाबाद में पानी की एक-एक बूंद सहेजने के सरकारी दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। औद्योगिक क्षेत्रों में धड़ल्ले से हो रहे भारी जलदोहन के कारण पूरा जिला ‘डार्क ज़ोन’ की तरफ बढ़ रहा है। नियमों को ताक पर रखकर चल रही फैक्ट्रियों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के नाम पर सिर्फ औपचारिकता पूरी की जा रही है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और भूजल विभाग की सुस्ती के चलते आने वाले दिनों में आम जनता को गंभीर पानी किल्लत का सामना करना पड़ सकता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, औद्योगिक शहर गाजियाबाद में आने वाले दिनों में पानी की एक-एक बूंद के लिए हाहाकार मच सकता है। जिले में भूजल स्तर (Groundwater Level) तेजी से नीचे गिर रहा है, जिसके पीछे औद्योगिक इकाइयों (Factories) द्वारा किया जा रहा अंधाधुंध जलदोहन एक बड़ी वजह बनकर उभरा है। नियमों के मुताबिक, भूजल निकालने के बदले बारिश के पानी को सहेजने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम (Rain Water Harvesting System) लगाना अनिवार्य है, लेकिन गाजियाबाद की अधिकांश फैक्ट्रियों में यह व्यवस्था सिर्फ कागजों और फाइलों तक ही सीमित है।
साहिबाबाद, लोहा मंडी, कवि नगर और बुलंदशहर रोड इंडस्ट्रियल एरिया की कई फैक्ट्रियों में बिना एनओसी (NOC) के भारी क्षमता वाले सबमर्सिबल पंप चलाकर रोजाना लाखों लीटर पानी निकाला जा रहा है। ग्राउंड वाटर अथॉरिटी के नियमों को ताक पर रखकर फैक्ट्रियों ने कागजी खानापूर्ति के लिए हार्वेस्टिंग गड्ढे तो खोद दिए हैं,
लेकिन वे या तो चोक पड़े हैं या उनमें कचरा भरा है, जिससे बारिश का पानी जमीन के अंदर नहीं जा पाता। स्थानीय निवासियों और पर्यावरणविदों का आरोप है कि भूजल विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) समय-समय पर नोटिस तो जारी करते हैं, लेकिन जमीन पर कोई ठोस सीलिंग या जुर्माने की कार्रवाई नहीं होती। यदि जलदोहन की यही रफ्तार रही, तो गाजियाबाद के कई ब्लॉक पूरी तरह से ‘डार्क ज़ोन’ में तब्दील हो जाएंगे, जिसका सीधा असर आम जनता के पीने के पानी पर पड़ेगा।




























