India-Myanmar Relations: भारत और म्यांमार के रिश्तों को नई मजबूती देने की दिशा में सोमवार को एक महत्वपूर्ण कदम देखने को मिला। म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान साफ तौर पर भरोसा दिलाया कि उनके देश की धरती का इस्तेमाल भारत के सुरक्षा हितों के खिलाफ किसी भी गतिविधि के लिए नहीं होने दिया जाएगा। दोनों नेताओं के बीच हुई व्यापक बातचीत में सीमा सुरक्षा, व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, निवेश और क्षेत्रीय सहयोग जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
म्यांमार में राष्ट्रपति बनने के दो महीने से भी कम समय बाद यू मिन आंग ह्लाइंग भारत के पांच दिवसीय दौरे पर पहुंचे हैं। ऐसे समय में हुई यह यात्रा खास मानी जा रही है, जब दोनों देश क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक साझेदारी को और मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
सीमा पार सक्रिय समूहों पर जताई चिंता| India-Myanmar Relations
बैठक के बाद विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने म्यांमार की सीमा से संचालित होने वाले सशस्त्र और उग्रवादी समूहों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि ऐसे समूह भारत की सीमाओं के निकट अपनी गतिविधियां जारी रखे हुए हैं, जिससे पूर्वोत्तर राज्यों की सुरक्षा और शांति प्रभावित होती है।
मिसरी ने बताया कि इन समूहों के खिलाफ म्यांमार सेना द्वारा चलाए जाने वाले अभियान भी कई बार सीमा के बेहद करीब होते हैं, जिसका असर भारतीय सीमा से लगे क्षेत्रों पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में स्थानीय लोगों को नुकसान और व्यवधान का सामना करना पड़ सकता है।
शरणार्थियों और सीमा प्रबंधन पर भी चर्चा
भारत ने सीमा पार होने वाली अवैध आवाजाही और शरणार्थियों के मुद्दे को भी गंभीरता से उठाया। विदेश सचिव के मुताबिक, कई बार बड़ी संख्या में लोग म्यांमार से भारतीय सीमा में प्रवेश कर जाते हैं, जिससे स्थानीय प्रशासन पर अतिरिक्त दबाव बनता है। उन्होंने बताया कि सीमा पर बाड़बंदी का काम तेजी से जारी है और कई स्थानों पर निर्धारित प्रवेश द्वार तथा जांच चौकियां स्थापित की जा रही हैं, ताकि सीमा प्रबंधन को और प्रभावी बनाया जा सके।
भारत-म्यांमार-थाईलैंड हाईवे परियोजना पर जोर
बैठक के दौरान दोनों देशों ने क्षेत्रीय कनेक्टिविटी से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर भी चर्चा की। कालादान मल्टी-मॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट परियोजना और भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग को जल्द पूरा करने पर सहमति बनी। विशेषज्ञों का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से पूर्वोत्तर भारत को दक्षिण-पूर्व एशिया से बेहतर संपर्क मिलेगा, जिससे व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
सू ची और शांति प्रक्रिया पर भी हुई बातचीत
मुलाकात के दौरान म्यांमार की आंतरिक स्थिति और वहां चल रही शांति प्रक्रिया पर भी चर्चा हुई। आंग सान सू ची से जुड़े सवाल पर विदेश सचिव ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने इस विषय को उठाया, लेकिन बातचीत का केंद्र म्यांमार में स्थायी शांति और समावेशी राजनीतिक प्रक्रिया रहा। मिसरी ने कहा कि भारत का हमेशा से यह मानना रहा है कि सभी हितधारकों को बातचीत की प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत म्यांमार की आंतरिक राजनीतिक व्यवस्था पर टिप्पणी करने के बजाय रचनात्मक सहयोग में विश्वास रखता है।
व्यापार, निवेश और एआई जैसे क्षेत्रों में बढ़ेगा सहयोग
दोनों देशों के बीच हुई वार्ता में व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी आधुनिक तकनीकों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी। दोनों पक्षों ने आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देने और निवेश के अवसरों को बढ़ाने की इच्छा जताई। विदेश सचिव ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने म्यांमार की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति भारत के समर्थन को दोहराया। वहीं म्यांमार के राष्ट्रपति ने आश्वासन दिया कि उनके देश का क्षेत्र भारत विरोधी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा।
पूर्वोत्तर भारत के लिए अहम है म्यांमार
म्यांमार भारत का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक पड़ोसी है। दोनों देशों के बीच करीब 1,640 किलोमीटर लंबी सीमा है, जो नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों से जुड़ी हुई है। ऐसे में दोनों देशों के बीच बेहतर तालमेल क्षेत्रीय सुरक्षा और विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
इससे पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने भी राष्ट्रपति ह्लाइंग से मुलाकात कर सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की थी। राष्ट्रपति के साथ आए प्रतिनिधिमंडल में कई मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और उद्योगपति शामिल हैं। अपने दौरे के अगले चरण में राष्ट्रपति ह्लाइंग मुंबई जाएंगे, जहां वे विभिन्न आर्थिक और निवेश संबंधी कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा भारत और म्यांमार के संबंधों को नई दिशा देने के साथ-साथ क्षेत्रीय सहयोग को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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