क्या बदला जा रहा है पंजाब का गौरवशाली इतिहास? पाठ्यपुस्तकों में त्रुटियों को लेकर मचा बवाल – Punjab History

Shikha Mishra | Nedrick News Ghaziabad Published: 14 May 2026, 07:43 AM | Updated: 14 May 2026, 07:43 AM

Punjab History:  जब आप भारत के इतिहास के बारे में पढ़ते है तो आपको समझ आयेगा कि जब भी भारत पर कोई बाहरी आक्रमण हुआ तब उसका द्वारा पंजाब ही रहा था, हालांकि सिख धर्म के आने के बाद और सिख शासन स्थापित करने के बाद पंजाब की न केवल सीमा मजबूत की गई बल्कि दुश्मनों के हमले भी रूके। महाराजा रणजीत सिंह ने अपनी खालसा सेना के साथ मिलकर दुश्मनों के न केवल छक्के छुड़ाए बल्कि पंजाब को एक अभेद किला भी बनाया .. सिखों का इतिहास इतना गौरवपूर्ण औऱ शक्तिशाली है कि उसकी जितनी गाथा गाई जायें वो कम ही होगी, लेकिन फिर भी हमारे महान इतिहास के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश करने वालों की भी कमी नहीं है।

बच्चो को स्कूलो में सिखों का, पंजाब का ऐसा इतिहास पढ़ाया जा रहा था जो पूरी तरह से विवादित था, जिसने सिखो गुरुओ की छवि को खराब करने की कोशिश की.. और उसके ही कारण पंजाब में कई सालों तक हंगामा किया गया था। अपने इस लेख में बात करेंगे कि पंजाब में इतिहास को लेकर मचे हंगामें के पीछे की असली वजह क्या है।

पंजाब के छात्रों को बरगलाने की कोशिश – Punjab History

दरअसल साल 2017 में जब पंजाब में कांग्रेस और अकाली दल की मिली जुली सरकार थी, और कांग्रेसी नेता अमरिंदर सिंह मुख्यमंत्री बने थे। हालांकि ये बताने की जरूरत नहीं है कि उन दिनो पंजाब में नशे का खेल किस चरम पर था.. बच्चों को किताबो के जगह जहरीला नशा पकड़ाया जाता था, ताकि बच्चे शिक्षा से दूर होकर नशे के गुलाम बने रहे. ये हालात पंजाब के लिए सबसे ज्यादा चिंताजनक थी… लेकिन जहां नशे से लड़ना सबसे बड़ी चुनौती थी, ऐसे में एक ऐसी व्यवस्था भी थी जिसकी अनदेखी की गई.. जिसने पंजाब के छात्रों को बरगलाने औऱ सिख धर्म औऱ सिख गुरुओं के प्रति नफरत और हीनभावना डालने की साजिश की थी।

दरअसल पंजाब की सरकारी स्कूलों  में इतिहास के तौर पर सिख धर्म और सिखों गुरुओं के इतिहास को पढ़ाना अनिवार्य है ताकि बच्चों को सिख धर्म की परंपरा, संस्कृति, सिख गुरुओ की महानता और उनकी कुर्बानियों के बारे में पता चले.. उन्हें पता चले कि कैसे सिख गुरुओ ने मानवता की सेवा के लिए, धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राणों की बाजी लगा दी.. कैसे उन्होंने अपनी आँखो से सामने अपनी पूरी पीढ़ी को खत्म होते देखा लेकिन गुरु के मार्ग को नहीं छोड़ा.. इन शिक्षाओं के माध्यम से ये सुनिश्चित किया जाता है कि सिख कभी सिक्खी की राह से न भटके.. वो सदैव सिख धर्म के नियमों का पालन करें.. लेकिन 12 कक्षा में जब बच्चों को सबसे ज्यादा धर्म की समझ होती है, ऐसे में उन्हें बरगलाने के लिए कई ऐसी इतिहास की किताबें पढ़ाई जा रही थी, जिसमें न केवल सिखो की छवि को कमजोर किया बल्कि सिख गुरुओ की भी अवहेलना की।

क्या कहा गया सिख गुरु के बारे में – Punjab History

दरअसल 2017 में ही पहली बार ये बात उठाई गई थी कि ‘मॉडर्न एबीसी ऑफ हिस्ट्री ऑफ पंजाब’, ‘हिस्ट्री ऑफ पंजाब’ और ‘हिस्ट्री ऑफ पंजाब’ नाम की तीन किताबों में पंजाब और सिखों के इतिहास के साथ बलंडर छेड़छाड़ की गई है। इतना ही नहीं ये भी कहा गया कि लेखको ने जानबूझ कर ऐसे तथ्यों को लिखा है जिसमें कोई सच्चाई नहीं है लेकिन कोई और किताब न होने के कारण इन किताबों से बच्चो को पढ़ाया जा रहा था।

सिख इतिहास के अनुसार छठे गुरु हरगोबिंद सिंह जी ने पहली बार शस्त्र और शास्त्र दोनो का सहारा लेकर दुश्मनों के छक्के छुड़ाने का फैसला किया। उन्होंने एक ऐसी फौज तैयार की जो तलवार चलाने में पारंगत हो.. ये ऐलान था कि सिख अब केवल बातों से नहीं बल्कि तलवार से भी जवाब देना जानते है। उन्होंने मीरी पीरी का संदेश दिया। जो  सांसारिक सत्ता और आध्यात्मिक शक्ति को एक साथ धारण करके चलने की सीख देते थे। लेकिन इन इतिहासकारो ने किताबों में लिखा कि गुरु साहिब ने खुद तलवार नहीं उठाई थी, बल्कि उन्होंने मुगल फौज में नौकरी की थी और उन्हें जट्टों के अत्याचार से तंग आकर तलवार उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा था।

सिखों की छवि को खराब करने की कोशिश – Punjab History

जबकि हम सभी जानते है कि सिखों और मुगलो का हमेशा से छत्तीस का आकड़ा रहा है तो सवाल ये है कि आखिर किस आधार पर गुरु साहिब को मुगल सैनिक कहा गया था औऱ अगर ये सच भी होता तो फिर गुरु साहिब ने मीरी पीरी का संदेश क्यों दिया। सिखों की छवि को खराब करने की ये पहली कोशिश नहीं थी, किताब में कई ऐसे मौको पर उन्हें स्वार्थी, मौका परस्त कहा गया, जबकि सिखों की सेवा भावना दुनिया में प्रचलित है। साल 2022 में भारी विरोध के बाद इन किताब को हमेशा के लिए बैन कर दिया गया लेकिन हैरानी की बात तो ये है कि कोई किताब पंजाब के इतिहास से, सिखो के इतिहास से खिलवाड़ कर रही है लेकिन ये किताबें सालों से पढ़ाई जा रही है। क्या किसी का ध्यान पहले इस ओर नहीं गया।

श्री गुरु ग्रंथ साहिब की अवहेलना बर्दाश्त नहीं – Punjab History

2026 से पंजाब सरकार खुद किताबों की छेड़ छाड़ को रोकने के लिए चेक करके वितरित कर रही है। ताकि प्राइवेट किताबों को शिक्षा प्रणाली से दूर रखा जायें। सिख हमेशा से इस बात के लिए प्रतिबद्ध है कि किसी भी हाल में सिख गुरुओं की, पवित्र श्री गुरु ग्रंथ साहिब की अवहेलना बर्दाश्त नहीं की जायेगी.. चाहे उसके लिए छवि खराब करने वालो के खिलाफ सख्त कार्यवाई ही क्यों न करनी पड़े। अब देखना ये होगा कि भगवंत मान की सरकार पंजाब की शिक्षा व्यवस्था को कितनी सटीक कर पाती है औऱ सिखो के इतिहास, उनकी धरोहरो को कितना संरक्षित कर पाती है।

Shikha Mishra

shikha@nedricknews.com

शिखा मिश्रा, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत फोटोग्राफी से की थी, अभी नेड्रिक न्यूज़ में कंटेंट राइटर और रिसर्चर हैं, जहाँ वह ब्रेकिंग न्यूज़ और वेब स्टोरीज़ कवर करती हैं। राजनीति, क्राइम और एंटरटेनमेंट की अच्छी समझ रखने वाली शिखा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और पब्लिक रिलेशन्स की पढ़ाई की है, लेकिन डिजिटल मीडिया के प्रति अपने जुनून के कारण वह पिछले तीन सालों से पत्रकारिता में एक्टिव रूप से जुड़ी हुई हैं।

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