कच्चा घर लेकिन पक्का इरादा..IAS बने पवन के संघर्ष की कहानी से आप भी हो जायेंगे मोटीवेट

👤 vickynedrick@gmail.com | Nedrick News 🕒 Published: 18 अप्रैल 2024, 12:00 AM 🔄 Updated: 18 अप्रैल 2024, 12:00 AM
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सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। जिसमें गांव का एक मिट्टी का घर और खूंटे से बंधे मवेशी नजर आ रहे हैं। मकान पर छत की जगह तिरपाल लगा हुआ है। यह घर है यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2023 में 239वीं रैंक हासिल करने वाले पवन कुमार का। बुलंदशहर के रहने वाले पावन कुमार ने इतनी गरीबी में पलने के बाद भी कभी उम्मीद नहीं खोई और आईएएस बनने का सपना पूरा किया। उनकी सफलता के बाद उनके परिवार के साथ पूरे गांव में जश्न का माहौल है। पवन ने अपने सपने को पूरा कर अपने माता-पिता को गौरवान्वित किया है। इस सफलता के बाद उनके घर की तस्वीरें वायरल हो रही हैं जो लोगों को प्रेरणा दे रही हैं कि अगर इरादे मजबूत और सच्चे हों तो सफलता जरूर आपके कदम चूमती है।

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पवन कुमार की लाइफ

पवन कुमार का जन्म उत्तर प्रदेश के बुलन्दशहर जिले के एक छोटे से गांव में एक किसान परिवार में हुआ था। उनके पिता मुकेश और मां सुमन मनरेगा मजदूर हैं। सबसे बड़ी बहन गोल्डी और दूसरी बहन सृष्टि दोनों डिग्री हासिल कर रही हैं। सबसे छोटी बहन सोनिया बारहवीं कक्षा में है। पवन ने 2017 में नवोदय स्कूल में इंटरमीडिएट की परीक्षा दी। इसके बाद पवन ने इलाहाबाद में बीए की परीक्षा पास की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली के एक कोचिंग सेंटर में सिविल सर्विसेज की तैयारी शुरू कर दी। कुछ विषयों की कोचिंग ली और वेबसाइट की मदद ली। दो साल तक कोचिंग के बाद उन्होंने ज्यादातर समय सेल्फ स्टडी की। पवन कुमार के परिवार का कहना है कि उन्हें यह सफलता तीसरे प्रयास में मिली है। आपको जानकर हैरानी होगी कि कोचिंग और किताबों का खर्च निकालने के लिए उनके पिता और बहनें मजदूरी किया करती थी। इस सफलता को हासिल करने में उन्हें अपने माता-पिता का पूरा सहयोग मिला है।

बिजली नहीं थी, चूल्हे पर खाना बनता था

पवन ने बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपनी UPSC की तैयारी पूरी की। खबरों के अनुसार, पवन के परिवार के पास बिजली का कनेक्शन है, लेकिन गांव में बिजली आपूर्ति का अभाव है। यूपीएससी में सफल रहे पवन की मां और बहन जंगल से लकड़ी लाकर चूल्हे पर खाना बनाती हैं। पवन के परिवार को उज्ज्वला योजना से गैस सिलेंडर मिला, लेकिन उसे भरवाने के पैसे उनके पास नहीं थे, इसलिए खाना चूल्हे पर ही पकाया जाता है।

मजदूरी के पैसों से दिलवाया सेकेंड हैंड फोन

पवन के पिता ने बताया कि तैयारी के दौरान उसे एंड्रॉइड मोबाइल फोन की जरूरत थी, इसलिए घर के सभी लोग मजदूरी करके पैसे इकट्ठा करते थे। सबकी मेहनत के चलते ही वह 3,200 रुपये का सेकेंड हैंड मोबाइल फोन खरीद पाए। पवन के माता-पिता अपने बेटे की सफलता से बेहद खुश हैं।

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