सूतक भी बेअसर! भारत का वो अनोखा मंदिर, जहाँ ग्रहण में भी नहीं बंद होते कपाट | Temple open During Eclipse

Rajni | Nedrick News Ghaziabad Published: 17 जुलाई 2026, 06:06 PM Updated: 17 जुलाई 2026, 06:06 PM
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Temple open During Eclipse: ग्रहण लगते ही जहाँ पौराणिक मान्यताओं के अनुसार देश के सभी मंदिरों के कपाट बंद हो जाते हैं, वहीं इससे ठीक उलट एक ऐसी भी जगह है जहाँ नियमित रूप से भगवान के दर्शन और उनकी पूजा-अर्चना की जाती है। तो चलिए, इस लेख के जरिए जानते हैं इस अनोखे मंदिर के पीछे की अजब-गजब कहानी और इससे जुड़ी बेहद दिलचस्प मान्यताओं के बारे में।

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आपको बता दें कि राजस्थान के सीकर जिले में स्थित भगवान श्री लक्ष्मीनाथ मंदिर एक ऐसा अनोखा धाम है, जहाँ सूर्य या चंद्र ग्रहण के दौरान भी कपाट बंद नहीं होते हैं और भगवान को नियमित रूप से भोग लगाया जाता है। आमतौर पर हिंदू सनातन परंपरा में ग्रहण (सूतक काल) के समय देश के सभी मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं, लेकिन सीकर के इस ऐतिहासिक मंदिर में सदियों से इस नियम से इतर एक विशेष परंपरा का पालन किया जा रहा है।

लक्ष्मीनाथ मंदिर की मान्यताओं से जुड़ी मुख्य बातें

मंदिर प्रशासन और स्थानीय लोगों के अनुसार, ग्रहण के समय भी कपाट खुले रखने और पूजा करने की यह अनूठी परंपरा पिछले 500 से अधिक वर्षों से निरंतर चली आ रही है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर का संबंध उत्तराखंड के प्रसिद्ध श्री बद्रीनाथ धाम से माना जाता है। यही कारण है कि यहाँ के विग्रह (मूर्ति) पर ग्रहण का सूतक नियम प्रभावी नहीं होता।

जहाँ अन्य मंदिरों में ग्रहण के समय सूतक लग जाता है, वहीं यहाँ भगवान लक्ष्मीनाथ को समय पर छप्पन भोग या नियमित नैवेद्य अर्पित किया जाता है और विधि-विधान से आरती भी होती है। ग्रहण काल के दौरान भी देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के द्वार पूरी तरह खुले रहते हैं और लोग बिना किसी रोक-टोक के दर्शन करते हैं।

 सीकर का 1 और ऐसा धाम (Temple open During Eclipse)

सीकर जिले में ही स्थित प्रसिद्ध जीण माता शक्तिपीठ में भी ग्रहण के दौरान कपाट बंद नहीं होते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस पवित्र शक्तिपीठ की रक्षा स्वयं 64 जोगणिया देवियाँ करती हैं। यही कारण है कि यहाँ ग्रहण की कोई भी नकारात्मक ऊर्जा या सूतक का प्रभाव प्रवेश नहीं कर पाता और श्रद्धालु ग्रहण काल में भी माता के दर्शन कर पाते हैं।

सनातन धर्म में आस्था और परंपराओं के कई रंग देखने को मिलते हैं। सीकर के ये दोनों मंदिर इस बात का जीता-जागता उदाहरण हैं कि जहाँ अटूट विश्वास होता है, वहाँ नियम भी भक्ति के रंग में रंग जाते हैं।

Rajni

rajni@nedricknews.com

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