CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत बढ़ी, अब क्राइम ब्रांच करेगी जांच| Jantar Mantar protest case

Nandani | Nedrick News New Delhi Published: 21 अक्टूबर 2026, 01:51 AM Updated: 21 अक्टूबर 2026, 01:51 AM
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Jantar Mantar protest case: राजधानी दिल्ली के चर्चित जंतर-मंतर पर 13 अक्टूबर को हुए विरोध-प्रदर्शन के मामले में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं की कानूनी मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। पार्टी नेता सौरव दास और आशुतोष रांका के खिलाफ दर्ज अतिक्रमण और कानून व्यवस्था से जुड़े मामले की जांच अब दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है। क्राइम ब्रांच की इंटर स्टेट सेल इस पूरे प्रकरण की गहराई से पड़ताल करेगी।

यह बड़ा प्रशासनिक और कानूनी फैसला उस समय सामने आया, जब एक अदालत ने दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ाने के आदेश दिए।

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दो थानों में दर्ज हुई थीं गंभीर धाराओं में एफआईआर| Jantar Mantar protest case

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर दिल्ली पुलिस ने दो अलग-अलग थानों में मामले दर्ज किए थे। इनमें सरकारी काम में रुकावट डालने, जबरन परिसर में घुसने और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों से उलझने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं:

  1. कनॉट प्लेस थाना: यहां दर्ज प्राथमिकी में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223A, 332 और 61(2) लगाई गई हैं। ये धाराएं मुख्य रूप से सरकारी आदेशों की अवहेलना करने, किसी अपराध को अंजाम देने के मकसद से किसी परिसर या संपत्ति में जबरन घुसने और आपराधिक साजिश रचने से संबंधित हैं।
  2. संसद मार्ग थाना: यहां दर्ज दूसरी प्राथमिकी में BNS की धारा 221, 115(2), 132, 121(1) और 3(5) शामिल की गई हैं। यह धाराएं ऑन-ड्यूटी सरकारी कर्मचारी के काम में रुकावट डालने, मारपीट या चोट पहुंचाने, ड्यूटी से रोकने के लिए बल प्रयोग करने और साझा इरादे (कॉमन इंटेंशन) से उपद्रव करने पर लगाई जाती हैं।

क्या था 13 अक्टूबर का पूरा विवाद?

पुलिस के अनुसार, 13 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ता और नेता जंतर-मंतर इलाके में विरोध दर्ज कराने पहुंचे थे। इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई और तिरंगा फहराया गया। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारी एक निजी परिसर के रास्ते जंतर-मंतर में दाखिल होने की कोशिश कर रहे थे, जबकि इस जगह को प्रदर्शन से ठीक एक दिन पहले ही नोटिफाइड धरना स्थलों की सूची से बाहर कर दिया गया था। पुलिस का कहना है कि जब उन्हें रोका गया, तो प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाकर्मियों को अपनी ड्यूटी करने से रोका और धक्का-मुक्की की।

हिरासत में बढ़ोतरी और तीसरे साथी को मुचलके पर राहत

घटना के अगले ही दिन यानी 14 अक्टूबर को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने सौरव दास और आशुतोष रांका को न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। इसके बाद सोमवार को मंदिर मार्ग थाने में नवनियुक्त विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने दोनों की दोबारा पेशी हुई, जहां से उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए और बढ़ा दी गई।

वहीं, मामले से जुड़े CJP के एक अन्य सदस्य अजिंक्य शिंदे को लेकर भी आदेश जारी किया गया है। उन्हें 5,000 रुपये के मुचलके और जमानत राशि पर इस शर्त के साथ छोड़ा गया कि वे पीस बॉन्ड (शांति पत्र) पर हस्ताक्षर करेंगे और अगले छह महीने तक शांति व अच्छा आचरण बनाए रखेंगे। अब चूंकि इस केस की कमान सीधे क्राइम ब्रांच की इंटर स्टेट सेल के हाथों में है, इसलिए आने वाले दिनों में जांच का दायरा और बढ़ सकता है।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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