IAF chief AP Singh: भारतीय वायुसेना के बेड़े में नए लड़ाकू विमानों के शामिल होने में हो रही लगातार देरी को लेकर वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने खुलकर चिंता जाहिर की है। 94वें वायुसेना दिवस से पहले आयोजित सालाना प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने दो टूक कहा कि नए विमानों की डिलीवरी में हो रही सुस्ती सीधे तौर पर वायुसेना की ताकत और ऑपरेशनल तैयारियों पर असर डाल रही है। उन्होंने साफ किया कि इसमें स्वदेशी ‘तेजस’ विमानों की अटकी पड़ी डिलीवरी भी शामिल है।
घटते स्क्वाड्रन और बढ़ती चुनौतियां| IAF chief AP Singh
एयर चीफ मार्शल ने कहा कि एक तरफ सीमाओं पर सुरक्षा चुनौतियां तेजी से बढ़ रही हैं और आधुनिक युद्ध में हवाई ताकत का रोल सबसे अहम हो गया है, तो दूसरी तरफ हमारे फाइटर स्क्वाड्रनों की संख्या लगातार घटती जा रही है। उन्होंने बताया कि मौजूदा वक्त में भारतीय वायुसेना के पास लड़ाकू विमानों के सिर्फ 30 स्क्वाड्रन बचे हैं, जबकि स्वीकृत क्षमता 42 स्क्वाड्रनों की है। वायुसेना प्रमुख के मुताबिक, इस संख्या को और नीचे गिरने से रोकने और 42 के आंकड़े तक पहुंचने के लिए अगले कुछ वर्षों तक हर साल कम से कम दो स्क्वाड्रन यानी 36 से 40 नए लड़ाकू विमान बेड़े में शामिल करने होंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि स्वदेशी तेजस मार्क-1ए और एमएफआरए (MRFA) प्रोग्राम के तहत खरीदे जाने वाले राफेल विमानों से हालात संभलेंगे।
तेजस की डिलीवरी में देरी से झटका
एचएएल (HAL) की तरफ से तेजस मार्क-1ए की डिलीवरी में हो रही देरी पर वायुसेना प्रमुख ने सख्त रुख दिखाया। उन्होंने कहा, “इसमें कोई दोराय नहीं कि डिलीवरी में जो अतिरिक्त देरी हुई है, उससे हमें सीधा नुकसान हो रहा है।” गौरतलब है कि फरवरी 2021 में रक्षा मंत्रालय ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के साथ 83 तेजस एमके-1ए विमानों के लिए करीब 48,000 करोड़ रुपये का ऐतिहासिक सौदा किया था। समझौते के मुताबिक, इन विमानों की पहली खेप मार्च 2024 तक वायुसेना को मिल जानी चाहिए थी, लेकिन तय समय बीत जाने के बाद भी अब तक एक भी विमान वायुसेना के बेड़े में नहीं पहुंच सका है।
114 राफेल विमानों की डील इसी साल संभव
वायुसेना की मारक क्षमता बढ़ाने के लिए भारत सरकार ने इसी साल फरवरी में 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) खरीदने के लंबे समय से लंबित प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। करीब दो दशक पुरानी इस योजना के तहत फ्रांस के साथ सरकार-से-सरकार (G-to-G) समझौते के जरिए राफेल विमान खरीदे जाने हैं। एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि दोनों देशों के बीच कीमत और दूसरे अहम तकनीकी पहलुओं पर बातचीत चल रही है। अगर सब कुछ तय योजना के मुताबिक रहा, तो इसी वित्तीय वर्ष में इस सौदे पर अंतिम मुहर लग सकती है।
चीन-पाक की जुगलबंदी पर क्या बोले एयर चीफ?
पाकिस्तान और चीन के बीच पांचवीं पीढ़ी (5th Generation) के लड़ाकू विमानों के संयुक्त विकास और सहयोग पर उन्होंने कहा कि यह निश्चित तौर पर चिंता का विषय है। हालांकि, उन्होंने आश्वस्त किया कि भारत के पास भी अपनी मजबूत क्षमताएं हैं और किसी भी जंग का रुख सिर्फ एक विमान या किसी खास हथियार के दम पर तय नहीं होता।













































