भारत में 3 और पाकिस्तान में 2 शादियां; दो बार बदला धर्म! आखिरी वक्त में चंदा जुटाकर हुआ अंतिम संस्कार| Meena Shorey story

Nandani | Nedrick News Mumbai Published: 02 Jun 2026, 04:24 PM | Updated: 02 Jun 2026, 04:24 PM

Meena Shorey story: फिल्मी दुनिया की चमक-दमक अक्सर दूर से बेहद खूबसूरत नजर आती है, लेकिन इसके पीछे कई ऐसी कहानियां छिपी होती हैं जो दर्द, संघर्ष और अकेलेपन से भरी होती हैं। हिंदी सिनेमा के शुरुआती दौर की मशहूर अभिनेत्री मीना शौरी की जिंदगी भी ऐसी ही एक कहानी है। एक समय था जब उनकी खूबसूरती, अभिनय और शानदार स्क्रीन प्रेजेंस के चर्चे हर तरफ होते थे। लोग उन्हें प्यार से ‘लारा लप्पा गर्ल’ कहकर बुलाते थे। लेकिन पर्दे पर सफलता हासिल करने वाली यह अभिनेत्री निजी जिंदगी में कभी सुकून नहीं पा सकीं।

पांच शादियां करने के बावजूद उन्हें न तो स्थायी रिश्ते का साथ मिला और न ही जीवन के अंतिम दिनों में कोई ऐसा व्यक्ति, जिस पर वे भरोसा कर सकें। उनकी जिंदगी का अंत इतना दर्दनाक रहा कि अंतिम संस्कार के लिए पड़ोसियों को चंदा जुटाना पड़ा।

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आर्थिक तंगी में बीता बचपन | Meena Shorey story

मीना शौरी का असली नाम खुर्शीद जहां था। उनका जन्म वर्ष 1921 में ब्रिटिश भारत के पंजाब प्रांत में हुआ था। उनका बचपन बेहद मुश्किल हालात में गुजरा। परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहा था और कई बार दो वक्त का भोजन जुटाना भी चुनौती बन जाता था। हालांकि, उनकी जिंदगी में बदलाव तब आया जब उनकी बड़ी बहन की शादी मुंबई के एक संपन्न परिवार में हुई। इसके बाद खुर्शीद भी अपनी बहन के साथ मुंबई आ गईं। यहीं से उनकी जिंदगी ने एक नया मोड़ लिया, जिसने उन्हें फिल्मी दुनिया तक पहुंचा दिया।

सोहराब मोदी की नजर पड़ी और बदल गई किस्मत

एक फिल्म के मुहूर्त कार्यक्रम में खुर्शीद की मुलाकात मशहूर फिल्म निर्माता और निर्देशक सोहराब मोदी से हुई। उनकी प्रतिभा और व्यक्तित्व से प्रभावित होकर सोहराब मोदी ने उन्हें अपनी फिल्म ‘सिकंदर’ में काम करने का मौका दिया। यहीं से उनके अभिनय करियर की शुरुआत हुई। फिल्म इंडस्ट्री में आने के बाद उनका नाम बदलकर मीना रख दिया गया। खूबसूरती और अभिनय क्षमता के दम पर उन्होंने जल्द ही दर्शकों के दिलों में जगह बना ली। देखते ही देखते वह उस दौर की चर्चित अभिनेत्रियों में शामिल हो गईं।

निजी जिंदगी में नहीं मिला सुकून

करियर की सफलता के साथ-साथ उनकी निजी जिंदगी लगातार उतार-चढ़ाव से गुजरती रही। मीना ने पहली शादी अभिनेता और फिल्म निर्माता जाहूर राजा से की थी। हालांकि यह रिश्ता ज्यादा समय तक नहीं चल सका और दोनों कुछ ही महीनों में अलग हो गए। इसके बाद उन्होंने अभिनेता अल नासिर से विवाह किया, लेकिन यह शादी भी असफल साबित हुई। लगातार दो रिश्तों के टूटने के बावजूद मीना ने प्यार और शादी पर भरोसा बनाए रखा।

‘लारा लप्पा गर्ल’ बनने के पीछे की कहानी

मीना की जिंदगी में फिर फिल्म निर्माता रूप के. शौरी आए। दोनों ने शादी की और साथ में कई फिल्मों में काम किया। बताया जाता है कि इस विवाह के लिए मीना ने अपना धर्म भी बदल लिया था। इसी दौरान फिल्म ‘एक थी लड़की’ रिलीज हुई, जिसने उन्हें नई पहचान दिलाई। फिल्म का गाना ‘लारा लप्पा लारा लप्पा’ उस दौर का सुपरहिट गीत बन गया। गाने की लोकप्रियता इतनी ज्यादा थी कि लोग मीना को उनके असली नाम से ज्यादा ‘लारा लप्पा गर्ल’ के नाम से पहचानने लगे। यह उनके करियर का सबसे सफल और सुनहरा दौर माना जाता है।

पाकिस्तान जाने का फैसला बना जिंदगी का टर्निंग पॉइंट

साल 1956 में मीना शौरी और रूप के. शौरी एक फिल्मी प्रोजेक्ट के सिलसिले में पाकिस्तान गए थे। वहीं मीना ने भारत लौटने के बजाय पाकिस्तान में ही बसने का फैसला कर लिया। उनका यह निर्णय उनकी तीसरी शादी के अंत का कारण बना। जिस रिश्ते के लिए उन्होंने धर्म परिवर्तन किया था, वह भी टूट गया। पाकिस्तान में बसने के बाद उन्होंने दोबारा इस्लाम धर्म अपना लिया और नई जिंदगी शुरू करने की कोशिश की।

दो और शादियां, लेकिन नहीं बदली किस्मत

पाकिस्तान में रहने के दौरान मीना ने दो और शादियां कीं। पहले उन्होंने फिल्म निर्माता रजा मीर से विवाह किया, लेकिन यह रिश्ता भी ज्यादा समय तक नहीं चल पाया। इसके बाद अभिनेता असद बुखारी उनके जीवन में आए, मगर यह शादी भी असफल रही। इस तरह मीना शौरी की पांचों शादियां टूट गईं। निजी जीवन में उन्हें कभी वह स्थिरता और खुशी नहीं मिल सकी, जिसकी वह तलाश कर रही थीं।

आलीशान जिंदगी से अकेलेपन तक का सफर

समय के साथ उनका फिल्मी करियर भी कमजोर पड़ने लगा। फिल्मों में काम के अवसर कम होते गए और आर्थिक परेशानियां बढ़ने लगीं। जो अभिनेत्री कभी शौहरत और आरामदायक जिंदगी की प्रतीक मानी जाती थीं, उन्हें आखिर में किराए के एक छोटे से घर में रहने को मजबूर होना पड़ा। जीवन के अंतिम वर्षों में उनके पास न परिवार का साथ था, न कोई जीवनसाथी और न ही ऐसा करीबी व्यक्ति जो मुश्किल समय में उनका सहारा बन सके।

बेहद दर्दनाक रहा आखिरी सफर

3 सितंबर 1989 को मीना शौरी ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। लेकिन उनकी जिंदगी की सबसे दुखद बात यह रही कि अंतिम समय में उनके पास कोई अपना मौजूद नहीं था। बताया जाता है कि उनकी आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो चुकी थी कि उनके अंतिम संस्कार के लिए भी पैसे नहीं थे। आखिरकार पड़ोसियों ने मिलकर चंदा इकट्ठा किया और उनके अंतिम संस्कार की व्यवस्था की।

एक दौर में लाखों दिलों पर राज करने वाली ‘लारा लप्पा गर्ल’ का इस तरह दुनिया से जाना आज भी फिल्म इंडस्ट्री की सबसे दर्दनाक कहानियों में गिना जाता है। उनकी जिंदगी इस बात की मिसाल है कि शोहरत और सफलता हमेशा व्यक्तिगत खुशियों की गारंटी नहीं होती।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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