Kalita Majhi: पश्चिम बंगाल के चुनाव में इस बार बहुत कुछ बदल गया है, जो आंखे कल तक सिर्फ अपने और अपने बच्चे के भविष्य के सपने देखती थी आज उन आंखों ने बंगाल में अपनी जीत देखी, क्या आप यकीन करेंगे कि चार घरों में बर्तन-चौका करने वाली एक महिला अब पश्चिम बंगाल की विधायक बन गई हैं? कल तक जो हाथ दूसरों के घर संवारते थे, आज उन्हीं हाथों में जनता ने अपनी किस्मत की चाबी सौंप दी है। हम बात कर रहे हैं बीजेपी की कलिता माझी की, जिन्होंने औसग्राम सीट से टीएमसी के उम्मीदवार को 12,500 से ज्यादा वोटों से हराकर एक नया इतिहास रच दिया है।
पी. सी. मोहन ने की तारीफ
Kalita Majhi जो कभी दूसरों के घरों में बर्तन मांजकर महीने के महज 2,500 कमाती थीं, आज लाखों लोगों के लिए उम्मीद की एक नई किरण बन गई हैं। संघर्षों से भरी जिंदगी और बेहद सीमित संसाधनों के बावजूद, कलिता ने साबित कर दिया कि अगर हौसले बुलंद हों तो जीत निश्चित है। उनकी इस ऐतिहासिक सफलता पर बेंगलुरु से बीजेपी सांसद पी. सी. मोहन ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर उनकी तारीफ करते हुए इसे बीजेपी और एक आम नागरिक की असली ताकत बताया है। उन्होंने लिखा कि यह बीजेपी की शक्ति है, जहाँ एक साधारण नागरिक भी आगे बढ़कर ऐसी प्रेरणादायक कहानी लिख सकता है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कलिता 2,500 से 4,500 की मामूली आय में अपने घर और बेटे की पढ़ाई का खर्च चलाती थीं, और आज उनकी यही मेहनत उन्हें विधानसभा की दहलीज तक ले आई है।
दिहाड़ी मजदूर है कलिता पति
कलिता माझी (Kalita Majhi) के पति सुब्रत माझी पेशे से एक प्लंबर हैं और दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण रही है, जहाँ कलिता की 2,500 की मासिक आय और सुब्रत की मजदूरी से ही घर का गुजारा और उनके बेटे पार्थ की पढ़ाई का खर्च चलता था। इस कठिन संघर्ष के बावजूद, सुब्रत ने कलिता का हर कदम पर साथ दिया और उनके राजनीति में आने के फैसले का पूरा समर्थन किया। आज कलिता की इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे उनके पति का अटूट सहयोग और वर्षों का कड़ा परिश्रम एक मजबूत आधार रहा है।
लोकतंत्र में आम आदमी की ताकत
Kalita Majhi की जीत ने यह साबित कर दिया कि लोकतंत्र में आम आदमी की ताकत क्या होती है। कलिता का यह सफर कतई आसान नहीं रहा, रोज़मर्रा की ज़िंदगी की चुनौतियों से जूझते हुए उन्होंने शायद कभी यह नहीं सोचा होगा कि एक दिन वे विधानसभा की दहलीज तक पहुंचेंगी। औसग्राम जैसे क्षेत्र में, जहाँ लंबे समय से पारंपरिक राजनीति का असर रहा है, वहाँ कलिता माझी की जीत सिर्फ एक सीट की जीत नहीं, बल्कि एक बड़े सामाजिक बदलाव का संकेत है।




























