Bhagwat on regime change: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने अपने ऐतिहासिक शताब्दी वर्ष के मौके पर नागपुर के रेशमीबाग में पारंपरिक विजयादशमी उत्सव और शस्त्र पूजन कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया। साल 1925 में विजयदशमी के दिन ही डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने नागपुर में संघ की नींव रखी थी। 100वें साल के इस खास पड़ाव पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने शस्त्र पूजा से पहले स्मृति मंदिर जाकर डॉ. हेडगेवार की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद स्वयंसेवकों और देश को संबोधित करते हुए भागवत ने देश की एकता, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), पश्चिमी देशों में चल रहे उथल-पुथल, रिजीम चेंज की साजिशों, युवाओं में नशे की लत और ओटीटी कंटेंट पर विस्तार से अपनी बात रखी।
‘पश्चिम से चली आंधी व्यवस्था नष्ट करना चाहती है’| Bhagwat on regime change
आरएसएस प्रमुख ने अपने भाषण में फ्रांस में हो रहे हिंसक प्रदर्शनों, अल्बानिया के हालात और नेपाल व बांग्लादेश के हालिया घटनाक्रमों का हवाला देते हुए एक वैश्विक खतरे की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा, “पश्चिम से एक ऐसी आंधी चली है जो हर तरह की भद्रता, सामाजिक व्यवस्था और संस्कारों का विरोध करती है और उन्हें खत्म करना चाहती है। वे दावा करते हैं कि ‘रिजीम चेंज’ (सत्ता परिवर्तन) से हालात बदल जाएंगे। लेकिन इतिहास गवाह है कि ऐसा कभी नहीं हुआ न पहले हुआ था, और न आज होगा।”
भागवत ने साफ तौर पर चेताया कि अगर कोई आंदोलन अपनेपन और सुधार की भावना से न चलकर किसी छिपे एजेंडे या दुर्भावना से चलता है, तो वह केवल राजनीति का औजार बनकर रह जाता है। ऐसे आंदोलनों से भारत विरोधी ताकतों को देश को कमजोर करने का मौका मिल जाता है।
राज नारायण बसु और संत रविदास का स्मरण
संघ प्रमुख ने बंगाल के चिंतक राज नारायण बसु की 200वीं जयंती का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने स्वदेशी मेलों और ‘हिंदू मेले’ की शुरुआत करके समाज को अपनी मूल पहचान के प्रति जागरूक किया था। इसके साथ ही उन्होंने संत रविदास के योगदान को याद करते हुए कहा कि जब देश पर विदेशी आक्रमणकारियों के बर्बर हमले हो रहे थे और हर तरफ डर व हताशा का माहौल था, तब संत रविदास ने स्वधर्म, सामाजिक समरसता और भक्ति का संदेश देकर पूरे समाज को ढांढस बंधाया और लोगों का मनोबल ऊंचा किया।
भागवत ने कहा कि संघ बीते 100 सालों से भारत को उसकी अपनी संस्कृति और परंपराओं के आधार पर एकजुट करने में जुटा है। शताब्दी वर्ष में संघ जिन पांच बड़े बदलावों पर जोर दे रहा है, उनमें अपनी पहचान का बोध होना और स्वदेशी जीवनशैली को अपनाना सबसे अहम है।
विविधता ही भारत का सत्य, ड्रग्स और OTT पर जताई चिंता
देश की विविधता पर बात करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि भारत में अलग-अलग पंथ, भाषाएं, जातियां, प्रांत और खान-पान होना बिल्कुल स्वाभाविक है। विविधता प्रकृति का नियम है, लेकिन इन सबके बीच भारत की एकता का सत्य अटल, शाश्वत और कभी न बदलने वाला है।
उन्होंने युवाओं में बढ़ती नशीली दवाओं (ड्रग्स) की लत पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने माता-पिता और अभिभावकों से अपील की कि वे आने वाली पीढ़ी को सही और गलत का फर्क समझाएं और उनमें मजबूत संस्कार डालें। भागवत ने कहा कि नई पीढ़ी नई चीजों और तकनीकों को सीखने के लिए उत्सुक रहती है, लेकिन समझ की कमी के कारण वे भटक जाते हैं। इसके साथ ही उन्होंने ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म्स और डिजिटल मीडिया पर कंटेंट के अनुशासन व नियमों को लेकर सरकार से बातचीत करने की बात भी कही, ताकि समाज और पारिवारिक ताने-बाने पर बुरा असर न पड़े।
विजयादशमी के इस मौके पर संघ की परंपरा के मुताबिक देशभर में स्वयंसेवकों ने भव्य पथ संचलन निकाला, जो संगठन के अनुशासन और जमीनी ताकत को दर्शाता है।














































