कागजों में चमचमाते कॉलेज हकीकत से कोसों दूर! 10 साल से खेत में चल रहा था पूरा कैंपस | MP BEd College Scam

Rajni | Nedrick News Madhya Pradesh Published: 13 जुलाई 2026, 07:01 PM Updated: 13 जुलाई 2026, 07:01 PM
Google News
Follow Us on Google News
Prefer Nedrick News
on Google

MP BEd College Scam: मध्य प्रदेश में नर्सिंग घोटाले के बाद अब एक और बड़ा महाघोटाला! शिक्षा व्यवस्था का एक और खौफनाक सच। कागजों में चमचमाते कॉलेज, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। यहां महज एक हलफनामे पर 125 फर्जी कॉलेजों को हरी झंडी दे दी गई। बिना क्लासरूम, बिना बिल्डिंग और बिना टीचर के डिग्रियां बांटी जा रही हैं! एमपी के बीएड कॉलेजों का यह खेल जानकर आप हैरान रह जाएंगे। तो चलिए इस लेख के जरिए जानते हैं खेतों में चल रहे इन कॉलेजों की जमीनी हकीकत

और पढ़ें: राजनगर एक्सटेंशन कांड से लेकर टिकैत के आंदोलन की चेतावनी तक! | Top 5 Ghaziabad News

क्या है पूरा मामला?

NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, भोपाल के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (BU) ने गंभीर कमियों और फर्जीवाड़े को नजरअंदाज करते हुए, महज एक नोटरी हलफनामे (Affidavit) के आधार पर 125 निजी बीएड कॉलेजों को नए सत्र की प्रवेश प्रक्रिया के लिए हरी झंडी दे दी है।

इस घोटाले की जमीनी पड़ताल में जो सच सामने आया, वह बेहद चौंकाने वाला है। उदाहरण के लिए, विदिशा रोड पर स्थित ‘श्रीराम कॉलेज ऑफ एजुकेशन’ नामक संस्थान सरकारी रिकॉर्ड में पिछले 10 साल से चल रहा है और हर साल डिग्रियां भी बांट रहा है। लेकिन हकीकत यह है कि उस पते पर कॉलेज की जगह सिर्फ एक खाली खेत है, और स्थानीय लोग भी ऐसे किसी कॉलेज के नाम तक से अनजान हैं।

कागजों पर सैकड़ों छात्रों का प्रवेश और परीक्षा

इन ‘गायब’ कॉलेजों के दस्तावेजों में हर साल सैकड़ों छात्र प्रवेश लेते हैं, परीक्षाएं देते हैं और बिना किसी बुनियादी ढांचे (क्लासरूम या लाइब्रेरी) के डिग्री लेकर निकल भी जाते हैं। हाल ही में विश्वविद्यालय द्वारा कराए गए औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) में करीब 30 कॉलेजों में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से दो कॉलेजों का तो जमीन पर कोई वजूद ही नहीं मिला, जबकि कुछ कॉलेज अपने पंजीकृत (Registered) पते से कोसों दूर किसी दूसरी जगह पर चलते पाए गए।

नोटरी के भरोसे मान्यता और जांच के आदेश

इतनी बड़ी कमियों के बाद भी विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद (Executive Council) ने नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए महज एक ‘नोटरी हलफनामे’ के आधार पर 125 निजी कॉलेजों को सशर्त संबद्धता (Conditional Affiliation) दे दी। इस बड़े शिक्षा घोटाले के उजागर होने के बाद, मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय जांच और सेवानिवृत्त न्यायाधीश (Retired Judge) से जांच कराने की बात सामने आई है। यह पूरा मामला राज्य की शिक्षा प्रणाली, भौतिक सत्यापन (Physical Verification) की प्रक्रिया और छात्रों के भविष्य के साथ होने वाले खिलवाड़ पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

आखिर कब तक चलेगा ऐसा खेल? (MP BEd College Scam)

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या यही है हमारे देश की शिक्षा व्यवस्था, जहां शिक्षण संस्थानों का धरातल (हकीकत) से कोई वास्ता ही नहीं है? चंद रुपयों के मुनाफे और प्रशासनिक लापरवाही के लिए क्या मासूम छात्रों के भविष्य को इस तरह अंधकार में धकेलना सही है?

Rajni

rajni@nedricknews.com

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Recent News

Trending News

Editor's Picks

Latest News

©2026- All Right Reserved. Manage By Marketing Sheds