Panchayat Patis New Law: महिला प्रधानों की जगह ‘सरपंच पति’ का शासन खत्म होगा, केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाए

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 27 फ़रवरी 2025, 05:30 AM Updated: 27 फ़रवरी 2025, 05:30 AM
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Panchayat Patis New Law: गांवों की प्रशासनिक व्यवस्था को सुधारने के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अक्सर देखा जाता है कि जिन पंचायतों में महिलाएं निर्वाचित होती हैं, वहां उनके पति या अन्य पुरुष रिश्तेदार वास्तविक रूप से सत्ता चलाते हैं। यह प्रथा ‘सरपंच पति’, ‘मुखिया पति’ या ‘प्रधान पति’ के नाम से जानी जाती है। अब इस प्रथा को खत्म करने के लिए केंद्र सरकार के पंचायती राज मंत्रालय (MoPR) की सलाहकार समिति ने सख्त दंडात्मक कार्रवाई की सिफारिश की है।

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सरपंच पति की प्रथा पर रोक लगाने के लिए सुझाव– Panchayat Patis New Law

सरकार की ओर से गठित इस समिति ने सिफारिश की है कि यदि किसी मामले में यह साबित होता है कि निर्वाचित महिला के स्थान पर उसका पति या कोई अन्य पुरुष रिश्तेदार शासन चला रहा है, तो कड़ी सजा दी जानी चाहिए। इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए एक मजबूत निगरानी तंत्र की जरूरत है। इसके तहत:

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  • गुप्त शिकायतों को दर्ज करने के लिए हेल्पलाइन और महिला निगरानी समितियां बनाई जाएंगी।
  • इस प्रथा की सूचना देने वाले को पुरस्कार दिए जाने की भी सिफारिश की गई है।
  • पंचायत प्रतिनिधियों को अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद लिया गया फैसला

यह रिपोर्ट पंचायती राज मंत्रालय के सचिव को हाल ही में सौंपी गई है। रिपोर्ट में महिला पंचायत प्रतिनिधियों को सशक्त बनाने और प्रॉक्सी शासन को रोकने के लिए कई सुझाव शामिल किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2023 में इस प्रथा पर चिंता व्यक्त करते हुए कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे, जिसके बाद सितंबर 2023 में यह समिति गठित की गई थी। इस रिपोर्ट को तैयार करने के लिए देश के 14 राज्यों में व्यापक स्तर पर वर्कशॉप आयोजित किए गए और राज्य सरकारों के साथ गहन चर्चा की गई।

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महिला सशक्तिकरण के लिए अन्य अहम सुझाव

महिला पंचायत प्रतिनिधियों को प्रभावी भूमिका में लाने के लिए निम्नलिखित उपाय सुझाए गए हैं:

  • कुछ पंचायत और वार्ड समितियों में महिलाओं के लिए विशेष आरक्षण (केरल मॉडल की तर्ज पर)।
  • महिला प्रतिनिधियों के कार्यों की निगरानी के लिए विशेष अधिकारी (ओम्बड्समैन) की नियुक्ति।
  • महिला पंचायत प्रतिनिधियों का एक स्वतंत्र संघ बनाया जाए, ताकि वे सामूहिक रूप से अपने अधिकारों की रक्षा कर सकें।
  • पंचायतों की बैठकों में महिलाओं के लिए जेंडर-संवेदनशील बजट की व्यवस्था।

तकनीक के उपयोग से पंचायतों को बनाया जाएगा अधिक पारदर्शी

महिला नेतृत्व को और मजबूत करने के लिए तकनीक का इस्तेमाल भी बढ़ाया जाएगा:

  • पंचायत प्रतिनिधियों को ट्रेनिंग देने के लिए वर्चुअल रियलिटी (VR) तकनीक का उपयोग।
  • AI-आधारित कानूनी और प्रशासनिक मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा, जिसे वे अपनी स्थानीय भाषा में समझ सकें।
  • पंचायत प्रतिनिधियों के लिए विशेष व्हाट्सएप ग्रुप बनाए जाएंगे, जिससे वे ब्लॉक और जिला स्तर के अधिकारियों से जुड़ सकें और प्रशासनिक कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभा सकें।
  • पंचायत निर्णय पोर्टल को और अधिक पारदर्शी बनाया जाएगा, ताकि जनता यह देख सके कि निर्वाचित प्रतिनिधि बैठकों और निर्णय-प्रक्रिया में हिस्सा ले रहे हैं या नहीं।

महिला नेतृत्व को मजबूत करने की जरूरत

भारत में 73वें संविधान संशोधन (1992) के तहत पंचायतों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित की गई थीं, लेकिन 21 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों ने इस आरक्षण को बढ़ाकर 50% तक कर दिया है। वर्तमान में देशभर की 2.63 लाख पंचायतों में 32.29 लाख निर्वाचित प्रतिनिधि कार्यरत हैं, जिनमें लगभग 47% (15.03 लाख) महिलाएं शामिल हैं। हालांकि, अभी भी कई पंचायतों में असल सत्ता उनके पुरुष रिश्तेदारों के हाथ में रहती है, जिसे रोकने की जरूरत है।

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