Cyber Crime Against Minor: एक 14 साल की नौवीं कक्षा की छात्रा रूही की आत्महत्या के मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। शुरुआत में परिवार को समझ नहीं आ रहा था कि पढ़ाई में अच्छी और सामान्य व्यवहार करने वाली बच्ची आखिर ऐसा कदम क्यों उठाएगी। पिता को यकीन नहीं हो रहा था कि उनकी बेटी बिना किसी वजह के जान दे सकती है। इसी शक ने पूरे मामले की परतें खोल दीं।
निजी जासूस की एंट्री, शुरू हुई डिजिटल जांच (Cyber Crime Against Minor)
सच जानने के लिए रूही के पिता ने एक निजी जासूस की मदद ली। जासूस ने पुलिस से अनुमति लेकर रूही का मोबाइल फोन और लैपटॉप मंगवाया। शुरुआती डेटा एनालिसिस में कुछ भी संदिग्ध नजर नहीं आया। न कोई सुसाइड नोट, न कोई साफ वजह।
रूही पढ़ाई में तेज थी और परिवार के अनुसार किसी तनाव में भी नहीं दिख रही थी। मामला जितना शांत दिख रहा था, उतना था नहीं।
ये थी 14 साल की 9वीं की छात्रा रूही।
रूही ने आत्महत्या कर ली थी, लेकिन उसके पिता को यकीन ही नहीं हो रहा था कि उनकी बेटी ऐसा कर सकती है।
उन्होंने इस मामले में एक निजी जासूस को लगाया। जासूस ने लैपटॉप और फोन पुलिस से मंगवाए, लेकिन शुरुआती डेटा एनालिसिस में कुछ भी संदिग्ध नहीं… pic.twitter.com/XtPRGnzYU6
— Anu Yadav (@Anuyadav007) February 22, 2026
डिलीट डेटा से खुला राज
जांच आगे बढ़ी तो जासूस ने डिलीट किया हुआ डेटा रिकवर किया। इसी दौरान कुछ चैट्स सामने आईं। ये बातचीत 17 साल के ‘समीर’ नाम के एक लड़के से थी। पहली नजर में ये सामान्य दोस्ताना बातचीत लगी, लेकिन कुछ बातें असामान्य थीं।
जासूस ने ‘समीर’ का सोशल मीडिया प्रोफाइल खंगाला। पता चला कि उसका ज्यादातर फ्रेंड सर्कल भारत के बाहर का था। प्रोफाइल की लोकेशन भारत दिखाई जा रही थी, लेकिन तकनीकी जांच में सामने आया कि वह VPN के जरिए अपनी लोकेशन बदल रहा था।
फर्जी नंबर और संदिग्ध गतिविधियां
सोशल मीडिया पर दर्ज मोबाइल नंबर ओडिशा के एक किसान के नाम से रजिस्टर्ड था, जो बाद में फर्जी पाया गया। उस नंबर से कोई कॉल या मैसेज रिकॉर्ड नहीं मिला। सिर्फ इंटरनेट एक्सेस के लिए VPN का इस्तेमाल किया जा रहा था।
जासूस ने तीन महीने के आईपी लॉग खंगाले। इसी दौरान एक लिंक मिला, जिससे ‘समीर’ ने Domino’s से पिज्जा ऑर्डर किया था। यही सुराग अहम साबित हुआ।
पिज्जा डिलीवरी से आरोपी तक पहुंची पुलिस
जासूस ने संबंधित तारीख और समय का डिलीवरी एड्रेस निकलवाया। पता मिलने के बाद पुलिस ने उस स्थान पर छापा मारा। वहां 53 साल का नागेश नाम का व्यक्ति मिला।
पूछताछ में नागेश ने कबूल किया कि वही ‘समीर’ बनकर रूही से चैट करता था। उसने सोशल मीडिया के जरिए पहले दोस्ती की, फिर भरोसा जीतकर उसे होटल में मिलने बुलाया।
ब्लैकमेलिंग से टूटी छात्रा
जब रूही होटल पहुंची और सामने नागेश को देखा तो वह घबरा गई। आरोप है कि इसी दौरान नागेश ने उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें ले लीं और उन्हें वायरल करने की धमकी देकर ब्लैकमेल करने लगा।
लगातार मानसिक दबाव और डर के चलते रूही ने यह कदम उठा लिया। पुलिस ने नागेश को गिरफ्तार कर लिया है और उसके खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
अभिभावकों के लिए चेतावनी
यह मामला एक बार फिर इंटरनेट की दुनिया के खतरों की याद दिलाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि नाबालिग बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखना और उनसे खुलकर संवाद करना बेहद जरूरी है।
साइबर अपराधी फर्जी प्रोफाइल, VPN और नकली नंबरों के जरिए अपनी पहचान छिपा लेते हैं। ऐसे में जरा सी लापरवाही बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
रूही की मौत ने एक परिवार को हमेशा के लिए तोड़ दिया, लेकिन यह घटना समाज के लिए एक सख्त संदेश भी छोड़ गई है सतर्क रहें, बच्चों को जागरूक करें और इंटरनेट के इस्तेमाल में सावधानी बरतें।































