वैक्सीनेशन का शतक: आसान नहीं था यहां तक पहुंचना, विवादों और सवालों के बीच यूं देश ने रचा इतिहास!

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 21 अक्टूबर 2021, 05:30 AM Updated: 21 अक्टूबर 2021, 05:30 AM
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16 जनवरी से 21 अक्टूबर…इन 9 महीनों में भारत ने बड़ा इतिहास रच डाला है, 100 करोड़ वैक्सीनेशन डोज का। भारत ने आज वैक्सीनेशन का शतक लगा लिया। देशभर में 100 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन की डोज लगाई जा चुकी है। इस आंकड़े को छू लेने पर सरकार भी जश्न मनाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए कई कार्यक्रम और योजनाएं भी बनाई गई है। 

पीएम मोदी और स्वास्थ्य मांडविया ने इस Milestone को छूने के लिए बधाई दी। स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया लाल किले से आज कैलाश खेर का लिखे गीत और एक फिल्म जारी करेंगे। इसके अलावा इस उपलब्धि की घोषणा विमानों, मेट्रो और रेलवे स्टेशन पर की जाएगी। साथ ही अस्पतालों में भी जश्न मनाने की तैयारी की जा रही है। 

हालांकि आज 100 करोड़ वैक्सीनेशन डोज का आंकड़ा देश ने छू लिया, वो कर पाना इतना भी आसान नहीं था। इस दौरान कई उतार चढ़ाव देखने मिले। वैक्सीन को मंजूरी देने में जल्दबाजी करने की बात कहने से लेकर सुस्त रफ्तार और वैक्सीन की कमी के चलते कई विवाद भी खड़े हुए। आज जब देश में कोरोना वैक्सीनेशन अभियान के शुरू होने से लेकर अब तक के कुछ पड़ावों पर फिर से नजर डाल लेते हैं…

अप्रैल 2020 से ही शुरू हो गया था काम 

कोरोना महामारी ने भारत में दस्तक तो जनवरी 2020 में ही दे दी थी, लेकिन इसने रफ्तार पकड़नी मार्च में शुरू की। जिसके बाद देश को महीनों तक लॉकडाउन का सामना भी करना पड़ा। इस बीच अप्रैल 2020 में ही कोरोना से जुड़ी दवाईयों और  वैक्सीन पर काम शुरू कर दिया गया था।  सरकार ने वैक्सीनेशन के विकास और दवाओं के परीक्षण के लिए नेशनल टॉस्क फोर्स का गठन किया था। 

दो वैक्सीन को मिली मंजूरी

साल 2021 की शुरूआत में 3 जनवरी को सीरम इंस्टीट्यूट की कोविशील्ड और भारत बायेटेक की कोवैक्सीन को सरकार ने इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए मंजूरी दी थीं। तब तक थर्ड फेज का ट्रायल भी पूरा नहीं हुआ था, बावजूद इसके वैक्सीन को मंजूरी मिल गई थीं। जिसके चलते इसमें जल्दबाजी करने के आरोप भी सरकार पर लगाए गए थे। 

वैक्सीनेशन का महाअभियान शुरू करने से पहले ड्राई रन भी चलाया गया। जिसमें ट्रेनिंग दी गई। ऐसा इसलिए किया गया, जिससे वैक्सीनेशन अभियान के दौरान कोई गलती ना हो। अभियान शुरू करने से पहले तीन ड्राई रन देशभर में चलाए गए थे। 

फिर शुरू हुआ महाअभियान

– 16 जनवरी से वैक्सीनेशन अभियान के फर्स्ट फेज की शुरूआत हुई थी। जिस दौरान सबसे पहले हेल्थकेयर समेत फ्रंटलाइन वर्कर्स को वैक्सीन दी गई थीं। वैक्सीनेशन के लिए कोविन ऐप भी तैयार किया गया। 

– इसके बाद एक फरवरी 2021 से ही फ्रंटलाइन वर्करों जिसमें पुलिसकर्मी, सेना, इमरजेंसी सेवाओं से जुड़े सरकारी विभाग और अन्य कर्मी शामिल उनके लिए वैक्सीनेशन को मंजूरी दी गई। 

– फिर एक महीने बाद यानी एक मार्च 2021 से अभियान का दूसरा फेज शुरू हुआ। इस दौरान 60+ एज ग्रुप के लिए वैक्सीन को मंजूरी मिली। साथ ही इस दौरान गंभीर बीमारियों के शिकार 45 साल से ऊपर के लोगों को भी वैक्सीन लगने की शुरूआत हुई। 

– 2 महीनों बाद यानी एक मई 2021 से 18+ एज ग्रुप के लोगों को वैक्सीन लगने की शुरूआत हुई, जो अब तक चल रही है। ऐसे में कुल मिलाकर तीन फेज में वैक्सीनेशन अभियान शुरू किया गया, जो अभी जारी है। 

कई विवाद भी खड़े हुए

वैक्सीनेशन के इस अभियान के दौरान कई तरह के विवाद भी खड़े हुए। कभी वैक्सीन की कमी को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा, तो कभी राज्यों और केंद्र के बीच की लड़ाई भी देखने को मिली। 

दरअसल, केंद्र की तरफ से ऐलान किया गया था कि एक मई से वो 50 फीसदी वैक्सीन का कोटा उपलब्ध कराएगा। वहीं 25 प्रतिशत वैक्सीन राज्य खुद खुले बाजार से खरीदनी होगी और 25 फीसदी वैक्सीन प्राइवेट सेंटर खरीदेंगे। लेकिन इस दौरान काफी हंगामा हो गया। वैक्सीन की कमी के चलते राज्य टीका नहीं खरीदे सके। मामला इतना बढ़ गया कि ये सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। 

इसके बाद केंद्र को अपनी वैक्सीन नीति में बदलाव करना पड़ा। 21 जून से देशभर में नई टीकाकरण नीति लागू करने का ऐलान हुआ, जिसके तहत वैक्सीनेशन के खर्च की पूरी जिम्मेदारी केंद्र ने ली। 

वैक्सीनेशन की धीमी रफ्तार भी विवादों में छाई रहीं। जिसके चलते विपक्ष सरकार पर हमलावर रहा। आरोप ये भी लगाए गए कि जब देश में वैक्सीन की कमी हो रही है, तो ऐसे में भी सरकार विदेशों में वैक्सीन भेजने में लगी रही। 

हालांकि आज जिस मुकाम पर भारत खड़ा है, वो वाकई में गर्व करने वाला है। क्योंकि अभी कई बड़े बड़े अमीर देश भी यहां तक पहुंचने में कामयाब नहीं हो पाए है, लेकिन भारत ने कर दिया कि वो मोर्च में इस वक्त दुनिया में आगे है। हालांकि महामारी के खिलाफ लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई। भले ही 100 करोड़ का आंकड़ा छू लिया हो, लेकिन आगे और भी कई करोड़ लगानी है और कोरोना महामारी का खात्मा करना है। 

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