Vijay Film Career and Politics: पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए..जिसमें सबसे ज्यादा तमिलनाडु के नतीजो ने चौंकाया है। उत्तर भारत की आम आदमी पार्टी की ही तरह एक्टर थलापति विजय की नवनिर्वाचित पार्टी में दक्षिण में पहली ही बार में झंडे गाड़ दिये है। इतना ही नहीं खबर तो ये भी आ रही है कि थलापति ही तमिलनाडु के अगले सीएम भी होंगे.. तमाम मुश्किलों के बाद थलापति ने बता दिया कि जिसके साथ जनता होती है वो बिना ताज के ही बादशाह होता है…और राजनीति वो ताज आपके सिर पर सजा देती है.. थलापति ने भी अपने एक्टिंग करियर को बाय बाय कर पूरी तरह से राजनीति में सक्रिय रहने की घोषणा कर दी है।
लेकिन क्या आप ये जानते है कि यहीं थलापति है जिन्हें कभी उनके पिता ने राजनीति में लाने के लिए एड़ी से चोटी का जोर लगा दिया था, यहां तक उनके पिता ने थलापति के नाम से ही अपनी पार्टी शुरु की थी, लेकिन तब विजय ने पार्टी जॉइन करने के बजाय अपने पिता पर उनका नाम इस्तेमाल करने के लिए केस कर दिया था। जी हां, अपने इसlekh में जानेंगे कि क्यों किया था थलापति ने ऐसा.. और क्या है उनके पिता का रिएक्शन।
पहली बार राजनीति में आने का फैसला किया
थलापति के पिता एस.ए.चंद्रशेखर जो कि दक्षिण भारत के जाने माने निर्देशक, निर्माता, लेखक और अभिनेता हैं। वहीं उनकी मां शोबा चंद्रशेखर एक प्लेबैक सिंगर और वोकलिस्ट हैं। थलापति ईसाई धर्म को मानते है, उनके पिता ईसाई है औऱ उनकी मां हिंदू। थलापति इस वक्त 51 साल के है, औऱ साल 2024 में उन्होंने पहली बार राजनीति में आने का फैसला किया और तमिलगा वेट्री कझगम टीवीके नाम की पार्टी बनाई.. हालांकि पार्टी बनाने के बाद भी वो अपनी कुछ पेंडिंग प्रोजेक्ट्स को पूरा करके एक्टिंग के रिटायर होना चाहते थे.. उनकी आखिरी फिल्म जननायक है।
पिता बहुत लंबे समय से विजय को राजनीति में लाना चाहते थे
लेकिन 2026 में वो इतनी बड़ी जीत दर्ज करेंगे ये किसी ने नहीं सोचा था. वहीं उनके पिता की खुशी की ठिकाना नहीं है जो विजय को काफी लंबे समय से राजनीति में लाना चाहते थे। लेकिन विजय ने देर से ही सही तमिल लोगो के लिए कदम उठाया। उनके पिता ने कहा कि एक पिता के तौर पर, मुझे बहुत गर्व और खुशी है,, जब से पार्टी बनी है तब से विजय का आत्मविश्वास जैसे जैसे बढ़ा है, वो निशानी है कि वो तमिलनाडु के एक बेहतर सीएम बन सकते है। विजय का अकेले चुनाव लड़ने का फैसला एक साहसी नेतृत्व की निशानी है।
ये जीत विजय के लिए एक ऐतिहासिक जीत है बता दे कि एस ए चंद्रशेखर ने चुनाव के नतीजो से पहले तिरूपति के मुरूगन मंदिर जाकर विजय की जीत के लिए प्रार्थना की थी। विजय की जीत का श्रैय उनके परिवार के साथ साथ तमिलनाडु की जनता को भी जाता है, जो कि पिछले 33 साल के करियर में विजय ने फैंस का प्यार कमाया था उस प्यार ने दशकों से जो राज्य DMK और AIADMK का अभेद्य किला रहा है.. उसे पहली ही बार में भेद देने का काम किया।
पिता पर किया था केस
थलापति विजय कभी भी राजनीति का हिस्सा नहीं बनना चाहते थे, इतना ही नहीं कहा जाता है कि जब उनके पिता एस. ए. चंद्रशेखर ने विजय को राजनीति में लाने के लिए ऑल इंडिया थलापति विजय मक्कल इयक्कम नाम से एक पार्टी की गठन किया तो विजय काफी नाराज हो गए थे, और उन्होंने थलापति का नाम इस्तेमाल करके उनके फैंस के इमोशन से खेलने की कोशिश के मामले में विजय ने अपने माता-पिता समेत 11 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था .. उन्होंने मांग की थी कि उनके नाम का इस्तेमाल राजनीतिक गतिविधियों में नहीं होना चाहिए। आज विजय ने अपने पिता का सपना पूरा कर दिया है… जो कि अपने बेटे की सक्सेस देखकर फूले नहीं समा रहे है। खैर विजय की जीत ने वाकई में ये बता दिया कि उन्होंने सिर्फ पैसा नहीं कमाया बल्कि जनता का प्यार भी कमाया है।




























