Judge Yashwant Verma controversy: दिल्ली हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा के घर से नकदी बरामदगी, सिम्भौली शुगर मिल घोटाले से जुड़ी नई जांच की शुरुआत

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 23 मार्च 2025, 05:30 AM Updated: 23 मार्च 2025, 05:30 AM
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Judge Yashwant Verma controversy: दिल्ली हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार उनकी न्यायिक कार्यप्रणाली पर नहीं, बल्कि उनके घर से बरामद हुई बड़ी मात्रा में नकदी को लेकर। हाल ही में जस्टिस वर्मा के आधिकारिक आवास में लगी आग के बाद दमकल विभाग ने मौके पर पहुंचकर जब जांच की, तो वहां भारी मात्रा में नकदी बरामद की गई। इस घटना ने एक पुरानी आर्थिक घोटाले से जुड़ी जांच को फिर से ताजा कर दिया है, जो सिम्भौली शुगर मिल फ्रॉड केस से जुड़ा हुआ है।

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सिम्भौली शुगर मिल घोटाला और जस्टिस वर्मा की भूमिका- Judge Yashwant Verma controversy

सिम्भौली शुगर मिल घोटाले की शुरुआत 2018 में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा की गई थी। इस घोटाले में आरोप था कि सिम्भौली शुगर मिल्स लिमिटेड ने ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स से लिए गए ऋण को गलत तरीके से इस्तेमाल किया। बैंक ने आरोप लगाया था कि कंपनी ने किसानों के लिए जारी किए गए 97.85 करोड़ रुपये के ऋण का दुरुपयोग किया और इन पैसों को अन्य उद्देश्यों के लिए मोड़ दिया। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी मई 2015 तक इसे एक “संभावित धोखाधड़ी” मानते हुए रिपोर्ट किया था।

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सीबीआई ने इस मामले में कुल 12 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी, जिसमें जस्टिस वर्मा भी शामिल थे, जो उस समय सिम्भौली शुगर मिल के नॉन-एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर थे। हालांकि, इस मामले में जांच धीमी पड़ गई और कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

फरवरी 2024 में जांच का पुनरारंभ और सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप

फरवरी 2024 में, एक अदालत ने सीबीआई को इस बंद पड़ी जांच को दोबारा शुरू करने का आदेश दिया था, लेकिन इसके कुछ ही समय बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को पलट दिया। इस फैसले के बाद, सिम्भौली शुगर मिल घोटाले से जुड़े वित्तीय अनियमितताओं की जांच पर पूरी तरह से रोक लग गई, जिससे इस मामले के अभियुक्तों के खिलाफ कोई कारवाई नहीं हो पाई।

जज के घर से मिली नकदी पर उठे सवाल

जस्टिस वर्मा के घर से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद होने के बाद यह मामला अब एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। रिपोर्टों के अनुसार, आग बुझाने के दौरान दमकल कर्मियों को संदिग्ध परिस्थितियों में भारी नकदी मिली, जो कि जांच के दायरे में आ गई है। इस बरामदगी के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम तक पहुंचा, जिसने जस्टिस वर्मा को दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट ट्रांसफर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जज के ट्रांसफर का निर्णय नकदी बरामदगी से जुड़ी जांच का हिस्सा नहीं है।

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कांग्रेस पार्टी ने उठाए सवाल

कांग्रेस पार्टी ने इस पूरे मामले पर सरकार पर निशाना साधते हुए इसे गंभीर बताया है। पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि यह मामला न केवल न्यायपालिका की छवि को प्रभावित करता है, बल्कि यह जनता के न्याय व्यवस्था पर विश्वास को भी कमजोर करता है। उन्होंने यह भी कहा कि “दमकल विभाग की कार्रवाई सीबीआई और ईडी से भी बेहतर हो रही है।”

सुप्रीम कोर्ट की आंतरिक जांच और आगे की कार्रवाई

इस घटना के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को इस मामले की आंतरिक जांच शुरू करने का निर्देश दिया। मुख्य न्यायाधीश ने अपनी रिपोर्ट आज भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना को सौंप दी है। अब रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने जस्टिस वर्मा के 22 साल के बेदाग करियर पर सवाल खड़े कर दिए हैं, और यह मामला न्यायपालिका की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाता है।

और पढ़ें: जज के आवास से भारी मात्रा में नकदी मिलने के बाद तबादला, इलाहाबाद हाई कोर्ट के वकील भड़के

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