CEC Gyanesh Kumar row: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के खिलाफ 10 अक्टूबर को दिल्ली में हुए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के प्रदर्शन के बाद अब देश के अनुभवी पूर्व नौकरशाह खुलकर चुनाव आयोग के समर्थन में आ गए हैं। भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय विदेश सेवा (IFS) के 124 पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों ने एक खुला पत्र जारी कर चुनाव आयोग और वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) का जोरदार बचाव किया है। इन पूर्व अधिकारियों ने बिना किसी ठोस सबूत के चुनावी प्रक्रिया और ईवीएम पर हेराफेरी के आरोप लगाने वालों को आड़े हाथों लिया है।
‘सिस्टम ऐसा नहीं हो सकता जो सिर्फ आपकी जीत पर ईमानदार लगे’| CEC Gyanesh Kumar row
देश के नागरिकों के नाम लिखे इस खुले पत्र में पूर्व अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा कि कोई भी चुनावी ढांचा ऐसा नहीं हो सकता कि जब आप चुनाव जीत जाएं तो वह पूरी तरह निष्पक्ष और ईमानदार नजर आए, लेकिन जैसे ही हार का सामना करना पड़े, उसी व्यवस्था में हेराफेरी दिखने लगे।
अधिकारियों ने जमीनी हकीकत याद दिलाते हुए कहा कि इसी मौजूदा व्यवस्था और इसी चुनाव आयोग की निगरानी में केंद्र की सत्ताधारी पार्टी को कई राज्यों के विधानसभा चुनावों में हार का मुंह देखना पड़ा और साल 2024 के लोकसभा चुनाव में उसे अपना स्पष्ट संसदीय बहुमत तक गंवाना पड़ा था। अधिकारियों ने तंज कसते हुए सवाल किया, “अगर जिस व्यवस्था को आप आज धांधली वाला बता रहे हैं, उसी ने आपको पहले जीत दिलाई थी, तो खुद से पूछिए कि आपका शक सिस्टम पर है या सिर्फ चुनावी नतीजों पर?”
बूथ कैप्चरिंग के अंधेरे दौर से बहुत आगे निकल चुका है भारत
खुले पत्र में याद दिलाया गया कि भारतीय लोकतंत्र ने एक लंबा सफर तय किया है। एक दौर वह भी था जब बूथ कैप्चरिंग आम बात थी, मतपेटियों में फर्जी मतपत्र ठूंस दिए जाते थे और चुनावों के दौरान बड़े पैमाने पर खून-खराबा होता था। लेकिन आज भारत उस दौर से बहुत आगे निकल चुका है।
अधिकारियों ने हालिया बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की मिसाल देते हुए कहा कि वहां एक भी पोलिंग बूथ पर दोबारा मतदान (री-पोलिंग) कराने की नौबत नहीं आई और साल 1951 के बाद से अब तक का सबसे ऐतिहासिक और रिकॉर्ड मतदान दर्ज किया गया। उन्होंने साफ किया कि भारत की मौजूदा चुनावी प्रक्रिया में पोलिंग एजेंटों की मौजूदगी, ईवीएम की त्रिस्तरीय सीलिंग, स्ट्रॉन्ग रूम की चौबीसों घंटे सुरक्षा और वीवीपैट (VVPAT) पर्चियों के मिलान जैसे कड़े सुरक्षा चक्र मौजूद हैं।
वोटर लिस्ट की सफाई के लिए क्यों जरूरी था SIR?
चुनाव आयोग के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) पर उठ रहे विवाद पर अधिकारियों ने तथ्यों के साथ अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि वोटर लिस्ट को पारदर्शी और सटीक बनाए बिना निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं हैं। बिहार का आंकड़ा साझा करते हुए उन्होंने बताया कि इस मुहिम के तहत करीब 22 लाख मृत मतदाताओं और 7 लाख डुप्लीकेट (फर्जी) नामों को हटाया गया, जबकि लगभग 21.5 लाख नए वोटरों के नाम जोड़े गए।
अधिकारियों ने चेतावनी भरे लहजे में लिखा कि बिना दुरुस्त की गई फर्जी वोटर लिस्ट कभी भी आम मतदाताओं की रक्षा नहीं करती, बल्कि वह चुनावी धोखाधड़ी करने वालों का रास्ता आसान बनाती है।
बहुसदस्यीय आयोग और सुप्रीम कोर्ट की मुहर
पूर्व नौकरशाहों ने याद दिलाया कि SIR की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है, जिसमें नोटिस भेजने, सुनवाई करने, अपील का मौका देने और हर राजनीतिक दल के बूथ लेवल एजेंटों (BLA) की सीधी भागीदारी का प्रावधान है। यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पूरी प्रक्रिया की कानूनी जांच-परख की थी, जरूरी सुरक्षा सुझाव दिए थे और इसे लागू करने के चुनाव आयोग के संवैधानिक अधिकार पर मुहर लगाई थी।
अंत में पूर्व अधिकारियों ने साफ संदेश देते हुए कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना हर नागरिक का बुनियादी हक है, लेकिन किसी संवैधानिक संस्था पर गंभीर आरोप लगाने वाले की यह नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी भी है कि वह अपने दावों के साथ ठोस सबूत पेश करे।











































