Pargat Singh: साल 1985 का था, ऑस्ट्रेलिया के पर्थ शहर में भारत और जर्मनी के बीच हॉकी का एक ऐतिहासिक खेल रहा था। 6 मिनट बाकी थे और स्कोर था भारत 1 और जर्मनी 5.. किसी को उम्मीद नहीं थी कि भारत यहां से वापसी कर सकती है,. लेकिन तभी 20 साल के एक डिफेंडर ने मात्र 6 में वो कर दिखाया, जिसने उन्हें केवल भारत का ही नहीं बल्कि दुनिया के बेहतर डिफेंडर में से एक बना दिया। ये शख्स थे वर्तमान में जालंधर कैंट से कांग्रेस विधायक परगट सिंह।
प्रगट सिंह ने मैदान पर हॉकी स्टीक से मोर्चा संभाला, औऱ मात्र 6 मिनट में एक के बाद एक 4 गोल दागे, जिससे स्कोर हो गया 5-5.. एक करारी शिकस्त को परगट सिंह के तेज तर्रार खेल ने ड्रॉ मैच बना दिया. लेकिन. भले ही भारत से मैच जीत नहीं सका था मगर परगट सिंह को दुनिया ने पहचान लिया था। और वो पहचान आज भी बरकरार है, खेल के मैदान को छोड़ा तो उतर गए राजनीति के मैदान में.. और विपक्षियों को ऐसी पटखनी दी कि प्रतिद्वंदि चारों खाने चित्त हो गए.. परगट सिंह का हॉकी में जो योगदान दिया है, उससे नाम स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जायेगा। अपने इस लेख में हम बात करेंगे पंजाब में कांग्रेस को मजबूत करने वाले और भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान विधायक परगट सिंह के बारे में।
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5 मार्च 1965 को पंजाब के जालंधर के मीठापुर गांव में जन्में परगट सिंह ने अपने खेल के जरिये बताया कि आखिर क्यों पंजाब खिलाड़ियों का राज्य कहलाता है। उनके पिता का नाम गुरदेव सिंह पोवार था औऱ माता का नाम नसीब कौर था। स्कूल में ही हॉकी में रूचि रखने वाले परगट सिंह 5 फीट 11 इंच के है, उनकी हाइट के कारण हॉकी टीम में उन्हें जल्द जगह मिल गई। उन्होंने लायलपुर खालसा कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की थी।
उन्होंने जब भारत के लिए हॉकी खेलना शुरु किया था, तब भारत की स्थिति हॉकी को लेकर उतनी बेहतर नही थी.. भारत में हमेशा से ही क्रिकेट का क्रेज रहा था, लेकिन परगट सिंह ने भारत का राष्ट्रीय खेल चुना..औऱ 1983 में अंतरराष्ट्रीय हॉकी में डेब्यू किया और हांगकांग के खिलाफ हॉकी खेला था। 1986 में पर्थ में जो धमाकेदार उन्हें हॉकी स्टिक का दम दिखाया था, वो उन्होंने 1986 में भी बरकरार रखा था और कराची के मैदान पर नीदरलैंड के खिलाफ विजय गोल दागे और नीदरलैंड को 3-2 से हराया.. परगट सिंह का विजयी रथ आगे बढ़ता गया और उन्होंने भारतीय हॉकी को एक बड़ी उपलब्धि दी थी।
जिसके लिए 1989 में परगट सिंह को अर्जुन पुरुस्कार से सम्मानित किया गया था, जो कि खेलों में एक विशेष पुरुस्कार है। उन्होंने अपना खेल जारी रखा, जिसकी बदौलत 1992 में बार्सिलोना ओलंपिक के दौरान वो भारतीय पुरुष हॉकी टीम के कप्तान चुने गए.. और बतौर कप्तान ही उन्होंने 1996 में अटलांटा ओलंपिक में अपना खेल दिखाया था। इस ओलंपिक के बाद उन्होंने अंतराष्ट्रीय ओलंपिक से सन्यास ले लिया था। जिसके बाद जोहर बाबरू क्लब के लिए खेलने के लिए मलेशिया चले गए। 1998 में भारतीय हॉकी को एक बड़े मुकाम तक पहुंचाने के लिए उन्हें भारत सरकार ने पद्म श्री पुरुस्कार से सम्मानित किया था।
वहीं इसी साल उन्हें भारतीय हॉकी टीम का राष्ट्रीय कोच नियुक्त किया गया था। जिसके बाद 2005 में पंजाब का खेल निदेशक नियुक्त किया गया था। परगट सिंह को उनके फीजिक और फिटनेस के कारण खेल कोटा से ही 1990 के दशक के शुरुआत में एसपी पद दिया गया था और वो राजनीति में आने से पहले इस पद पर बने हुए थे। 2003 में परगट सिंह जालंधर की सुरजीत सिंह मेमोरियल हॉकी टूर्नामेंट सोसाइटी के उपाध्यक्ष चुने गए थे। 2012 में शिरोमणी अकाली दल से जालंधर छावनी विधानसभा क्षेत्र के लिए उम्मीदवार घोषित किया गया था औऱ उन्होंने राजनीति में आते ही अपना दम दिखाना शुरु कर दिया और कांग्रेस के जगबीर सिंह बराड़ को उन्होंने शिकस्त देकर जीत हासिल की.. और वो पंजाब विधानसभा के सदस्य बने थे।
लेकिन 2016 में परगट सिंह को शिरोमणि अकाली दल से निलंबित कर दिया गया, उनपर आरोप लगे कि उन्होंने विकास कार्यों और सॉलिड वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट जैसे मुद्दों पर शिअद के शीर्ष नेताओं और उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बाद पर संगीन आरोप लगाये थे, उन्होंने कहा था कि शिअद के अंदर तानाशाही होती है, जिसके कारण शिअद ने परगट सिंह पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने और उनका अपमान करने का आरोप लगा कर पार्टी सेही बाहर का रास्ता दिखा दिया थ। परगट सिंह ने भी झुकने के बजाय खुद ही प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिय था।
जिसके बाद उन्होंने पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू और बैंस बंधुओं के साथ खुद को एकजुट किया औऱ एक नई राजनीतिक मंच आवाज ए पंजाब की नींव रखी थी। इसी साल 28 नवूंबर 2016 को उन्होंने औपचारिक रूप से दिल्ली में कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ले ली थी, जिसके बाद 2017 में फिर से जालंधर कैंट निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस विधायक चुने गए, और वर्तमान में भी वो वहीं से विधायक है। 2022 में आप की बहुमत के बाद भी उनकी सीट को कोई फर्क नहीं पड़ा जो उनकी लोकप्रियता की कहानी बताती है। जनता के बीच उनकी अहमियत बताती है। परगट सिंह ने न केवल हॉकी से देश का नाम रोशन किया बल्कि उन्होंने राजनीति में आकर जालंधर कैंट को एक नए आयाम तक पहुंचाया। ये कहानी है भारत के पूर्व हॉकी खिलाड़ी प्रगट सिंह की।
































