Sikhism in Jharkhand: आदिवासी भूमि पर सिखों की दस्तक, सांस्कृतिक विविधता और सेवा का अद्भुत तालमेल

Shikha Mishra | Nedrick News Jharkhand Published: 13 फ़रवरी 2026, 12:08 PM Updated: 13 फ़रवरी 2026, 12:08 PM
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Sikhism in Jharkhand: पंजाब के बंटवारे के बारे में तो आपने कई बार सुना होगा। पहले धर्म के आधार पर और फिर भाषा के आधार पर बंटने वाले पंजाब को सिख धर्म का गढ़ माना जाता है। लेकिन पंजाब के अलावा भी एक राज्य है, जो भाषा या धर्म के आधार पर नहीं बल्कि संस्कृति और संसाधनो के आधार पर बांटा.. और राज्य बना झारखंड…झारखंड जिसका नाम सुनते ही आपके जेहन में सबसे आदिवासियों की ही छवि नजर आती है.. जो कि एक हिंदू बहुल राज्य है, लेकिन बाजवूद इसके सिखों का झारखंड से रिश्तों कई सदी पुराना है।

झारखंड बनने से पहले ये बिहार था, और बिहार के अग्रहरि सिंखों ने हमेशा यहां पर सिख धर्म की शान को बढ़ावा है। एक छोटा सा लेकिन अहम समुदाय माना जाने वाला सिख धर्म झारखंड की मिट्टी का हिस्सा बन चुका है। अपने इस लेख में हम झारखंड में मौजूद सिख धर्म के बारे में जानेंगे, कैसे यहां रहने वाले सिखों का पंजाब की धरती से ज्यादा बिहार की धरती से गहरा रिश्ता है। आइये जानते है कि क्या है झारखंड में सिख धर्म की कहानी.. क्या है इसका ऑरिजिन..और आज स्थिति में है झारखंड में सिख।

झारखंड के बारे में इतिहास – History of Jharkhand

झारखंड 15 नवंबर साल 2000 से पहले बिहार राज्य का हिस्सा था, लेकिन फिर इसे अलग कर दिया गया और ये भारत 15वां सबसे बड़ा राज्य बन गया। झारखंड का मतलब होता है जंगलों की भूमि’। चुंकि आदिवासियों से प्रभावित है इसलिए जंगलो का बहुत महत्व है। झारखंड के पूर्व में पश्चिम बंगाल, पश्चिम में छत्तीसगढ़, उत्तर-पश्चिम में उत्तर प्रदेश, उत्तर में बिहार और दक्षिण में ओडिशा मौजूद है। रांची शहर इसकी राजधानी है, और दुमका इसकी उप-राजधानी है।इसका क्षेत्रफल 79,716  वर्ग किलोमीटर है तो वहीं 2011 के अनुसार इसकी आबादी 32,988,134 है, जो जनसंख्या की दृष्टि से 14वां राज्य है।

वहीं झारखंड भारत का एक ऐसा राज्य है जहां भारत के खनिज उत्पादन का 40% से ज्यादा हिस्सा पाया जाता है, लेकिन बावजूद इसके असाक्षता, संसाधनो की आम लोगो के लिए के कारण इसकी 39.1% आबादी गरीबी रेखा से नीचे है और पाँच साल से कम उम्र के 19.6% बच्चे कुपोषित हैं, सभी संसाधनो के होते हुए भी झारखंड के अमीर राज्य होते हुए भी गरीब होने का कारण समझा जाता है।

झारखंड में सिख धर्म की शुरुआत – Sikhism in Jharkhand

झारखंड बिहार का अहम हिस्सा है, और बंटने से पहले पटना का सिख धर्म से गहरा रिश्ता रहा, उसे अनदेखा नहीं किया जा सकता है। आज झारखंड के कई क्षेत्र जिसमें जमशेदपर टाटानगर, रांची, बोकारो जैसे क्षेत्र है, जहां सबसे ज्यादा रोजगार और व्यापार के रास्ते खुले है, इस कारण सिखो की आबादी यहां बाकि के क्षेत्रों के मुकाबले ज्यादा है। औधोगिक विस्तार और विकास की दिशा में सिखों ने बिहार की धरती के अलग अलग हिस्सों में पांव जमायें। खासकर नौवे गुरु तेगबहादुर जी के आगमन के बाद उनसे प्रभावित होकर सिख धर्म अपनाने वाले लोग बिहारी सिख या फिर अग्रहरि सिख कहलाते है, जो सिख धर्म की परंपरा को मानने के साथ साथ हिंदुओ के पर्व को भी मनाते है।

5 प्रतिशत सिख तो केवल टाटा नगर में

सिख बिहार से लेकर झारखंड तक फैले हुए है। आकड़ो के अनुसार 2011 में 0.22 प्रतिशत सिख रहते है। यानि की 2011 में करीब 71,422 सिख रहा करते थे। वहीं 5 प्रतिशत सिख तो केवल टाटा नगर के शहरी इलाको में ही रहते है। झारखंड में टाटा की बड़ी कंपनियो के होने के कारण देश भर के लोग वहां आकर्शित हुए है, जिसमें पंजाब के सिख भी झारखंड कर काम करते है। कई सिखों की पिछली कई पीढ़ी यहां की धरती की हिस्सा है। वहीं झारखंड एक ऐसा राज्य है जहां सिख आसानी से अपनी जिंदगी को बिना किसी धार्मिक भेदभाव के रह सकते है। पंटना और अग्रहरि सिओं से प्रभावित झारखंड को सिखों के लिए बेहद अहम माना जाता है।

श्री गुरु नानक सत्संघ सभा झारखंड

यहीं कारण है कि अनाधिधारिक तौर पर यहां 100 से भी ज्यादा गुरुद्वारे मौजूद है। जिसमें श्री गुरु नानक शत संघ सभा, हटिया गुरुद्वारा, गुरु द्वारा साहिब, कद्रू गुरुद्वारा जैसे गुरुद्वारे काफी प्रचलित गुरुद्वारे झारखंड में सिक्खी की धूम मचा रहे है। जो शान से खड़े है और सिख इतिहास की कहानी कह रहे है। जिसमें श्री गुरु नानक सत्संघ सभा झारखंड का सबसे पुराना गुरुद्वारा है, जो कि झारखंड की राजधानी रांची में स्थित है। पंजाब के बाद झारखंड एक ऐसा राज्य माना जाता है जहां सिख धर्म के मूल्यों को काफी अहमियत दी जाती है।

यहां रहने वाले सिख प्रथम गुरु गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं को बहुत महत्व देते है। यहां के गुरुद्वारें काफी भव्य और शानदार है। जहां बाकि गुरुद्वारो की तरह संगत, भजन कीर्तन होता है, रोजाना लंगर का आयोजन होता है, गुरु पर्व में  नगर कीर्तन का आयोजन होता है जो बताता है कि सिख धर्म झारखंड में भले ही अल्पसंख्यक समुदाय हो लेकिन बेहद खास धर्म है।

Shikha Mishra

shikha@nedricknews.com

शिखा मिश्रा, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत फोटोग्राफी से की थी, अभी नेड्रिक न्यूज़ में कंटेंट राइटर और रिसर्चर हैं, जहाँ वह ब्रेकिंग न्यूज़ और वेब स्टोरीज़ कवर करती हैं। राजनीति, क्राइम और एंटरटेनमेंट की अच्छी समझ रखने वाली शिखा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और पब्लिक रिलेशन्स की पढ़ाई की है, लेकिन डिजिटल मीडिया के प्रति अपने जुनून के कारण वह पिछले तीन सालों से पत्रकारिता में एक्टिव रूप से जुड़ी हुई हैं।

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