Shammi Kapoor struggle story: कपूर खानदान का नाम हिंदी सिनेमा के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसी कपूर खानदान का एक ऐसा चश्मा-ओ-चिराग भी था, जिसने एक या दो नहीं, बल्कि लगातार 18 फ्लॉप फिल्में दीं! वैसे तो बॉलीवुड में अक्सर नेपोटिज्म या फिल्मी परिवारों के बच्चों को मिलने वाले ‘लॉन्चपैड’ की चर्चा होती है, लेकिन इस परिवार का हिस्सा होने मात्र से सफलता की गारंटी नहीं मिलती। इसका सबसे बड़ा एग्जांपल हैं एक्टर शम्मी कपूर।
पृथ्वीराज कपूर के बेटे और राज कपूर के भाई होने के बावजूद, उन्हें इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने के लिए कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। हालत यहाँ तक पहुँच गई थी कि वे इंडस्ट्री छोड़ने वाले थे। पर फिर उन्होंने अपना लुक बदला, पुरानी बंदिशों को तोड़ा और बन गए बॉलीवुड के पहले ‘रिबेल स्टार’। आइए जानते हैं उनके स्ट्रगल से ‘याहू’ स्टार बनने की पूरी कहानी…
और पढ़ें: इस हफ्ते रिलीज होंगी 1-2 नहीं, पूरी 8 फिल्में! जानें कौन सी हैं ये Upcoming movies
कैसे की करियर की शुरुआत
वैसे तो शम्मी कपूर फिल्मी बैकग्राउंड से थे, लेकिन उन्हें कोई भी चीज थाली में सजी हुई नहीं मिली। साल 1948 में उन्होंने अपने पिता की थिएटर कंपनी ‘पृथ्वी थिएटर्स’ में एक जूनियर आर्टिस्ट के तौर पर काम शुरू किया। आपको जानकर हैरानी होगी कि उस समय उन्हें इसके लिए हर महीने सिर्फ 50 रुपये सैलरी मिलती थी। उन्होंने करीब चार साल तक यहाँ रहकर एक्टिंग की बारीकियां सीखीं।
एक के बाद एक फिल्में हुई फ्लॉप
साल 1953 में शम्मी कपूर ने फिल्म ‘जीवन ज्योति’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया। इसके बाद 1953 से 1957 के बीच उन्होंने ‘लैला मजनू’ और ‘मिर्जा साहिबान’ जैसी कई फिल्मों में काम किया। लेकिन किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया। उनकी एक के बाद एक लगातार 18 फिल्में बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप हो गईं। उस दौर में वे मधुबाला, नूतन और सुरैया जैसी बड़ी एक्ट्रेसेस के साथ काम तो कर रहे थे, लेकिन फिल्में वीमेन-ओरिएंटेड थीं, जिसकी वजह से शम्मी कपूर को अपनी पहचान बनाने का मौका ही नहीं मिल पा रहा था। इंडस्ट्री में उन पर ‘फ्लॉप एक्टर’ का टैग लग चुका था और वे पूरी तरह निराश हो चुके थे।
फिर लिया बड़ा रिस्क!
उस दौर में दिलीप कुमार, देव आनंद और राज कपूर जैसे बड़े स्टार्स का बोलबाला था, जो गंभीर या सीधे-साधे रोमांटिक किरदारों के लिए जाने जाते थे। शम्मी कपूर को समझ आ गया था कि अगर उन्हें इस रेस में बने रहना है, तो लीक से हटकर कुछ करना होगा। और फिर उन्होंने एक बहुत बड़ा रिस्क लिया! उन्होंने अपनी मूंछें पूरी तरह साफ करवा दीं, बाल कटवाए और अपना पूरा लुक बदल डाला। उन्होंने हॉलीवुड के रॉक एंड रोल स्टार एल्विस प्रेस्ली से इंस्पिरेशन ली और अपना एक नया, कूल और बिंदास अवतार तैयार किया, जो उस जमाने के हीरोज से बिल्कुल अलग था।
Shammi Kapoor के करियर का टर्निंग पॉइंट
साल 1957 में आई फिल्म ‘तुमसा नहीं देखा’ शम्मी कपूर के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई। इस फिल्म में दर्शकों को एक नया शम्मी कपूर देखने को मिला—जो बेबाक था, थोड़ा पागलपन से भरा था और जिसके डांस करने का अंदाज बिल्कुल अनोखा था। इसके बाद साल 1961 में आई फिल्म ‘जंगली’ ने उन्हें कामयाबी के शिखर पर पहुंचा दिया। इस फिल्म के गाने में जब उन्होंने बर्फ पर लोटते हुए “याहू!” चिल्लाया, तो पूरे देश के युवा उनके दीवाने हो गए।
बॉलीवुड का रिबेल स्टार
सीधे-साधे और शांत हीरोज के उस दौर में, शम्मी कपूर ने अपनी इस नई, एनर्जी से भरपूर और बेबाक इमेज के कारण मुख्य अभिनेता (Hero) की परिभाषा को हमेशा के लिए बदल दिया। इसी बगावती और लीक से हटकर अपनाए गए अंदाज की वजह से उन्हें बॉलीवुड का ‘रिबेल स्टार’ (Rebel Star) कहा गया। इसके बाद उन्होंने ‘तीसरी मंजिल’, ‘कश्मीर की कली’ और ‘एन इवनिंग इन पेरिस’ जैसी कई ब्लॉकबस्टर फिल्में देकर दशकों तक राज किया।
तो, यह थी शम्मी कपूर की कहानी, जो हमें सिखाती है कि अगर आपके अंदर टैलेंट है और आप सही वक्त पर खुद को बदलने और रिस्क लेने की हिम्मत रखते हैं, तो सफलता मिलकर ही रहती है। आपको शम्मी कपूर की कौन सी फिल्म या गाना सबसे ज्यादा पसंद है? हमें कमेंट करके जरूर बताएं।














































