पंजाब के सांस्कृतिक शहर जालंधर की कहानी

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 11 अप्रैल 2023, 05:30 AM Updated: 11 अप्रैल 2023, 05:30 AM
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Story of Jalandhar – भारत की तीन खास नदियों सतलुज, ब्यास और रावी से समृद्ध पंजाब राज्य के प्रमुख जिलों में से एक है जालंधर. क्या आप जानते हैं कि इस शहर का नाम ‘जालंधर’ कैसे पड़ा? इसके पीछे भी एक इतिहास है. दरअसल, ‘महाभारत’ के समय में, जालंधर (Jalandhar) को ‘प्रथला’ कहा जाता था, जबकि एक और कहानी है कि इसका नाम एक दानव- जलंधर के नाम पर रखा गया था. हालांकि इन दोनों साक्ष्य के अलावा अगर आप इस ‘जालंधर’ शब्द को दो हिस्‍सों में तोड़ते हैं, तो ‘जल’ का अर्थ है ‘पानी’ और ‘अंधेर’ का अर्थ है ‘अंदर’. इस तरह इसका मतलब है कि पानी के अंदर का एक क्षेत्र जो वास्तव में ब्यास और सतलुज नदियों के बीच बसा एक क्षेत्र है.

जालंधर पंजाब का सबसे तेज स्तर पर तरक्की करने वाला शहर है.  जोकि ईस्ट में में लुधियाना, वेस्ट में कपूरथला, नार्थ में होशियारपुर और साउथ  में फिरोजपुर से घिरा हुआ है. वर्तमान में, जालंधर पंजाब का एक लोकप्रिय स्‍थान है जहां पर इंडस्ट्रीज का डेवलपमेंट बहुत तेजी से हो रहा है.

यहाँ शहर खेल की वस्तुओं, लोहे की रोलिंग की मिलें और स्टील, इलेक्ट्रिकल और रबड़ के सामान, ऑटोमोबाइल पार्ट्स, हस्तशिल्प और हथकरघा के लिए भी जाना जाता है इस शहर को जाना जाता है. यह चंडीगढ़ से 146 कि.मी और अमृतसर से 84 कि.मी दूर है. लेकिन अंग्रेजों द्वारा भारत की गुलामी और आजादी से लेकर पंजाब और जालंधर का इतिहास काफी खास रहा है. तो आइए आज हम जालंधर की कुछ खास सासंकृतिक विरासतों के बारे में इस लेख में विस्तार से जानते हैं.

भगत सिंह संग्रहालय (Bhagat Singh Museum)

आजादी के महानायकों में से एक भगत सिंह का यह संग्रहालय भगत सिंह के संस्मरणों की याद दिलाता है. जालंधर से 55 किमी दूर स्थित इस संग्रहालय में आपको भगत सिंह के हाथों से लिखे नोट्स पढ़ने और देखने को मिलेंगे. शहीद-ए-आज़म सरदार भगत सिंह संग्रहालय के रूप में संदर्भित है. इस जगह का उद्घाटन 23 मार्च 1981 में  हुआ था. यह स्वतंत्रता सेनानी के शहीद होने की याद में बनाया गया था जोकि भगत सिंह के पैतृक गांव खट्टर कलियान में स्थित है, जहाँ पर स्वतंत्रता के लिए उनके संघर्ष से जुड़ी कई प्राचीन स्‍मृतियां मौजूद हैं.

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पुष्‍प गुजराल साइंस सिटी- Story of Jalandhar 

इस जगह पर सरकार द्वारा 3डी शो, लेज़र शो और तारामंडल शो दिखाया जाता है. यहां बच्चों के लिए बोटिंग की व्‍यवस्‍था भी की गई है. जालंधर-कपूरथला रोड़ पर स्थित यह स्थान कुल 72 एकड़ में फैला हुआ है. यहां डायनासोर का 18-फुट ऊंचा मॉडल और जीएसएलवी मिसाइल आगंतुको को आकर्षित करता है. इस साइंस सिटी (Story of Jalandhar) में एक कृत्रिम झील भी है जहां पर नौका-विहार का मज़ा ले सकते हैं.

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इमाम नासिर मस्जिद (Imam Nasir Majid)

ये मकबरा लगभग 800 साल पुराना है और इसका नाम भी महान सूफी संत – इमाम नासिर के नाम पर रखा गया है. ये प्राचीन स्मारक में अद्भुत वास्तुकला है और यह जिस ऐतिहासिक प्रासंगिकता को दर्शाती है वह भी काफी आकर्षक है.

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Story of Jalandhar – आप यहाँ मुगल शैली में बने दो स्मारक भी देख सकते हैं. आपको बता दें कि सूफी संत फरीदजी ने 40 दिनों तक इस दरगाह में शरण ली थी जिसकी वजह से इस जगह को मुसलामानों के लिए बहुत ज्‍यादा पवित्र माना जाता है.

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तुलसी मंदिर (Tulsi Mandir)

इस मंदिर में वृंदा की पूजा होती है जो जलंधर की पत्नी थी. ये मंदिर जालंधर शहर के कोट किशन चंद इलाके में स्थित है. ऐसा कहा जाता है कि इसमें एक तालाब था जो राक्षसों के नहाने  का स्थल हुआ करता था. यह मंदिर जालंधर शहर के अस्तित्व में आने से पहले से ही मौजूद था. यहां भक्‍तों द्वारा देवी को आरती, फूल और प्रसाद चढ़ाया जाता है. इस मंदिर के कारण आसपास के मंदिर भी काफी प्रसिद्ध हो गए हैं. इस मंदिर में अन्‍न की देवी अन्नपूर्णा की भी मूर्ति स्थित है.

Tulsi Mandir
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देवी तालाब (Devi Talab)

‘हरबल्लभ संगीत सम्मेलन’ के बारे में तो आपने सुना ही होगा? यह हमेशा दिसंबर के महीने में मंदिर परिसर के भीतर मनाया जाता है. 200 साल पुराना मंदिर रेलवे स्टेशन से सिर्फ 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है इस मंदिर में माँ दुर्गा का वास माना जाता है.

Devi Talab
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हाल ही में इस मंदिर का जीर्णोंद्धार हुआ था जिसकी वजह से यह मंदिर पहले से भी अधिक शानदार (Story of Jalandhar) हो गया है. सबसे खास बात ये है कि  यह मंदिर जम्मू और कश्मीर की अमरनाथ गुफा मंदिर जैसा ही दिखता है.

सैंट. मैरी कैथेड्रल चर्च- Story of Jalandhar 

इस गिरजाघर के जैसी वास्‍तुकला आपको देश भर में कहीं और देखने को नहीं मिलेंगी. इसे पोप जॉन पॉल द्वितीय द्वारा शुरू किया गया था. यह कॉस्मो-सांस्कृतिक गिरजाघर है जो जालंधर छावनी में स्थित है. इसे पंजाबी परंपरा का प्रतीक माना गया है.

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ईसाइयों का यह धार्मिक स्थल 1947 में रेव एफआर. जॉन मैकडॉनेल द्वारा सेंट पैट्रिक की याद में बनाया गया था. इसे पंजाब का मदर चर्च भी कहा जाता है जिसे 1955 में अपोस्टोलिक प्रान्त की श्रेणी में बनाया गया था.

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