Holi and Bhang Connection: होली का रंग भांग के संग, जानें भारत में इसका चलन कब-कैसे शुरू हुआ और क्या ये लीगल है?

Shikha Mishra | Nedrick News Ghaziabad Published: 03 मार्च 2026, 12:22 PM Updated: 03 मार्च 2026, 12:22 PM
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Holi and Bhang Connection: होली हो और भांग का खुमार न हो, ऐसा तो मुमकिन ही नहीं! आखिर बिना ‘ठंडई’ के रंगों का यह त्योहार अधूरा जो है। होली आते ही रंग, गुलाल, ढोल और मस्ती की बात होती है और उसी के साथ याद आती है भांग की। हमारे देश में बड़ी संख्या में लोग पूरे साल होली का इंतज़ार करते हैं, ताकि इस दिन भांग का मज़ा लिया जा सके। कई लोग इसे सिर्फ नशा नहीं, बल्कि भगवान का प्रसाद मानते हैं। खासकर इसे भगवान शिव से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह परंपरा शुरू कैसे हुई? मगर इस मस्ती के बीच क्या आपको पता है कि कानून की नज़र में आपकी ‘ठंडई’ कितनी जायज़ है?

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होली पर भांग का इस्तेमाल कब और कहां से शुरू हुआ?

आपको बता दें कि भांग का इतिहास बहुत पुराना माना जाता है। प्राचीन ग्रंथों में भी इसका जिक्र मिलता है। वेदों में इसे ‘विजय’ कहा गया है और इसे धरती के पवित्र पौधों में गिना गया है। दरअसल, पौराणिक कहानी के अनुसार बताया जाता है कि जब समुद्र मंथन हुआ तो उसमें से भयंकर विष निकला। दुनिया को बचाने के लिए भगवान शिव ने वह विष पी लिया। कहते हैं कि उस विष की जलन और गर्मी को शांत करने के लिए उन्होंने भांग का सेवन किया। तभी से भांग को शिव का प्रिय माना जाने लगा। एक और मान्यता यह भी है कि जब देवता अमृत लेकर जा रहे थे, तो उसकी कुछ बूंदें धरती पर गिर गईं। उन्हीं बूंदों से भांग का पौधा उगा।

होली पर भांग पीने की परंपरा कब शुरू हुई?

होली वसंत ऋतु का त्योहार है। यह वह समय होता है जब ठंड खत्म होती है और गर्मी की शुरुआत होती है। मौसम बदलता है, शरीर भी बदलाव महसूस करता है। मध्यकाल के समय से होली पर भांग पीने की परंपरा ज्यादा लोकप्रिय हुई। आयुर्वेद में भांग को औषधि माना गया है। कहा जाता है कि यह शरीर को ठंडक देती है और पाचन में मदद करती है। धीरे-धीरे यह त्योहार की मस्ती और उल्लास का हिस्सा बन गई।

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क्या भारत में भांग लीगल है?

भारत में भांग की कानूनी स्थिति थोड़ी पेचीदा है। इसके लिए Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1985 (NDPS एक्ट) लागू होता है। इस कानून के तहत गांजा और चरस पर प्रतिबंध है। गांजा पौधे के फूल और फल से बनता है। चरस पौधे की राल (रेज़िन) से बनती है। लेकिन भांग की पत्तियों और बीजों को इस प्रतिबंध से बाहर रखा गया है। इसी वजह से कई राज्यों में सरकार की अनुमति से भांग की दुकानें चलती हैं। उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भांग की बिक्री वैध है। हालांकि हर राज्य के अपने नियम हैं। बिना लाइसेंस खेती या व्यापार करना अपराध है।

भांग कैसे बनती है? How to make Bhang Thandai

भांग बनाना भी एक तरह की पारंपरिक कला है।

1. सबसे पहले भांग की ताजी या सूखी पत्तियां ली जाती हैं।
2. उन्हें अच्छी तरह साफ किया जाता है।
3. डंठल और बीज अलग कर दिए जाते हैं।
4. पत्तियों को पानी में भिगोया जाता है।
5. फिर सिल-बट्टे पर अच्छी तरह पीसा जाता है जब तक महीन पेस्ट न बन जाए।

इस पेस्ट को “भांग का गोला” कहा जाता है। फिर इसे कपड़े से छानकर दूध या पानी में मिलाया जाता है। इसके बाद इसमें चीनी, बादाम, पिस्ता, इलायची और कभी-कभी काली मिर्च मिलाई जाती है।

भांग खाने-पीने के अलग-अलग तरीके

होली पर भांग सिर्फ ठंडाई में ही नहीं मिलाई जाती। सबसे लोकप्रिय तरीका है भांग ठंडाई, भांग के पकौड़े – बेसन में मिलाकर तले जाते हैं, भांग की बर्फी – मावा और चीनी के साथ, पहाड़ी इलाकों में भांग के बीज की चटनी भी बनाई जाती है।

सावधानी बर्तना भी जरूरी

इस बात पर जरुर ध्यान दें, कि भांग का सेवन हमेशा सीमित मात्रा में करना चाहिए। ज्यादा पीने से चक्कर, घबराहट, उलझन या याददाश्त में थोड़ी देर की कमी हो सकती है। आयुर्वेद में इसे औषधि माना गया है और यह दर्द, तनाव और अनिद्रा में मददगार बताई जाती है। लेकिन जरूरत से ज्यादा सेवन नुकसानदायक हो सकता है। बच्चों और गर्भवती महिलाओं को इससे दूर रहने की सलाह दी जाती है।
होली पर भांग सिर्फ नशा नहीं, एक सांस्कृतिक परंपरा है। यह आस्था, उत्सव और मस्ती का मेल है। लेकिन होली रंगों का त्योहार है, बेफिक्री का नहीं। इस होली अगर भांग का आनंद लें तो समझदारी और संयम के साथ लें ताकि त्योहार की यादें मीठी रहें, कड़वी नहीं।

Shikha Mishra

shikha@nedricknews.com

शिखा मिश्रा, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत फोटोग्राफी से की थी, अभी नेड्रिक न्यूज़ में कंटेंट राइटर और रिसर्चर हैं, जहाँ वह ब्रेकिंग न्यूज़ और वेब स्टोरीज़ कवर करती हैं। राजनीति, क्राइम और एंटरटेनमेंट की अच्छी समझ रखने वाली शिखा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और पब्लिक रिलेशन्स की पढ़ाई की है, लेकिन डिजिटल मीडिया के प्रति अपने जुनून के कारण वह पिछले तीन सालों से पत्रकारिता में एक्टिव रूप से जुड़ी हुई हैं।

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